Gaza में युद्ध के बीच बेटियों की शादी का खौफनाक संकट, 14 साल की बच्ची के बदले 2 बोरी आटा; UNFPA की रिपोर्ट ने खोली दर्दनाक तस्वीर
News-Desk
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UNFPA ने 23 सितंबर 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट और विश्लेषण में बताया कि जनवरी से जून 2026 के बीच गाजा में दर्ज जबरन और बाल विवाह के मामलों में 123 प्रतिशत की वृद्धि हुई। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने यह भी कहा कि इसी अवधि में रिपोर्ट किए गए लैंगिक हिंसा यानी Gender-Based Violence (GBV) के मामलों में कुल मिलाकर 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, UNFPA ने साफ किया है कि दर्ज मामलों के आंकड़े पूरी वास्तविक स्थिति नहीं दिखाते, क्योंकि सामाजिक दबाव, बदनामी का डर और शिकायत दर्ज कराने में आने वाली बाधाओं के कारण कई घटनाएं सामने ही नहीं आ पातीं।
रिपोर्ट के पीछे सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। UNFPA ने गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रहने वाली 230 महिलाओं की आवाज को भी दर्ज किया है। यह अध्ययन दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 16 फोकस ग्रुप चर्चाओं के माध्यम से किया गया था। महिलाओं की बातचीत से सामने आया कि युद्ध और विस्थापन ने पहले से मौजूद लैंगिक असमानताओं और सुरक्षा जोखिमों को और गहरा कर दिया है।
14 साल की बेटी की शादी के बदले 2 बोरी आटे का दावा
रिपोर्ट से जुड़ी जानकारी में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने युद्ध और भूख के बीच परिवारों की भयावह स्थिति को उजागर किया है। बताया गया कि एक पिता ने अपनी 14 साल की बेटी की शादी दो बोरी आटे के बदले कर दी।
यह घटना केवल बाल विवाह की समस्या नहीं दिखाती, बल्कि यह भी बताती है कि जब किसी समाज में भोजन, आय, सुरक्षा और रहने की जगह जैसी बुनियादी जरूरतें गंभीर संकट में पहुंच जाएं तो बच्चों, विशेषकर लड़कियों की स्थिति कितनी कमजोर हो सकती है।
UNFPA ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि गाजा में कुछ परिवार शादी को आर्थिक संकट से निपटने के एक तरीके के रूप में देखने लगे हैं। विस्थापन और असुरक्षा के बीच कुछ परिवारों को यह भी लगता है कि शादी के बाद बेटी को किसी तरह सुरक्षा मिल जाएगी।
लेकिन UNFPA के अनुसार यह सोच कई मामलों में लड़कियों को एक खतरे से निकालकर दूसरे खतरे में धकेल रही है। एजेंसी ने बाल विवाह को लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य पर गंभीर असर डालने वाला लैंगिक हिंसा का रूप बताया है।
सबसे दर्दनाक स्थिति—कथित यौन हिंसा के आरोपी से ही शादी
UNFPA के विश्लेषण में एक और बेहद गंभीर पहलू सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में यौन हिंसा की पीड़िताओं की शादी उस व्यक्ति से कराने की कोशिश की जा रही है जिस पर अपराध करने का आरोप है।
परिवार और समाज में बदनामी तथा ‘इज्जत’ बचाने की सोच इस तरह के फैसलों के पीछे एक कारण बताई गई है। यानी जिस लड़की को हिंसा के बाद सुरक्षा, चिकित्सा और न्याय की जरूरत होती है, उसे ही कथित तौर पर उसी व्यक्ति के साथ वैवाहिक संबंध में धकेले जाने का खतरा पैदा हो रहा है।
UNFPA के पहले के 2026 के GBV विश्लेषण में भी कहा गया था कि गाजा में जबरन और बाल विवाह के कुछ मामलों में विवाह को यौन हिंसा से बचे लोगों और कथित अपराधियों के बीच संबंध को औपचारिक रूप देने के तरीके के रूप में इस्तेमाल किए जाने की चिंताएं सामने आई हैं।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ऐसी रिपोर्ट में दर्ज घटनाएं सभी मामलों की प्रतिनिधि तस्वीर नहीं मानी जा सकतीं। स्वयं UNFPA कहता है कि यौन हिंसा के वास्तविक मामलों की संख्या दर्ज आंकड़ों से अधिक हो सकती है।
एक ही स्कूल में पहले अपराध, अगले दिन शादी का दावा
