Nepal को भारत से मिलेगी 654 मेगावाट बिजली, बाढ़ से तबाह हाइड्रोपावर के बाद बढ़ी निर्भरता; 28 लाख घरों की जरूरत हो सकती है पूरी
Nepal के हाइड्रोपावर ढांचे को हाल में आई भीषण बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचने के बाद भारत ने वहां बिजली की अतिरिक्त जरूरत पूरी करने के लिए 654 मेगावाट बिजली निर्यात करने की मंजूरी दी है। भारत के बिजली मंत्रालय की ओर से दी गई अनुमति के मुताबिक यह बिजली 31 दिसंबर 2026 तक नेपाल को उपलब्ध कराई जा सकेगी।
बताया गया है कि बिजली की आपूर्ति रोजाना 18 घंटे की अवधि के लिए होगी। यह व्यवस्था नेपाल के लिए ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब बाढ़ के कारण कई ऊर्जा परियोजनाओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है और घरेलू बिजली उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है।
लगातार 654 मेगावाट बिजली उपलब्ध होने पर अनुमान के मुताबिक करीब 28 लाख घरों की सालभर की बिजली जरूरत के बराबर ऊर्जा उपलब्ध हो सकती है। हालांकि वास्तविक उपयोग और लाभ नेपाल की बिजली वितरण व्यवस्था तथा मांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
रात 12 बजे से शाम 6 बजे तक बिजली निर्यात की मंजूरी
भारत की ओर से मंजूर की गई बिजली आपूर्ति नेपाल की मौजूदा जरूरत को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण है। अनुमति के तहत प्रतिदिन 18 घंटे बिजली निर्यात की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बाढ़ के बाद पैदा हुए बिजली उत्पादन के अंतर को कुछ हद तक भरना है।
नेपाल की बिजली व्यवस्था में जलविद्युत परियोजनाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। मानसून के दौरान पर्याप्त पानी मिलने पर नेपाल कई बार अतिरिक्त बिजली का उत्पादन करता है और भारत को बिजली बेचता भी है। लेकिन प्राकृतिक आपदा के कारण जब यही उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है, तो स्थिति तेजी से बदल जाती है।
इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। बाढ़ ने बिजली उत्पादन से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद नेपाल को अतिरिक्त बिजली के लिए भारत की ओर देखना पड़ा।
बाढ़ ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को दिया बड़ा झटका
नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने सिर्फ सड़क और पुलों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र पर भी बड़ा असर डाला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को इस आपदा से करीब 9,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
इस नुकसान का असर आने वाले समय में बिजली उत्पादन पर भी दिखाई दे सकता है। अनुमान है कि बाढ़ के कारण हर साल करीब 2,520 GWh बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में भारत से अतिरिक्त बिजली की जरूरत केवल तत्काल राहत का मामला नहीं रह जाती, बल्कि यह नेपाल की ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
नेपाल की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी में बिजली की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने का सीधा असर उद्योग, कारोबार, घरेलू उपभोक्ताओं और बुनियादी सेवाओं पर पड़ सकता है।
भारत-नेपाल बिजली व्यापार का रिश्ता एकतरफा नहीं
भारत से नेपाल को बिजली मिलना कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से बिजली का आयात-निर्यात होता रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह रिश्ता सिर्फ भारत से नेपाल को बिजली देने तक सीमित नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में भारत ने नेपाल को करीब 1,810 मिलियन यूनिट बिजली उपलब्ध कराई थी। यह औसतन लगभग 206 मेगावाट लगातार बिजली आपूर्ति के बराबर बैठती है।
