वैश्विक

Imran Khan को 48 घंटे में अस्पताल भेजने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश, बहनों से मुलाकात भी अधिकार; मेडिकल बोर्ड करेगा पूरी जांच

पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan को लेकर हलचल तेज हो गई है। जेल में बंद इमरान खान की सेहत और परिवार से मुलाकात के अधिकार से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि इमरान खान को 48 घंटे के भीतर अडियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है। इस बोर्ड में विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ इमरान की बहन डॉ. उजमा खान और उनके निजी डॉक्टर को शामिल करने का निर्देश भी दिया गया है।

अदालत ने इमरान की बहनों से मुलाकात के मामले को भी गंभीरता से लिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि बहनों से मुलाकात कराना जेल प्रशासन की ओर से किया जाने वाला कोई एहसान नहीं है, बल्कि यह उनका मौलिक अधिकार है।

अदालत ने पिछले तीन वर्षों के दौरान इमरान खान और उनकी बहनों के बीच हुई मुलाकातों का रिकॉर्ड भी मांगा है। इसके अलावा उनके बेटों के साथ बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी भी अदालत के सामने पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

48 घंटे में अस्पताल ट्रांसफर करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने इमरान खान की जेल में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को नया मोड़ दे दिया है।

अदालत ने निर्देश दिया है कि इमरान खान को 48 घंटे के भीतर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। वहां उनकी स्वास्थ्य स्थिति की विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच कराई जाएगी।

अदालत का यह निर्देश उस समय आया है जब इमरान खान की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर भी सुनवाई के दौरान कई सवाल उठे।

कोर्ट ने माना कि केवल संक्षिप्त मेडिकल समरी पर्याप्त नहीं है और इमरान की पूरी मेडिकल स्थिति अदालत के सामने रखी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट पर जताई नाराजगी

मामले की सुनवाई के दौरान अडियाला जेल प्रशासन से इमरान खान की विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट मांगी गई थी।

अदालत के सामने जब पूरी रिपोर्ट के बजाय केवल मेडिकल समरी पेश की गई तो जस्टिस शाहिद वहीद ने नाराजगी जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किसी कैदी की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अदालत के सामने पूरी और पर्याप्त जानकारी उपलब्ध होना जरूरी है, खासकर तब जब मामला गंभीर स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से जुड़ा हो।

अदालत ने स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को लेकर अधिक विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

तीन जजों की बेंच कर रही थी सुनवाई

इमरान खान के इलाज और परिवार से मुलाकात से संबंधित याचिकाओं पर तीन सदस्यीय बेंच सुनवाई कर रही थी।

इस बेंच की अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वहीद ने की। उनके साथ जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल थे।

सुनवाई के दौरान इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति, मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल में इलाज और परिवार से मुलाकात जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

मेडिकल रिपोर्ट में ब्लड प्रेशर और नब्ज का जिक्र

अदालत के सामने रखी गई मेडिकल जानकारी में इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कुछ चिंताओं का उल्लेख किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक उनके ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव और दिल की धड़कन से संबंधित स्थिति का उल्लेख किया गया है। साथ ही मानसिक तनाव की बात भी सामने आई।

रिपोर्ट में हालिया ब्लड प्रेशर 140/80 दर्ज होने की जानकारी दी गई, जबकि फरवरी में यह 120/80 बताया गया था।

उनकी नब्ज 54 बार प्रति मिनट दर्ज होने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई।

इन आंकड़ों के आधार पर अदालत ने विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत को महत्व दिया।

मेडिकल बोर्ड करेगा इमरान की विस्तृत जांच

सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति की व्यापक जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया है।

इस बोर्ड में विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों को शामिल किया जाएगा। बोर्ड इमरान की वर्तमान स्थिति के साथ उनकी पुरानी मेडिकल रिपोर्टों की भी समीक्षा करेगा।

अदालत ने इमरान की बहन डॉ. उजमा खान और उनके निजी डॉक्टर को भी मेडिकल बोर्ड का हिस्सा बनाने का निर्देश दिया है।

इसका उद्देश्य इमरान की स्वास्थ्य स्थिति का स्वतंत्र और व्यापक चिकित्सकीय मूल्यांकन करना बताया गया है।

ब्लड क्लॉट को लेकर भी होगी जांच

मेडिकल बोर्ड से यह भी पता लगाने को कहा गया है कि इमरान खान की स्वास्थ्य संबंधी समस्या की वास्तविक स्थिति क्या है और रिपोर्ट में बताए गए ब्लड क्लॉट से जुड़ी परेशानी का कारण क्या है।

डॉक्टर उनकी मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन करेंगे और यह तय करेंगे कि उन्हें किस तरह के इलाज की आवश्यकता है।

इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि उनका उपचार जेल के भीतर संभव है या अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक है।

