US में फिर भारतीयों पर गोलीबारी का साया! कपूरथला के गुरदीप सिंह की पिज्जा डिलीवरी के दौरान हत्या, मेहसाणा के सुरेश पटेल भी लूट में मारे गए
News-Desk
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गुरदीप सिंह की मौत की सूचना 22 अगस्त को परिवार तक पहुंची, जिसके बाद पंजाब के कपूरथला स्थित उनके गांव में मातम छा गया। परिवार के मुताबिक गुरदीप करीब एक दशक पहले काम की तलाश में अमेरिका गया था। वह अविवाहित था और परिवार अगले साल जनवरी-फरवरी में उसकी शादी की तैयारी कर रहा था। लेकिन शादी की खुशियों से पहले ही परिवार को बेटे की मौत की खबर मिल गई।
दूसरी ओर, गुजरात के मेहसाणा जिले के आखज गांव से संबंध रखने वाले सुरेश पटेल करीब 30 वर्षों से अमेरिका में रह रहे थे। टेनेसी के जैक्सनविले शहर में उनकी दुकान में लूट के दौरान गोलीबारी हुई। बताया गया है कि इस घटना के महज तीन दिन पहले ही उन्होंने दुकान खरीदी थी। वारदात के समय उनकी 19 वर्षीय बेटी भी दुकान के भीतर मौजूद थी और उसने अपने सामने पिता को गोली लगते देखा।
दोनों घटनाएं अलग-अलग राज्यों और परिस्थितियों में हुईं, लेकिन दोनों में एक समान बात सामने आती है—अमेरिका में काम और कारोबार कर रहे भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता।
कपूरथला के गुरदीप सिंह की पिज्जा डिलीवरी के दौरान हत्या
पंजाब के कपूरथला जिले के बेगोवाल कस्बे के जब्बोवाल गांव के रहने वाले गुरदीप सिंह की अमेरिका में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
गुरदीप की उम्र 28 वर्ष थी। परिवार के मुताबिक वह करीब 10 साल पहले काम करने के लिए अमेरिका गया था और वहीं रहकर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा था।
जिस समय उस पर हमला हुआ, वह पिज्जा डिलीवरी देने के लिए जा रहा था। इसी दौरान बाइक पर आए हमलावरों ने उस पर फायरिंग कर दी।
गुरदीप को गोली लगने के बाद घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा सके।
परिवार तक जब उसकी मौत की खबर पहुंची तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
बाइक सवार हमलावरों ने अचानक की फायरिंग
परिवार को मिली जानकारी के अनुसार गुरदीप अपनी ड्यूटी के दौरान पिज्जा डिलीवरी देने जा रहा था।
इसी दौरान बाइक पर सवार हमलावर वहां पहुंचे और उस पर गोली चला दी।
अचानक हुए हमले में गुरदीप गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि उसे बचाया नहीं जा सका।
घटना के पीछे हमलावरों का मकसद क्या था और उन्होंने गुरदीप को ही निशाना क्यों बनाया, इसकी पूरी तस्वीर जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
दस साल पहले अमेरिका गया था गुरदीप
गुरदीप के परिवार के अनुसार वह करीब 10 साल पहले अमेरिका गया था।
कम उम्र में भारत से बाहर जाकर उसने काम शुरू किया और अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए मेहनत कर रहा था।
परिवार के लिए वह केवल कमाने वाला सदस्य नहीं था, बल्कि घर की उम्मीदों का बड़ा हिस्सा भी था।
करीब एक दशक तक विदेश में रहने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि अब उसकी जिंदगी स्थिर हो रही है और जल्द ही उसकी शादी भी होगी।
लेकिन अमेरिका से आई एक खबर ने परिवार की सारी उम्मीदें तोड़ दीं।
जनवरी-फरवरी में होने वाली थी गुरदीप की शादी
गुरदीप की शादी की तैयारियां परिवार में शुरू हो चुकी थीं।
उसके चाचा दलेर चंद के मुताबिक गुरदीप के लिए लड़की देखी जा चुकी थी और अगले साल जनवरी-फरवरी में उसकी शादी होने की योजना थी।
परिवार की योजना थी कि जब गुरदीप अगली बार भारत आएगा तो उसे लड़की से मिलवाया जाएगा।
घर में शादी को लेकर उम्मीदें और खुशियां थीं, लेकिन उससे पहले ही उसकी हत्या की खबर आ गई।
गुरदीप अविवाहित था और परिवार के मुताबिक उसकी जिंदगी का यह नया अध्याय शुरू होने वाला था।
गुरदीप के माता-पिता का अब एक ही सहारा
परिवार ने बताया कि गुरदीप का एक भाई भी है, जो गांव में रहकर परिवार की देखभाल करता है।
गुरदीप की मौत के बाद उसके माता-पिता के लिए अब यही बेटा मुख्य सहारा रह गया है।
