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Masood Azhar पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, नई रेड बुक में फिर भगोड़ा घोषित; FATF बैठक से पहले बड़ा कदम

पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के प्रमुख और भारत में कई बड़े आतंकी मामलों के आरोपी Masood Azhar को लेकर एक बार फिर कार्रवाई का ऐलान किया है। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने अपनी नई रेड बुक में मसूद अजहर को फिर से भगोड़ा घोषित किया है। इसके साथ ही उस पर घोषित इनाम की रकम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दी गई है।

दिलचस्प बात यह है कि यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब अक्टूबर में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की बैठक होने वाली है। पाकिस्तान पहले भी FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है और उस दौरान उस पर आतंकवाद की फंडिंग तथा मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का अंतरराष्ट्रीय दबाव रहा था।

मसूद अजहर का नाम भारत में संसद पर हुए आतंकी हमले के अलावा पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा हमले जैसे गंभीर मामलों से जुड़ा रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की नई कार्रवाई को केवल एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।

2021 में भी भगोड़ा घोषित हुआ था मसूद अजहर

मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान का यह कदम नया नहीं है। FIA ने इससे पहले 2021 में भी उसे अपनी रेड बुक में भगोड़ा घोषित किया था। उस समय उसके बारे में जानकारी देने के लिए 50 लाख पाकिस्तानी रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

अब इस रकम को बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया गया है। नई रेड बुक में उसका नाम दोबारा शामिल किया जाना इस बात को रेखांकित करता है कि पाकिस्तानी एजेंसियां आधिकारिक तौर पर उसे अपने यहां मौजूद नहीं मान रही हैं।

पाकिस्तान ने 2021 में दावा किया था कि मसूद अजहर देश में नहीं है और वह अफगानिस्तान चला गया है। हालांकि, जैश-ए-मोहम्मद के इस संस्थापक को लेकर भारत लंबे समय से पाकिस्तान और क्षेत्रीय आतंकवाद के संदर्भ में गंभीर आरोप लगाता रहा है।

मसूद अजहर को भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने आतंकी गतिविधियों से जोड़ा है। उसका संगठन जैश-ए-मोहम्मद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों में शामिल है।

FATF बैठक से ठीक पहले क्यों अहम है पाकिस्तान का फैसला?

मसूद अजहर के खिलाफ पाकिस्तान की ओर से इनाम बढ़ाने और उसे भगोड़ा घोषित करने की खबर ऐसे समय आई है जब FATF की बैठक अक्टूबर में प्रस्तावित है। यही वजह है कि इस कदम की टाइमिंग पर भी ध्यान जा रहा है।

पाकिस्तान पहले FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। उस दौर में पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों की फंडिंग रोकने, मनी लॉन्ड्रिंग पर नियंत्रण मजबूत करने और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव था।

अक्टूबर 2022 में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया था। अब आगामी बैठक से पहले किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने रखना, जिसका नाम आतंकवाद से जुड़े मामलों में लंबे समय से चर्चा में रहा है, पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने का एक प्रयास माना जा सकता है।

यानी मामला सिर्फ 20 लाख पाकिस्तानी रुपए अतिरिक्त इनाम का नहीं है। इसके पीछे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि और आतंकवाद के खिलाफ उसकी कार्रवाई को लेकर उठने वाले सवाल भी जुड़े हैं।

पाकिस्तान की कार्रवाई से क्या संदेश देने की कोशिश?

पाकिस्तान इस कदम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर सकता है कि उसकी सुरक्षा और जांच एजेंसियां आतंकवाद से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं। खासकर FATF जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था की बैठक से पहले ऐसी कार्रवाई का सार्वजनिक रिकॉर्ड पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, किसी व्यक्ति को रेड बुक में भगोड़ा घोषित करना और उसके खिलाफ इनाम घोषित करना अलग बात है, जबकि उसे वास्तव में गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाना अलग। मसूद अजहर के मामले में भी यही सबसे महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है कि वह वास्तव में कहां है और उसके खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई जमीन पर कितनी प्रभावी है।

यही वजह है कि मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान का नया ऐलान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर खींच सकता है।

कंधार विमान हाईजैक के बाद रिहा हुआ था मसूद अजहर

मसूद अजहर का नाम भारत-पाकिस्तान आतंकवाद के इतिहास में सबसे ज्यादा चर्चित नामों में रहा है। वह 1990 के दशक में भारत आया और बाद में आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया।