UNFPA से बातचीत में एक विस्थापित महिला ने ऐसी स्थिति का वर्णन किया जिसमें एक स्कूल को शरणस्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। महिला के मुताबिक, किसी लड़की के साथ कथित यौन हिंसा की घटना सामने आने के बाद अगले दिन उसी स्थान पर शादी और जश्न जैसा माहौल दिखाई देता था।
महिला ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में यौन हिंसा की पीड़िता की शादी उसी व्यक्ति से करा दी जाती है जिस पर अपराध का आरोप होता है।
यदि ऐसे मामले सही हैं, तो यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि उस सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था के टूटने का संकेत है जो संकट के समय कमजोर लोगों को संरक्षण देती है।
महिलाओं ने UNFPA से बातचीत में यह भी कहा कि युद्ध से पहले गाजा में इस तरह की परिस्थितियों की कल्पना करना मुश्किल था। युद्ध के दौरान बार-बार विस्थापन, भीड़भाड़ वाले शिविर और सुरक्षा व्यवस्था के कमजोर होने से महिलाओं और बच्चियों की रोजमर्रा की सुरक्षा प्रभावित हुई है।
माता-पिता की मौत के बाद बच्चियों पर शादी का दबाव
युद्ध में अपने माता-पिता को खो चुकी बच्चियां भी इस संकट की एक गंभीर तस्वीर सामने लाती हैं। UNFPA की रिपोर्ट में ऐसी महिलाओं की बातें दर्ज की गई हैं जिन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान माता-पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी दूसरे रिश्तेदारों पर आ गई।
गाजा सिटी की एक महिला ने बताया कि उसके परिवार की 14 और 15 वर्ष की दो लड़कियों के माता-पिता युद्ध में मारे गए थे। इसके बाद उनके चाचाओं ने दोनों की शादी कर दी।
महिला के अनुसार, चाचा उन बच्चियों की जिम्मेदारी और खर्च उठाना नहीं चाहते थे। नतीजा यह हुआ कि दोनों की शादी उस उम्र में कर दी गई जब वे स्वयं शादी और आगे की जिंदगी के अर्थ को पूरी तरह समझने की स्थिति में नहीं थीं।
यह मामला बताता है कि युद्ध में केवल मकान और बुनियादी ढांचा ही नष्ट नहीं होता। परिवार का सामाजिक ढांचा भी टूट सकता है और उसका सीधा असर बच्चों पर पड़ सकता है।
UNFPA ने 12 से 17 साल की लड़कियों को बाल विवाह के संदर्भ में शामिल किया
UNFPA की रिपोर्ट में 12 से 17 वर्ष की लड़कियों की शादी को बाल विवाह के संदर्भ में दर्ज किया गया है। एजेंसी ने गाजा में बाल विवाह के बढ़ते मामलों को युद्ध और मानवीय संकट के साथ जोड़ा है।
युद्ध से पहले भी फिलिस्तीनी समाज में बाल विवाह की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी। लेकिन UNFPA के अनुसार युद्ध से पहले लंबे समय में इसमें कमी देखी गई थी। 2022 तक फिलिस्तीन में बाल विवाह की दर 11 प्रतिशत तक गिर चुकी थी, जबकि 2009 में यह 26 प्रतिशत थी।
लेकिन युद्ध के बाद विस्थापन और आर्थिक संकट ने इस सकारात्मक रुझान को पलटने का दबाव पैदा किया।
UNFPA के अनुसार 2025 में केवल चार महीनों में 14 से 16 वर्ष की कम से कम 400 लड़कियों को विवाह की अनुमति दिए जाने के रिकॉर्ड साझेदार संस्थाओं ने देखे थे। एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी कि ये आंकड़े वास्तविक संख्या का केवल एक हिस्सा हो सकते हैं, क्योंकि प्रशासनिक और पंजीकरण प्रणालियों के कमजोर होने से कई विवाह औपचारिक रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं होते।
भूख, विस्थापन और गरीबी से बढ़ रहा बाल विवाह का खतरा
UNFPA के मुताबिक गाजा में Gaza Child Marriage Crisis के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें भोजन की कमी, गरीबी, आय के साधनों का खत्म होना, विस्थापन, स्कूलों का बंद होना और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों का कमजोर होना प्रमुख हैं।
जब परिवारों के पास नियमित आय नहीं रहती, घर नष्ट हो जाते हैं और रहने की जगह असुरक्षित हो जाती है, तब बच्चों की सुरक्षा और भविष्य से जुड़े फैसले भी संकट के दबाव में लिए जाने लगते हैं।