एक बेटे की विदेश में हत्या और दूसरे बेटे पर परिवार की जिम्मेदारी आ जाना माता-पिता के लिए बेहद कठिन परिस्थिति है।
परिवार की सबसे बड़ी मांग फिलहाल यही है कि गुरदीप का शव जल्द भारत लाया जाए ताकि अंतिम संस्कार अपने गांव में किया जा सके।
परिवार ने केंद्र और पंजाब सरकार से लगाई गुहार
गुरदीप सिंह के परिवार ने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार से मदद की अपील की है।
परिजनों की मांग है कि अमेरिकी प्रशासन के साथ समन्वय करके गुरदीप का शव जल्द से जल्द भारत लाने की प्रक्रिया में सहायता की जाए।
परिवार ने यह भी मांग की है कि हत्या के आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
गांव के लोगों ने भी सरकार से परिवार की सहायता करने और शव भारत लाने के लिए हरसंभव प्रयास करने की अपील की है।
अब मेहसाणा के सुरेश पटेल की हत्या ने बढ़ाई चिंता
गुरदीप सिंह की हत्या की खबर के बीच अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी सुरेश पटेल की हत्या का मामला भी सामने आया है।
सुरेश पटेल गुजरात के मेहसाणा जिले के आखज गांव के रहने वाले थे।
वह करीब 30 वर्षों से अमेरिका में रह रहे थे और वहां अपना कारोबार कर रहे थे।
20 अगस्त को टेनेसी के जैक्सनविले शहर में उनकी दुकान में एक नकाबपोश व्यक्ति घुसा और लूट के दौरान गोलीबारी कर दी।
इस हमले में सुरेश पटेल की मौत हो गई।
दुकान में बेटी की आंखों के सामने पिता की हत्या
सुरेश पटेल की हत्या की सबसे दर्दनाक बात यह है कि वारदात के समय उनकी 19 वर्षीय बेटी भी दुकान के अंदर मौजूद थी।
बताया गया कि उसने अपनी आंखों के सामने पिता को गोली लगते देखा।
एक कारोबारी परिवार के लिए दुकान आम तौर पर रोजमर्रा की जिंदगी और कमाई का केंद्र होती है। लेकिन इस घटना में वही जगह परिवार के लिए सबसे दर्दनाक याद में बदल गई।
पुलिस अब घटना के CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है।
दुकान खरीदने के सिर्फ तीन दिन बाद हुई हत्या
स्थानीय मीडिया की जानकारी के अनुसार सुरेश पटेल ने घटना से सिर्फ तीन दिन पहले ही यह दुकान खरीदी थी।
नई दुकान के साथ कारोबार को आगे बढ़ाने की उम्मीदें थीं।
लेकिन खरीदारी के कुछ ही दिनों बाद दुकान में घुसकर हुई गोलीबारी ने उनकी जान ले ली।
इस पहलू ने घटना को और भी झकझोर देने वाला बना दिया है।
नकाबपोश आरोपी कैश लूटने दुकान में घुसा था
पुलिस के अनुसार आरोपी नकाब पहनकर दुकान में दाखिल हुआ था।
उसका उद्देश्य कथित तौर पर पैसे लूटना था। उसने दुकान के कर्मचारियों से कैश मांगा।
कैश मिलने के बाद आरोपी ने सुरेश पटेल पर गोली चला दी।
गोलीबारी में दुकान का एक कर्मचारी भी घायल हुआ।
इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।
CCTV में कैद हुआ गोलीबारी करने वाला आरोपी
घटना की जांच में पुलिस को दुकान के CCTV कैमरों से महत्वपूर्ण फुटेज मिला है।
फुटेज में आरोपी को दुकान के अंदर देखा गया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने ग्रे रंग की हुडी, जींस और काले बूट पहन रखे थे। उसके चेहरे पर मास्क था।
वारदात के बाद वह एक सफेद रंग की कार में बैठकर मौके से फरार हो गया।
पुलिस अब CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की मदद से आरोपी की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
पुलिस ने लोगों से मांगी आरोपी की जानकारी
जैक्सनविले पुलिस ने घटना के संबंध में लोगों से जानकारी देने की अपील की है।
CCTV फुटेज सामने आने के बाद पुलिस उम्मीद कर रही है कि आरोपी की पहचान या उसके बारे में कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
अमेरिका में स्थानीय पुलिस ऐसे मामलों में आम लोगों से संदिग्ध व्यक्ति या वाहन से जुड़ी जानकारी साझा करने की अपील करती है।
इस मामले में भी जांच एजेंसियां आरोपी तक पहुंचने के लिए उपलब्ध सभी सुरागों की पड़ताल कर रही हैं।
30 साल से अमेरिका में रह रहे थे सुरेश पटेल
सुरेश पटेल का परिवार गुजरात के मेहसाणा जिले से जुड़ा था।
वह लगभग तीन दशक से अमेरिका में रह रहे थे।
इतने लंबे समय में उन्होंने वहां अपना जीवन और कारोबार स्थापित किया था।