अंतिम चिकित्सकीय राय मेडिकल बोर्ड की जांच के बाद सामने आएगी।

आंख की बीमारी का भी मेडिकल रिपोर्ट में जिक्र

अडियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने इमरान खान की दो पन्नों की मेडिकल रिपोर्ट पेश की थी।

इस रिपोर्ट में उनकी आंख से जुड़ी बीमारी सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन का भी उल्लेख किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार इस समस्या का उपचार चल रहा है और प्रभावित आंख की दृष्टि लगभग सामान्य होने की जानकारी दी गई है।

मेडिकल रिपोर्ट में 4 नवंबर 2023 से 10 अगस्त 2026 के बीच हुई 39 मेडिकल जांचों का भी जिक्र किया गया है।

39 मेडिकल जांचों का रिकॉर्ड भी अदालत के सामने

जेल प्रशासन की रिपोर्ट में लगभग तीन वर्षों के दौरान हुई 39 मेडिकल जांचों का उल्लेख होना इस मामले में महत्वपूर्ण है।

इससे यह पता चलता है कि इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर समय-समय पर मेडिकल परीक्षण किए गए हैं।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केवल जांचों की संख्या पर निर्भर रहने के बजाय विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट और विशेषज्ञ मूल्यांकन पर जोर दिया है।

अब मेडिकल बोर्ड पुरानी रिपोर्टों को वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के साथ जोड़कर देखेगा।

बहनों से मुलाकात को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त

इमरान खान की बहनों से मुलाकात का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान प्रमुखता से उठा।

जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि बहनों से मुलाकात कराना कोई एहसान नहीं है। अदालत ने इसे मौलिक अधिकार के संदर्भ में देखा।

इस टिप्पणी ने जेल में बंद राजनीतिक नेताओं और उनके परिवारों के बीच मुलाकात को लेकर पाकिस्तान में चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।

पिछले तीन साल की मुलाकातों का रिकॉर्ड मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने अडियाला जेल प्रशासन से पिछले तीन वर्षों में इमरान खान और उनकी बहनों के बीच हुई सभी मुलाकातों की जानकारी मांगी है।

अदालत अब यह देखना चाहती है कि परिवार को इमरान से कितनी बार मिलने की अनुमति दी गई और किन परिस्थितियों में मुलाकातें हुईं।

यह रिकॉर्ड अदालत को मामले के तथ्य समझने में मदद करेगा।

इमरान के बेटों से बातचीत की जानकारी भी मांगी

अदालत ने इमरान खान के बेटों के साथ उनकी बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी भी मांगी है।

इससे परिवार के साथ इमरान के संपर्क की स्थिति को समझने की कोशिश की जा रही है।

अदालत की ओर से मांगी गई जानकारी अब जेल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करानी होगी।

इमरान की बहन उजमा खानम की आखिरी मुलाकात

इमरान खान की बहन उजमा खानम ने आखिरी बार 2 दिसंबर 2025 को उनसे मुलाकात की थी।

उस मुलाकात के बाद उन्होंने इमरान की सेहत को लेकर चिंता व्यक्त की थी और कहा था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है।

अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिवार से मुलाकातों का पूरा रिकॉर्ड मांगने के बाद यह मामला एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

कोर्ट ने PTI को भी दी नसीहत

इमरान खान की सेहत को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में बयानबाजी लगातार होती रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI से कहा कि इमरान खान की मेडिकल स्थिति को राजनीतिक मुद्दा न बनाया जाए।

जस्टिस नईम अख्तर अफगान ने पार्टी को इस मामले में संयम बरतने की सलाह दी और कहा कि पार्टी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इमरान की सेहत को लेकर राजनीति न हो।

अदालत का यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इमरान खान की सेहत से जुड़ी हर खबर पाकिस्तान में तेजी से राजनीतिक बहस का विषय बन जाती है।

‘सेहत को राजनीति न बनाएं’—अदालत का संदेश

सुप्रीम कोर्ट की चिंता केवल इमरान के इलाज तक सीमित नहीं रही। अदालत ने स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाने से भी बचने की बात कही।

इसका अर्थ यह है कि इमरान खान की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति को डॉक्टरों की जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सामने लाया जाए, न कि राजनीतिक दावों और प्रतिदावों के आधार पर।

यही कारण है कि मेडिकल बोर्ड के गठन को इस सुनवाई का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है।

पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी जताई चिंता

इमरान खान की सेहत को लेकर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि आने वाले तीन महीने यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं कि इमरान की स्थिति में सुधार होता है या बीमारी स्थायी रूप लेती है।

हालांकि इमरान की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति का अंतिम आकलन विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच के बाद ही किया जा सकेगा।

इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में

73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं।

उनकी गिरफ्तारी सबसे पहले तोशाखाना मामले में हुई थी, जिसमें उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई थी।

इसके बाद उनके खिलाफ कई अन्य मामले सामने आए, जिनमें सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह से संबंधित मामले शामिल हैं।

इमरान खान की कानूनी स्थिति पिछले तीन वर्षों में लगातार बदलती रही है।

कई मामलों में मिली राहत, फिर भी जेल से बाहर नहीं आए

इमरान खान को सिफर और इद्दत निकाह मामलों में अदालत से राहत मिली।

तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा पर रोक लगाई गई।

इसके बावजूद अन्य मामलों के कारण उनकी जेल से रिहाई नहीं हो सकी।

इमरान और उनकी पार्टी PTI लगातार यह दावा करती रही है कि उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।

PTI का आरोप—राजनीतिक बदले की कार्रवाई

इमरान खान और उनकी पार्टी का आरोप है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ एक के बाद एक कानूनी मामले दर्ज किए गए।

PTI का कहना है कि इन मामलों का उद्देश्य इमरान खान को राजनीति और चुनावी प्रक्रिया से दूर रखना है।

पार्टी लंबे समय से इमरान की रिहाई और उनके साथ राजनीतिक स्तर पर निष्पक्ष व्यवहार की मांग करती रही है।

पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को खारिज करती है

दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां PTI के राजनीतिक प्रतिशोध वाले आरोपों को खारिज करती हैं।

सरकार का कहना है कि इमरान खान के खिलाफ चल रहे मामले कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अदालतें उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय ले रही हैं।

यही राजनीतिक और कानूनी टकराव इमरान खान के मामले को पाकिस्तान की राजनीति का सबसे संवेदनशील मुद्दा बनाए हुए है।

जेल से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा स्वास्थ्य का मामला

इमरान खान की सेहत को लेकर विवाद अब सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

अदालत ने अस्पताल में स्थानांतरण, मेडिकल बोर्ड, विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट और परिवार से मुलाकात जैसे मुद्दों पर स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

इससे संकेत मिलता है कि अदालत स्वास्थ्य संबंधी पहलू को केवल जेल प्रशासन की आंतरिक व्यवस्था के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसकी न्यायिक निगरानी भी कर रही है।

अस्पताल में इलाज से साफ हो सकती है तस्वीर

शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में विशेषज्ञों की देखरेख में जांच होने के बाद इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अधिक स्पष्ट मेडिकल तस्वीर सामने आ सकती है।

मेडिकल बोर्ड उनकी पुरानी रिपोर्टों और वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की तुलना करेगा।

इसके बाद यह भी तय हो सकता है कि उन्हें अस्पताल में लगातार निगरानी की आवश्यकता है या उनका इलाज किसी अन्य व्यवस्था के तहत किया जा सकता है।

मई 2024 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे

इमरान खान इससे पहले मई 2024 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हुए थे।

उस समय भी उनकी जेल से अदालत तक पहुंच और न्यायिक कार्यवाही में भागीदारी का मुद्दा महत्वपूर्ण था।

अब स्वास्थ्य और परिवार से संपर्क का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने एक अलग संदर्भ में आया है।

अडियाला जेल फिर बनी राजनीतिक केंद्र

इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से अडियाला जेल पाकिस्तान की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है।

इमरान से मुलाकात, उनकी सेहत, कानूनी मामलों और पार्टी नेताओं की गतिविधियों को लेकर जेल से जुड़ी खबरें लगातार राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनती रही हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट के अस्पताल भेजने के आदेश ने अडियाला जेल से जुड़ी चर्चा को फिर तेज कर दिया है।

इमरान की सेहत पर बढ़ी निगरानी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति पर निगरानी और बढ़ सकती है।

मेडिकल बोर्ड में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भागीदारी और अस्पताल में स्थानांतरण से उनकी स्वास्थ्य जांच अधिक व्यापक तरीके से होने की संभावना है।

साथ ही अदालत की निगरानी में मेडिकल रिपोर्ट पेश किए जाने से इस मामले में पारदर्शिता की मांग भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

क्या इमरान की राजनीतिक वापसी का रास्ता खुलेगा?