लेकिन नेपाल की स्थिति मौसम के साथ बदलती रहती है। सर्दियों में जब जलविद्युत उत्पादन घट जाता है, तब नेपाल भारत से बिजली आयात करता है। दूसरी ओर मानसून के महीनों में जब नदियों में पानी बढ़ता है और हाइड्रोपावर उत्पादन बेहतर होता है, तब नेपाल अतिरिक्त बिजली भारत को बेच सकता है।
यही वजह है कि दोनों देशों के बीच बिजली व्यापार को केवल आयात या निर्यात के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। मौसम, जल उपलब्धता और उत्पादन क्षमता के आधार पर दोनों देशों के बीच बिजली का प्रवाह बदलता रहता है।
2023-24 में नेपाल ने भारत को ज्यादा बिजली बेची थी
नेपाल के लिए इस समय की स्थिति इसलिए भी अलग है क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में वह भारत को बड़ी मात्रा में बिजली बेचने की क्षमता रखता है। वर्ष 2023-24 में नेपाल ने भारत से जितनी बिजली खरीदी थी, उससे अधिक मूल्य की बिजली भारत को बेची थी।
इससे साफ होता है कि नेपाल केवल बिजली का उपभोक्ता देश नहीं है। उसकी जलविद्युत क्षमता उसे क्षेत्रीय बिजली बाजार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर देती है।
लेकिन बाढ़ ने इस समीकरण को अस्थायी रूप से बदल दिया है। हाइड्रोपावर परियोजनाओं और उनसे जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान होने के कारण उत्पादन घटा है। इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि नेपाल की भारत पर बिजली के लिए निर्भरता बढ़ गई।
25 हजार करोड़ रुपये का कुल नुकसान
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से देश को कुल करीब 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुल नुकसान में लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा है। यानी आपदा ने केवल किसी एक क्षेत्र को प्रभावित नहीं किया, बल्कि सड़क, पुल, ऊर्जा और दूसरे महत्वपूर्ण सार्वजनिक ढांचे पर व्यापक असर डाला।
करीब 69 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन सड़कों की मरम्मत में लगभग 3,488 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
पुलों की स्थिति भी गंभीर रही। बाढ़ में 37 पुल पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि कुल 68 पुलों को नुकसान पहुंचा। इन प्रभावित पुलों की कुल लंबाई लगभग 10,671 मीटर बताई गई है।
सिर्फ बिजली की समस्या नहीं, पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित
नेपाल के सामने चुनौती केवल बिजली उत्पादन दोबारा शुरू करने की नहीं है। जब किसी क्षेत्र में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो बिजली परियोजनाओं तक पहुंच, भारी मशीनरी की आवाजाही, मरम्मत कार्य और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति भी मुश्किल हो सकती है।
यानी हाइड्रोपावर परियोजना को नुकसान होने के बाद उसकी मरम्मत सिर्फ बिजली क्षेत्र का काम नहीं रह जाता। सड़क और पुलों की स्थिति भी परियोजनाओं की बहाली की गति को प्रभावित कर सकती है।
इसी पृष्ठभूमि में भारत की ओर से 654 मेगावाट बिजली निर्यात की मंजूरी नेपाल के लिए तत्काल राहत प्रदान करने वाला कदम है। इससे प्रभावित उत्पादन क्षमता की भरपाई करने और बिजली आपूर्ति को सामान्य रखने में मदद मिल सकती है।
भारत की तरफ से राहत प्रयास भी जारी
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद भारत की ओर से केवल बिजली के स्तर पर ही सहायता नहीं दी जा रही है। अब तक भारत नेपाल को राहत सामग्री की आठ खेप भेज चुका है।
इससे दोनों देशों के बीच आपदा के समय सहयोग का एक और पहलू सामने आता है। बाढ़ के कारण जब किसी देश का परिवहन, ऊर्जा और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा एक साथ प्रभावित हो, तब पड़ोसी देश से मिलने वाली तत्काल सहायता काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।