भारतीय मूल के कई परिवारों की तरह उन्होंने भी विदेश में मेहनत करके अपनी पहचान बनाई और कारोबार खड़ा किया।
लेकिन एक लूट की घटना ने परिवार को हमेशा के लिए बदल दिया।
दो अलग घटनाएं, एक जैसी चिंता
गुरदीप सिंह और सुरेश पटेल की घटनाएं एक-दूसरे से अलग हैं।
गुरदीप डिलीवरी के दौरान सड़क पर हमले का शिकार हुआ, जबकि सुरेश पटेल अपनी दुकान के अंदर लूट के दौरान मारे गए।
एक पंजाब का 28 वर्षीय युवक था जो करीब 10 साल पहले अमेरिका गया था। दूसरा गुजरात का कारोबारी था जो करीब 30 वर्षों से अमेरिका में रह रहा था।
लेकिन दोनों मामलों ने अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ाई है।
2025 में अमेरिका में भारतीय नागरिकों पर 14 जानलेवा हमले
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारतीय नागरिकों पर जानलेवा हमलों और हिंसा के 14 मामले अमेरिका में दर्ज किए गए।
वर्ष 2024 में ऐसे मामलों की संख्या 11 बताई गई थी।
यानी उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024 की तुलना में 2025 में अमेरिका में भारतीय नागरिकों से जुड़े ऐसे मामलों में वृद्धि दर्ज हुई।
अमेरिका में भारतीय नागरिकों पर हुए जानलेवा हमलों की संख्या को लेकर यह आंकड़ा किसी भी देश के मुकाबले सबसे अधिक बताया गया है।
भारतीय समुदाय के लिए सुरक्षा का सवाल क्यों महत्वपूर्ण है?
अमेरिका में भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं।
कई लोग टेक्नोलॉजी, चिकित्सा, शिक्षा, इंजीनियरिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र में हैं, तो बड़ी संख्या में भारतीय मूल के परिवार छोटे-बड़े कारोबार भी संचालित करते हैं।
गैस स्टेशन, स्टोर, रेस्टोरेंट, होटल, किराना कारोबार और अन्य व्यवसायों में भी भारतीय मूल के लोगों की मौजूदगी है।
इनमें से कई कारोबार देर रात तक खुले रहते हैं और नकदी का लेनदेन भी होता है।
ऐसे व्यवसाय कभी-कभी लूट और हिंसक अपराधों के जोखिम में आ सकते हैं।
छोटे कारोबारियों के लिए लूट का खतरा बड़ी चुनौती
सुरेश पटेल की घटना इस पहलू को सामने लाती है।
एक छोटे कारोबारी के लिए दुकान केवल व्यवसाय नहीं होती। वह परिवार की आय, वर्षों की मेहनत और भविष्य की योजना का हिस्सा होती है।
जब कोई हथियारबंद व्यक्ति लूट के लिए दुकान में घुसता है तो कुछ ही सेकंड में स्थिति जानलेवा हो सकती है।
सुरेश पटेल के मामले में भी पुलिस के अनुसार आरोपी कैश लेने के बाद फायरिंग कर फरार हो गया।
डिलीवरी वर्कर्स भी जोखिम में रहते हैं
गुरदीप सिंह की मौत का मामला अलग तरह की चिंता सामने लाता है।
डिलीवरी का काम करने वाले लोगों को लगातार सड़क पर रहना पड़ता है। वे अनजान इलाकों में जाते हैं, रात में भी काम करते हैं और कई बार अकेले यात्रा करते हैं।
ऐसे काम में सड़क सुरक्षा के साथ-साथ अपराध से बचाव भी चुनौती बन सकता है।
गुरदीप पर हमला उसी समय हुआ जब वह डिलीवरी के लिए जा रहा था।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हमला लूट के उद्देश्य से था या किसी अन्य कारण से।
गुरदीप के परिवार की सबसे बड़ी मांग—शव भारत लाया जाए
किसी परिवार के लिए विदेश में हुई मौत के बाद शव को भारत लाना भावनात्मक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर कठिन प्रक्रिया हो सकती है।
गुरदीप के परिवार ने केंद्र और पंजाब सरकार से इस प्रक्रिया में मदद की मांग की है।
परिजन चाहते हैं कि बेटे का अंतिम संस्कार उसके गांव और परिवार के बीच हो।
परिवार ने हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार कर सजा दिलाने की मांग भी की है।
अमेरिकी जांच में अब आरोपी की तलाश
सुरेश पटेल के मामले में अमेरिकी पुलिस के पास CCTV फुटेज मौजूद है।
फुटेज में संदिग्ध का पहनावा और वाहन से संबंधित जानकारी सामने आई है।
पुलिस अब इस आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है।
जांच के दौरान यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि आरोपी की पहचान क्या है, क्या वह पहले भी इसी तरह की वारदातों में शामिल रहा है और क्या घटना में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।