इमरान खान की सेहत से जुड़ा यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान में PTI का प्रभाव और इमरान खान की लोकप्रियता को देखते हुए उनकी लंबी जेल अवधि ने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया है।

हालांकि स्वास्थ्य संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सीधे राजनीतिक रिहाई के संकेत के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

अदालत का मौजूदा आदेश मुख्य रूप से स्वास्थ्य, इलाज और परिवार से संपर्क के अधिकार से संबंधित है।

इमरान की सेहत पर अफवाहों के बीच अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण

हाल के समय में इमरान खान की सेहत को लेकर कई तरह के दावे सामने आते रहे हैं।

ऐसी स्थिति में अदालत द्वारा मेडिकल बोर्ड से स्वतंत्र और विशेषज्ञ जांच कराने का आदेश महत्वपूर्ण हो जाता है।

इससे राजनीतिक दावों के बजाय चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने का रास्ता बन सकता है।

मौत की अफवाहों ने भी मचाई थी हलचल

इमरान खान की सेहत को लेकर हाल में ऐसी अफवाहें भी सामने आई थीं जिनमें उनकी मौत की आशंका तक जताई गई थी।

बाद में पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने अपने दावे को लेकर सफाई दी और मामला फिर चर्चा में आया। PTI की ओर से भी इमरान से मुलाकात कराने की मांग उठी थी।

ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मेडिकल बोर्ड के गठन का आदेश स्वास्थ्य संबंधी दावों की वास्तविकता स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

अदालत ने स्वास्थ्य और राजनीति के बीच सीमा स्पष्ट की

सुप्रीम कोर्ट ने एक ओर इमरान के स्वास्थ्य को लेकर गंभीरता दिखाई, वहीं दूसरी ओर PTI को इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की सलाह भी दी।

यह संतुलन महत्वपूर्ण है। किसी कैदी की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना न्यायिक जिम्मेदारी का हिस्सा हो सकता है, जबकि उसकी बीमारी को राजनीतिक बयानबाजी का विषय बनाना अलग मुद्दा है।

अदालत अब मेडिकल विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति देख सकती है।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर टिकी अगली तस्वीर

अब सबकी नजर उस मेडिकल बोर्ड पर रहेगी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गठित करने का आदेश दिया है।

बोर्ड इमरान की पुरानी मेडिकल रिपोर्टों, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और आंख से जुड़ी बीमारी सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं की समीक्षा करेगा।

इसके बाद बोर्ड की रिपोर्ट यह स्पष्ट करने में मदद कर सकती है कि इमरान को किस स्तर के इलाज की आवश्यकता है।

अस्पताल में भर्ती कराने के आदेश से बढ़ी जिम्मेदारी

48 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाने के आदेश के बाद जेल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

इमरान को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाना, विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच कराना और मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया पूरी करना अब प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण होगा।

अदालत के निर्देशों के अनुपालन की जानकारी भी आगे न्यायालय के सामने रखी जा सकती है।

परिवार से मुलाकात का रिकॉर्ड भी बनेगा अहम

पिछले तीन वर्षों की मुलाकातों का रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि इमरान खान को अपनी बहनों से कितनी बार मिलने की अनुमति मिली।

इमरान के बेटों के साथ फोन पर बातचीत और कॉल डिटेल से संबंधित जानकारी भी अदालत ने मांगी है।

इन रिकॉर्डों के आधार पर अदालत परिवार से संपर्क के अधिकार से जुड़े पहलुओं को देख सकती है।

इमरान खान के मामले में अब अगला बड़ा कदम मेडिकल बोर्ड

फिलहाल पाकिस्तान की राजनीति में इमरान खान को लेकर सबसे बड़ा सवाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति और अस्पताल में इलाज का है।

सुप्रीम कोर्ट ने 48 घंटे में शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने का निर्देश देकर इस दिशा में स्पष्ट कदम उठाया है।

इसके साथ ही मेडिकल बोर्ड को व्यापक जांच की जिम्मेदारी दी गई है। अब बोर्ड की रिपोर्ट और अदालत के अगले आदेश इस मामले की दिशा तय करेंगे।

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को 48 घंटे के भीतर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने का निर्देश दिया है, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ उनकी बहन डॉ. उजमा खान और निजी डॉक्टर को शामिल करने की बात कही गई है। कोर्ट ने अडियाला जेल प्रशासन से पिछले तीन वर्षों की मेडिकल रिपोर्ट और परिवार से मुलाकातों का रिकॉर्ड भी मांगा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बहनों से मुलाकात कोई एहसान नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार है। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनके खिलाफ कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी है। PTI राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाती रही है, जबकि पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए मामलों को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताती है। अब मेडिकल बोर्ड की जांच से इमरान की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

 

News-Desk

News Desk एक समर्पित टीम है, जिसका उद्देश्य उन खबरों को सामने लाना है जो मुख्यधारा के मीडिया में अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं। हम निष्पक्षता, सटीकता, और पारदर्शिता के साथ समाचारों को प्रस्तुत करते हैं, ताकि पाठकों को हर महत्वपूर्ण विषय पर सटीक जानकारी मिल सके। आपके विश्वास के साथ, हम खबरों को बिना किसी पूर्वाग्रह के आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी भी सवाल या जानकारी के लिए, हमें संपर्क करें: info@poojanews.com

News-Desk has 22597 posts and counting. See all posts by News-Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

eighteen + eight =