कुछ परिवारों के लिए बेटी की शादी आर्थिक बोझ कम करने का माध्यम दिखाई दे सकती है। कुछ परिवार इसे सुरक्षा देने का उपाय मान सकते हैं। लेकिन UNFPA का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में शादी स्वयं लड़कियों के लिए हिंसा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकती है।
युद्ध ने सुरक्षा का पूरा ढांचा कमजोर किया
UNFPA के अनुसार गाजा में बाल विवाह और जबरन शादी की बढ़ती घटनाओं को वहां की व्यापक मानवीय स्थिति से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। अस्पतालों, स्कूलों और अन्य जरूरी सुविधाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। परिवारों की आय और आजीविका के साधन कमजोर हुए हैं। शिविरों और अस्थायी आश्रयों में भीड़ बढ़ी है।
ऐसे हालात में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा करने वाली संस्थागत व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता है।
UNFPA के फिलिस्तीन प्रतिनिधि नेस्टर ओवोमुहांगी ने कहा कि लंबे समय तक चल रहे युद्ध और लोगों के बार-बार विस्थापन से सामाजिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। एजेंसी के मुताबिक गाजा में करीब 500 विस्थापन स्थलों पर रहने वाली महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंच भी आसान नहीं है।
यौन हिंसा के मामले भी बढ़ने की रिपोर्ट
बाल विवाह के साथ-साथ UNFPA ने गाजा में यौन हिंसा के मामलों में भी वृद्धि की जानकारी दी है। इनमें बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा शामिल हैं।
UNFPA के सितंबर 2026 के विश्लेषण के मुताबिक जनवरी से जून 2026 के बीच रिपोर्ट किए गए GBV मामलों में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, इसमें एक महत्वपूर्ण सावधानी भी है—रिपोर्ट किए गए मामलों में बढ़ोतरी का एक हिस्सा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि सेवाओं और सुरक्षित स्थानों की उपलब्धता बढ़ने से अधिक महिलाएं सामने आ पा रही हैं।
इसलिए 60 प्रतिशत वृद्धि को सीधे तौर पर वास्तविक घटनाओं में उतनी ही वृद्धि मानना सही नहीं होगा। UNFPA स्वयं बताता है कि बेहतर रिपोर्टिंग और सेवा तक पहुंच भी दर्ज मामलों की संख्या को प्रभावित करती है।
फिर भी एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध आंकड़े महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षा वातावरण के गंभीर रूप से बिगड़ने का संकेत देते हैं।
कई पीड़िताएं शिकायत तक नहीं पहुंच पातीं
यौन हिंसा से जुड़े आंकड़ों की सबसे बड़ी समस्या रिपोर्टिंग की कमी है। UNFPA ने कहा है कि बदनामी का डर, सामाजिक दबाव, संभावित बदले की चिंता और शिकायत दर्ज कराने में आने वाली बाधाओं के कारण कई घटनाएं रिपोर्ट ही नहीं हो पातीं।
युद्ध के दौरान यह समस्या और गंभीर हो सकती है। जब लोग बार-बार विस्थापित हो रहे हों, पुलिस और न्यायिक व्यवस्था पर दबाव हो, स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हों और सुरक्षित आवागमन मुश्किल हो, तब किसी पीड़िता के लिए सहायता मांगना बेहद कठिन हो सकता है।
इसी कारण दर्ज मामलों को गाजा में लैंगिक हिंसा की पूरी तस्वीर नहीं माना जा सकता।
18 से 59 साल की महिलाएं सबसे अधिक रिपोर्टेड पीड़िताओं में
UNFPA के आंकड़ों के मुताबिक सामने आए GBV मामलों में सबसे बड़ा समूह 18 से 59 वर्ष की महिलाएं थीं। इसके बाद किशोर लड़कियां और वयस्क पुरुष शामिल रहे।
यह आंकड़ा भी केवल रिपोर्ट किए गए मामलों को दर्शाता है। इसका मतलब यह नहीं कि अन्य आयु वर्गों में हिंसा नहीं हो रही है।
विशेषकर किशोर लड़कियों के मामले में परिवार और समाज का दबाव, शिक्षा का टूटना और आर्थिक निर्भरता उन्हें अतिरिक्त जोखिम में डाल सकते हैं।
रिपोर्ट किए गए GBV मामलों में शारीरिक हिंसा भी बड़ी समस्या
UNFPA के अप्रैल-जून 2026 के विश्लेषण के अनुसार रिपोर्ट किए गए GBV मामलों में शारीरिक हमले 31 प्रतिशत थे। इनमें बड़ी संख्या भीड़भाड़ वाले टेंटों, विस्थापन मार्गों और सार्वजनिक जल वितरण केंद्रों के आसपास दर्ज की गई। संसाधनों, भोजन, नकद सहायता और आश्रय से वंचित किया जाना भी रिपोर्ट किए गए मामलों का लगभग एक-तिहाई था। मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक हिंसा भी लगभग 31 प्रतिशत मामलों में दर्ज हुई।