इसके बाद 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 के कंधार हाईजैक मामले के दौरान यात्रियों की रिहाई के बदले जिन आतंकियों को जेल से छोड़ा गया, उनमें मसूद अजहर भी शामिल था। रिहाई के बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की और संगठन का प्रमुख बना।

यहीं से उसका नाम कश्मीर और भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के संदर्भ में और अधिक प्रमुखता से सामने आने लगा।

1994 में पहली बार भारत पहुंचा था मसूद अजहर

मसूद अजहर पहली बार 29 जनवरी 1994 को बांग्लादेश से विमान के जरिए ढाका से दिल्ली पहुंचा था। इसके बाद उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया।

उस समय उसका उद्देश्य हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी और हरकत-उल-मुजाहिदीन से जुड़े गुटों के बीच तनाव कम करना बताया गया था। लेकिन बाद में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसे आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में अनंतनाग से गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद मसूद अजहर ने कश्मीर को लेकर बेहद आक्रामक बयान दिए थे। उसने दावा किया था कि कश्मीर को आजाद कराने के लिए कई देशों से इस्लाम के लड़ाके आए हैं और भारत की कार्बाइन का जवाब रॉकेट लॉन्चर से देने की बात कही थी।

इसके बाद वह कई वर्षों तक भारतीय जेल में रहा।

1995 में विदेशी पर्यटकों के अपहरण से जुड़ा मामला

मसूद अजहर की गिरफ्तारी के बाद 1995 में जम्मू-कश्मीर में विदेशी पर्यटकों के अपहरण का मामला सामने आया। जुलाई 1995 में छह विदेशी पर्यटकों को अगवा किया गया था।

अपहरणकर्ताओं ने पर्यटकों की रिहाई के बदले मसूद अजहर को जेल से छोड़ने की मांग की थी। अगस्त में इनमें से दो पर्यटक किसी तरह अपहरणकर्ताओं के कब्जे से भागने में सफल रहे, लेकिन बाकी लोगों का कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका।

इस घटना ने भी मसूद अजहर के नाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया था।

कंधार कांड के बाद बदली पूरी कहानी

मसूद अजहर की कहानी में सबसे बड़ा मोड़ 1999 में आया। इंडियन एयरलाइंस के विमान के अपहरण के बाद यात्रियों को बचाने के लिए भारत सरकार को अपहरणकर्ताओं की मांग माननी पड़ी।

मसूद अजहर समेत कुछ आतंकियों की रिहाई हुई और इसके बाद वह भारत की जेल से बाहर निकल गया। रिहाई के बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद नाम के संगठन को खड़ा किया।

बाद के वर्षों में जैश-ए-मोहम्मद का नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा। इनमें भारतीय संसद पर हमला, पठानकोट एयरबेस हमला और पुलवामा हमला प्रमुख हैं।

भारतीय संसद हमले से लेकर पुलवामा तक नाम सामने आया

मसूद अजहर पर भारत में कई गंभीर आतंकी मामलों में आरोपी होने के आरोप हैं। भारतीय संसद पर हुए हमले के मामले में भी उसका नाम सामने आया था।

इसके बाद जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले में जैश-ए-मोहम्मद की भूमिका को लेकर भारतीय जांच एजेंसियों ने मसूद अजहर और उसके संगठन को जिम्मेदार ठहराया।

फिर फरवरी 2019 में पुलवामा में CRPF के जवानों को निशाना बनाकर किया गया आत्मघाती हमला हुआ। इस हमले में 40 जवानों की मौत हुई थी। पुलवामा हमले के बाद भी जैश-ए-मोहम्मद और मसूद अजहर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से सामने आया।

इस पूरे इतिहास के कारण मसूद अजहर भारत के लिए लंबे समय से वांछित आतंकियों में शामिल रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर चर्चा में आया मसूद अजहर का परिवार

मसूद अजहर का नाम हाल के वर्षों में एक बार फिर उस समय सुर्खियों में आया जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।

22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के बाद 7 मई को भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी।

बहावलपुर में हुई कार्रवाई के दौरान मसूद अजहर के परिवार के कई सदस्यों के मारे जाने की बात सामने आई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उसके परिवार के 10 सदस्यों की मौत हुई थी। इनमें उसकी बड़ी बहन और उसका पति, भतीजा और उसकी पत्नी, एक भतीजी तथा उसके पांच बच्चे शामिल बताए गए।

इसके अलावा उसके चार सहयोगियों के मारे जाने की भी जानकारी सामने आई थी।

बताया गया कि हमले के समय मसूद अजहर उस स्थान पर मौजूद नहीं था। इसी वजह से वह इस कार्रवाई में बच गया।