बिजली के मामले में भी यही स्थिति है। नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं की बहाली में समय लग सकता है। तब तक भारत से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली आपूर्ति वहां के ग्रिड पर दबाव कम करने में मदद कर सकती है।
नेपाल के लिए क्यों अहम है 654 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली
654 मेगावाट का आंकड़ा पहली नजर में केवल एक बिजली क्षमता जैसा लग सकता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसका महत्व काफी बड़ा है। बाढ़ के कारण नेपाल में उत्पादन प्रभावित है और दूसरी तरफ घरेलू मांग लगातार बनी हुई है।
ऐसे समय में पड़ोसी देश से स्थिर बिजली आपूर्ति मिलने से बिजली कटौती का दबाव कम किया जा सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ कारोबार और जरूरी सेवाओं को भी फायदा मिल सकता है।
लगातार उपलब्ध बिजली का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बिजली उत्पादन और मांग में अंतर को अचानक खत्म करना किसी देश के लिए आसान नहीं होता। नई परियोजनाएं तैयार करने या क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर ढांचे को पूरी तरह बहाल करने में समय लगता है। आयातित बिजली इस अंतर को भरने का तत्काल विकल्प बन सकती है।
बाढ़ के बाद बदला बिजली व्यापार का समीकरण
नेपाल और भारत के बीच बिजली व्यापार की कहानी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदली है। नेपाल ने अपनी जलविद्युत क्षमता बढ़ाकर बिजली निर्यात की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। मानसून के दौरान अतिरिक्त उत्पादन भारत के लिए भी उपयोगी साबित होता है।
लेकिन प्राकृतिक आपदा ने दिखा दिया कि जलविद्युत पर ज्यादा निर्भरता के साथ जोखिम भी जुड़े हैं। बाढ़, भूस्खलन और नदी के तेज बहाव जैसी घटनाएं बिजली उत्पादन से जुड़े बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में क्षेत्रीय बिजली व्यापार का महत्व और बढ़ जाता है। जिस समय किसी देश के पास अतिरिक्त बिजली होती है, वह दूसरे देश की जरूरत पूरी कर सकता है और संकट के समय वही व्यवस्था विपरीत दिशा में काम कर सकती है।
नेपाल के मामले में फिलहाल भारत से मिलने वाली 654 मेगावाट अतिरिक्त बिजली इसी क्षेत्रीय सहयोग की मिसाल है।
आगे की चुनौती हाइड्रोपावर ढांचे की बहाली
भारत से बिजली मिलने से नेपाल को तत्काल राहत जरूर मिलेगी, लेकिन दीर्घकालीन समाधान उसके क्षतिग्रस्त ऊर्जा ढांचे की बहाली में ही होगा। करीब 2,520 GWh सालाना उत्पादन पर संभावित प्रभाव का अनुमान बताता है कि नुकसान सामान्य स्तर का नहीं है।
ऊर्जा क्षेत्र में नुकसान की भरपाई के साथ-साथ सड़कों और पुलों की मरम्मत भी जरूरी होगी। क्योंकि बिजली परियोजनाओं तक पहुंच और उनकी आपूर्ति श्रृंखला के लिए परिवहन ढांचा बेहद महत्वपूर्ण होता है।
करीब 25 हजार करोड़ रुपये के कुल बाढ़ नुकसान के बीच नेपाल के लिए पुनर्निर्माण एक बड़ी चुनौती होगी। इसमें ऊर्जा क्षेत्र की बहाली भी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी।
भारत-नेपाल ऊर्जा सहयोग को मिल सकती है नई मजबूती
मौजूदा संकट दोनों देशों के बीच बिजली सहयोग को और मजबूत करने का अवसर भी बन सकता है। नेपाल के पास विशाल जलविद्युत क्षमता है, जबकि भारत का बिजली बाजार और ग्रिड दोनों देशों के बीच भविष्य में बड़े स्तर के ऊर्जा व्यापार की संभावनाएं खोलते हैं।
हालांकि अभी तत्काल प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को स्थिर करना और क्षतिग्रस्त ढांचे को बहाल करना है। भारत की ओर से 31 दिसंबर 2026 तक 654 मेगावाट बिजली निर्यात की मंजूरी इसी तत्काल जरूरत को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है।