भारतीय परिवारों की चिंता सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं
विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए ऐसी घटनाएं केवल एक अपराध की खबर नहीं होतीं।
कई परिवार अपने बच्चों को हजारों किलोमीटर दूर बेहतर रोजगार और भविष्य की उम्मीद में भेजते हैं।
जब कोई गंभीर घटना होती है तो परिवार को सबसे पहले उसकी सही जानकारी मिलने, अस्पताल और पुलिस प्रक्रिया समझने तथा शव को भारत लाने जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
यही वजह है कि विदेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्थानीय प्रशासन और भारतीय मिशनों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है।
पंजाब और गुजरात के परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
कपूरथला के जब्बोवाल गांव में गुरदीप की मौत की खबर ने परिवार और ग्रामीणों को झकझोर दिया है।
वहीं गुजरात के आखज गांव से जुड़े सुरेश पटेल के परिवार के लिए अमेरिका से आई हत्या की खबर ने गहरा सदमा दिया है।
दोनों परिवारों के लिए यह केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि अपने प्रियजन को खोने का असहनीय दुख है।
एक परिवार शादी की तैयारियों की उम्मीद कर रहा था, दूसरे परिवार ने अमेरिका में दशकों की मेहनत के बाद अपना जीवन बनाया था।
अमेरिका में भारतीय समुदाय की सुरक्षा फिर चर्चा में
इन घटनाओं के बाद अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
हालांकि हर अपराध को भारतीय समुदाय के खिलाफ लक्षित हमला मानना उचित नहीं होगा। दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग हैं और जांच पूरी होने के बाद ही इनके कारणों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
फिर भी उपलब्ध आंकड़ों और हालिया घटनाओं के कारण विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
परिवारों को न्याय की उम्मीद
गुरदीप सिंह के परिवार की मांग है कि उसके हत्यारों को पकड़ा जाए और उन्हें कड़ी सजा मिले।
सुरेश पटेल के मामले में भी पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है और CCTV फुटेज जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दोनों मामलों में परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज न्याय है—और उसके साथ अपने प्रियजन की अंतिम विदाई सम्मानपूर्वक अपने देश में करना।
विदेश में काम करने वाले भारतीयों के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
अमेरिका समेत दुनिया के किसी भी देश में काम करने वाले भारतीयों के लिए रोजगार और बेहतर भविष्य महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सुरक्षा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
डिलीवरी, दुकानदारी, गैस स्टेशन, रेस्टोरेंट या अन्य सार्वजनिक संपर्क वाले कामों में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है।
खासकर देर रात काम करने वालों के लिए स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन संपर्क और कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।
दो मौतों ने कई सवाल छोड़े
गुरदीप सिंह की हत्या के पीछे हमलावरों का मकसद क्या था? क्या यह लूट थी या किसी अन्य वजह से हमला किया गया? आरोपी कौन थे?
सुरेश पटेल की दुकान में आरोपी किस मकसद से पहुंचा था? क्या वह पहले से दुकान को निशाना बनाकर आया था? क्या पुलिस CCTV के आधार पर जल्द उसे पकड़ पाएगी?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
फिलहाल दोनों परिवार अपने प्रियजनों को खोने के दर्द से गुजर रहे हैं।
अब नजर अमेरिकी जांच और सरकारी मदद पर
गुरदीप सिंह के मामले में परिवार को उम्मीद है कि भारतीय और पंजाब सरकार उसके शव को भारत लाने में सहायता करेंगी और अमेरिकी अधिकारियों के साथ संपर्क के जरिए जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वहीं सुरेश पटेल के मामले में स्थानीय पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है।
इन घटनाओं में आगे होने वाली गिरफ्तारियां और जांच की प्रगति ही यह स्पष्ट करेगी कि दोनों वारदातों के पीछे वास्तविक कारण क्या थे।