परिवार के सदस्यों की मौत के बाद मसूद अजहर की ओर से एक बयान भी सामने आया था, जिसमें उसने कहा था कि अगर वह भी मारा जाता तो वह उसके लिए सौभाग्य की बात होती।

मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान की नीति पर फिर सवाल

मसूद अजहर के मामले में पाकिस्तान का नया फैसला कई पुराने सवालों को भी फिर सामने लाता है। एक तरफ पाकिस्तान की एजेंसी उसे भगोड़ा घोषित कर रही है और उसके बारे में सूचना देने पर 70 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रही है, जबकि दूसरी तरफ मसूद अजहर का नाम दशकों से भारत में हुए बड़े आतंकी मामलों से जुड़ा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पाकिस्तान के अनुसार मसूद अजहर उसके क्षेत्र में मौजूद नहीं है, तो वह वास्तव में कहां है और उसे पकड़ने के लिए पाकिस्तान की एजेंसियों ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं।

2021 में भी पाकिस्तान ने उसके अफगानिस्तान भागने का दावा किया था। अब नई रेड बुक में उसे फिर भगोड़ा घोषित किए जाने से यह मामला दोबारा अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आ सकता है।

70 लाख का इनाम और FATF की टाइमिंग पर नजर

मसूद अजहर पर इनाम को 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए करना अपने आप में बड़ा वित्तीय अंतर नहीं है, लेकिन इस कदम का राजनीतिक और कूटनीतिक संदर्भ ज्यादा महत्वपूर्ण है।

अक्टूबर में FATF की बैठक होने वाली है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए यह दिखाना महत्वपूर्ण हो सकता है कि वह आतंकवाद और आतंकी फंडिंग से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

मसूद अजहर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही बेहद संवेदनशील है। इसलिए उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम बढ़ाने और उसे रेड बुक में भगोड़ा घोषित करने जैसी कार्रवाई का उल्लेख पाकिस्तान अपनी आतंकवाद-रोधी कोशिशों के प्रमाण के रूप में कर सकता है।

लेकिन इस कार्रवाई की वास्तविक अहमियत इस बात से तय होगी कि इसके बाद मसूद अजहर के खिलाफ कोई ठोस कानूनी या प्रवर्तन कार्रवाई होती है या नहीं।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मसूद अजहर का मामला?

भारत के संदर्भ में मसूद अजहर का मामला सिर्फ एक आतंकी संगठन के प्रमुख तक सीमित नहीं है। उसका नाम पिछले तीन दशकों में भारत में हुए कई बड़े आतंकवादी घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है।

1994 में भारत में गिरफ्तारी, 1999 के कंधार विमान अपहरण के बाद रिहाई, जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना, संसद हमले से जुड़े आरोप, पठानकोट और पुलवामा जैसे मामलों में संगठन की भूमिका—इन घटनाओं ने उसे भारत के खिलाफ आतंकवाद के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल कर दिया।

इसीलिए पाकिस्तान की नई रेड बुक में उसका नाम और बढ़ा हुआ इनाम सामने आना भारत के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

अब आगे क्या होगा, इस पर रहेगी नजर

पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से मसूद अजहर को फिर भगोड़ा घोषित कर दिया है और उसकी सूचना देने वाले के लिए इनाम 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया है। लेकिन इस कदम के बाद असली नजर इस बात पर रहेगी कि पाकिस्तान उसके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई करता है।

खासकर FATF की अक्टूबर बैठक के संदर्भ में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान आतंकवाद और आतंकी फंडिंग के खिलाफ अपनी कार्रवाई को किस तरह प्रस्तुत करता है। मसूद अजहर जैसा नाम इस पूरी प्रक्रिया में स्वाभाविक रूप से ज्यादा ध्यान खींचेगा।

मसूद अजहर पर पाकिस्तान का नया कदम
FIA की नई रेड बुक में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को फिर भगोड़ा घोषित किया गया है और उसके बारे में जानकारी देने का इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया गया है। अक्टूबर में होने वाली FATF बैठक से पहले हुई यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मसूद अजहर का नाम भारत में संसद हमले, पठानकोट और पुलवामा जैसे गंभीर आतंकी मामलों से जुड़ा रहा है। अब सबसे अहम सवाल यही है कि पाकिस्तान का यह कदम केवल रिकॉर्ड और घोषणा तक सीमित रहता है या आगे कोई ठोस कार्रवाई भी होती है।

 

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