ये आंकड़े बताते हैं कि गाजा में महिलाओं के खिलाफ हिंसा केवल एक प्रकार की हिंसा तक सीमित नहीं है। शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और यौन हिंसा कई बार एक ही परिवार या व्यक्ति के जीवन में एक-दूसरे से जुड़ सकती हैं।
शिविरों में महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल
विस्थापन शिविरों में रहने की परिस्थितियां महिलाओं और लड़कियों के लिए कई अतिरिक्त जोखिम पैदा करती हैं। भीड़भाड़, पर्याप्त निजी स्थान की कमी, शौचालय और पानी तक सीमित पहुंच तथा रात के समय सुरक्षा की चिंता जैसी समस्याएं रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करती हैं।
UNFPA ने बताया है कि Women and Girls Safe Spaces यानी महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थान कई पीड़िताओं के लिए ऐसी जगह बन गए हैं जहां वे बिना डर अपनी बात कह सकती हैं और जरूरी सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
लेकिन जरूरत के मुकाबले ऐसे सुरक्षित स्थानों और सेवाओं की संख्या सीमित है।
शिक्षा का टूटना भी बढ़ा रहा है खतरा
बाल विवाह का शिक्षा से सीधा संबंध है। जब स्कूल बंद होते हैं या बच्चे लगातार विस्थापन के कारण पढ़ाई से बाहर हो जाते हैं तो लड़कियों के पास भविष्य के लिए वैकल्पिक अवसर कम होते जाते हैं।
UNFPA ने गाजा में शिक्षा व्यवस्था के टूटने को बाल विवाह बढ़ने के कारकों में शामिल किया है। स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं होते। वे बच्चों के लिए सामाजिक संपर्क, सुरक्षा, मानसिक सहारा और भविष्य की योजना का माध्यम भी होते हैं।
जब यह व्यवस्था टूट जाती है तो किशोर लड़कियां परिवार और सामाजिक दबाव के प्रति और अधिक असुरक्षित हो सकती हैं।
बाल विवाह के साथ किशोर गर्भावस्था का जोखिम भी बढ़ा
UNFPA ने बाल विवाह के बढ़ने के साथ किशोर गर्भावस्था के जोखिम पर भी चिंता जताई है। एजेंसी के अनुसार किशोरावस्था में गर्भावस्था और प्रसव से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का जोखिम अधिक होता है, और गाजा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर पहले से भारी दबाव है।
युद्ध के दौरान अस्पतालों और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित होने से यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
UNFPA ने अप्रैल 2026 में कहा था कि गाजा में किशोर जन्म दर युद्ध से पहले की तुलना में दोगुने से अधिक हो चुकी थी। एजेंसी ने किशोर लड़कियों के लिए गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।
महिलाओं की आवाज से सामने आई युद्ध की दूसरी तस्वीर
UNFPA की 17 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रहने वाली 230 महिलाओं की बातचीत दर्ज की गई। इन महिलाओं ने युद्ध को केवल बमबारी और विस्थापन के रूप में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सुरक्षा, सम्मान, निजी स्थान और भविष्य के टूटने के रूप में भी बताया।
इन बातचीत से यह सामने आया कि युद्ध की कीमत हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होती। महिलाओं और लड़कियों को कई बार ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जो सीधे सैन्य कार्रवाई से दिखाई नहीं देतीं, लेकिन उनके जीवन पर लंबे समय तक असर डालती हैं।
बाल विवाह, जबरन विवाह, यौन हिंसा, आर्थिक निर्भरता और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच इसी व्यापक संकट का हिस्सा हैं।
गाजा में युद्ध से पहले भी बाल विवाह की चुनौती थी
यह भी महत्वपूर्ण है कि गाजा में बाल विवाह की समस्या पूरी तरह युद्ध के बाद पैदा नहीं हुई। UNFPA के अनुसार फिलिस्तीन में युद्ध से पहले बाल विवाह की दर लंबे समय में कम हुई थी। 2009 में 26 प्रतिशत से घटकर 2022 में यह 11 प्रतिशत रह गई थी।
यानी पिछले वर्षों में इस दिशा में सुधार देखा गया था। लेकिन युद्ध ने आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को तेजी से बदल दिया।
घर, स्कूल, रोजगार और परिवार के सहारे खोने से वे परिस्थितियां फिर पैदा हुईं जिनमें कम उम्र में शादी को परिवारों द्वारा समाधान के तौर पर देखा जाने लगा।
‘सुरक्षा’ के नाम पर शादी भी बन सकती है खतरा
कुछ परिवारों को लगता है कि अगर लड़की की शादी कर दी जाए तो उसे युद्ध और यौन हिंसा से सुरक्षा मिल जाएगी। लेकिन UNFPA के अनुसार बाल विवाह स्वयं हिंसा और शोषण के जोखिम को बढ़ा सकता है।
इसमें शारीरिक स्वास्थ्य, किशोर गर्भावस्था, शिक्षा का छूटना, आर्थिक निर्भरता और घरेलू हिंसा जैसे खतरे शामिल हैं।
इसलिए केवल शादी को सुरक्षा का साधन मानना पर्याप्त नहीं है। संकट की स्थिति में वास्तविक सुरक्षा के लिए सुरक्षित आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कानूनी सहायता जरूरी होती है।
इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष की जड़ें इतनी जटिल क्यों हैं
गाजा में महिलाओं और बच्चियों की स्थिति को समझने के लिए व्यापक इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष की पृष्ठभूमि को भी समझना जरूरी है। यह संघर्ष केवल हालिया युद्ध तक सीमित नहीं है। इसके पीछे क्षेत्र, सुरक्षा, राज्य की स्थापना, विस्थापन, यरुशलम और बस्तियों जैसे कई दशकों पुराने विवाद हैं।
इसी कारण गाजा में मौजूदा मानवीय संकट का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं हो सकता। नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता, राजनीतिक समाधान और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई मुद्दे एक साथ जुड़े हुए हैं।
वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियां भी बड़ा विवाद
इजराइल-फिलिस्तीन विवाद में वेस्ट बैंक में मौजूद इजराइली बस्तियां लंबे समय से प्रमुख विवाद का विषय हैं। फिलिस्तीनी पक्ष इन बस्तियों को भविष्य के स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की क्षेत्रीय निरंतरता के लिए बड़ी बाधा मानता है।
इजराइल दूसरी ओर सुरक्षा और ऐतिहासिक दावों समेत विभिन्न आधारों पर अपनी नीतियों का बचाव करता रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी इन बस्तियों की कानूनी स्थिति को लेकर व्यापक विवाद है।
यह मुद्दा शांति वार्ताओं में बार-बार सामने आता रहा है।
यरुशलम को लेकर दोनों पक्षों के अलग दावे
यरुशलम भी इजराइल-फिलिस्तीन विवाद का सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। इजराइल पूरे यरुशलम को अपनी राजधानी मानता है, जबकि फिलिस्तीनी नेतृत्व पूर्वी यरुशलम को भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य की राजधानी के रूप में देखता है।
धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व के कारण यरुशलम पर किसी भी समझौते की प्रक्रिया बेहद जटिल रही है।
इसी वजह से अंतिम राजनीतिक समाधान की चर्चा में यरुशलम का प्रश्न लगातार महत्वपूर्ण बना रहता है।
इजराइल की सुरक्षा चिंता और फिलिस्तीनी राज्य की मांग
इजराइल का प्रमुख तर्क है कि किसी भी भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था में उसके नागरिकों की सुरक्षा की ठोस गारंटी होनी चाहिए। हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के हमलों के बाद इजराइल ने सुरक्षा को अपनी नीति का प्रमुख आधार बनाया है।
दूसरी ओर, फिलिस्तीनी पक्ष स्वतंत्र और संप्रभु राज्य की मांग करता है। व्यापक रूप से प्रस्तावित दो-राज्य समाधान में वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी यरुशलम को फिलिस्तीनी राज्य से जोड़ने की मांग शामिल रही है।
इन दोनों आवश्यकताओं—इजराइल की सुरक्षा और फिलिस्तीनी स्वतंत्र राज्य—के बीच स्वीकार्य राजनीतिक समझौता अब तक नहीं बन पाया है।
युद्ध का सबसे भारी बोझ महिलाओं और बच्चों पर
गाजा की वर्तमान स्थिति यह दिखाती है कि युद्ध का प्रभाव केवल मोर्चे पर मौजूद लड़ाकों तक सीमित नहीं रहता। जब स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा, भोजन, रोजगार और आश्रय की व्यवस्था टूटती है तो उसका असर परिवारों के सबसे कमजोर सदस्यों पर पड़ता है।
महिलाएं और बच्चे इस संकट में विशेष रूप से प्रभावित होते हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, किशोरियों के लिए शिक्षा का टूटना और विस्थापित परिवारों में सुरक्षा की कमी कई समस्याओं को एक साथ जन्म देती है।
UNFPA ने पहले भी गाजा में गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
UNFPA ने सुरक्षित स्थान और सहायता बढ़ाने पर दिया जोर
UNFPA के मुताबिक गाजा में महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थानों का विस्तार बेहद जरूरी है। ऐसे स्थानों पर पीड़िताओं को मनो-सामाजिक सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं, कानूनी सहायता और अन्य जरूरी सेवाओं से जोड़ा जा सकता है।
एजेंसी ने यह भी कहा है कि केवल महिलाओं के लिए अलग सेवाएं पर्याप्त नहीं होंगी। भोजन, पानी, आश्रय और स्वच्छता जैसी मानवीय सहायता की पूरी व्यवस्था में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को शामिल करना जरूरी है।
आंकड़ों से बड़ी है उन घटनाओं की वास्तविक संख्या
UNFPA की रिपोर्ट के सबसे महत्वपूर्ण संदेशों में से एक यह है कि सामने आए आंकड़े पूरी तस्वीर नहीं दिखाते।
किसी भी युद्धग्रस्त क्षेत्र में रिपोर्टिंग प्रणाली कमजोर हो सकती है। पीड़िताओं को यह डर हो सकता है कि शिकायत करने के बाद परिवार या समाज उन्हें दोष देगा। कुछ मामलों में आरोपी प्रभावशाली हो सकता है। कहीं सुरक्षित स्थान तक पहुंच नहीं होती और कहीं परिवार ही घटना को छिपाने का प्रयास कर सकता है।
इसलिए दर्ज मामलों की संख्या को वास्तविक घटनाओं की कुल संख्या नहीं माना जा सकता।
गाजा की बच्चियों के भविष्य पर सबसे बड़ा सवाल
बाल विवाह की समस्या का असर केवल शादी के दिन तक सीमित नहीं रहता। कम उम्र में विवाह होने से शिक्षा रुक सकती है, आर्थिक स्वतंत्रता के अवसर कम हो सकते हैं और किशोर गर्भावस्था से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
युद्ध में पहले ही अपना घर, स्कूल और परिवार खो चुकी बच्चियों के लिए यह असर और गंभीर हो सकता है।
UNFPA ने चेतावनी दी है कि बाल विवाह और किशोर गर्भावस्था गाजा की एक पूरी पीढ़ी के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।
यही वजह है कि एजेंसी केवल विवाह रोकने की बात नहीं कर रही, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक सहायता और महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थानों को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दे रही है।
अब चुनौती सिर्फ युद्ध रोकने की नहीं, सुरक्षा व्यवस्था खड़ी करने की भी
गाजा में हिंसा और विस्थापन का असर कम होने के बाद भी महिलाओं और बच्चियों की समस्याएं तुरंत खत्म नहीं होंगी। जिन परिवारों ने अपने घर और कमाई खो दी है, उन्हें दोबारा स्थिर होने में समय लगेगा।
जिन लड़कियों की पढ़ाई छूट गई है, उनके लिए शिक्षा में वापसी जरूरी होगी। जिन महिलाओं ने हिंसा झेली है, उनके लिए मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सहायता की जरूरत होगी। जिन बच्चियों की जबरन शादी हो चुकी है, उनके लिए कानूनी और सामाजिक सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
यानी मानवीय सहायता के साथ-साथ लंबे समय के पुनर्निर्माण और सामाजिक सुरक्षा की जरूरत भी होगी।
गाजा की महिलाओं की आवाज अब दुनिया के सामने
UNFPA द्वारा दर्ज 230 महिलाओं की बातचीत ने गाजा संकट के उस पहलू को सामने रखा है जो युद्ध की तस्वीरों में अक्सर दिखाई नहीं देता। मलबे, विस्थापन और भूख के बीच महिलाओं और लड़कियों की निजी सुरक्षा भी लगातार खतरे में है।
14 साल की बच्ची की कथित तौर पर दो बोरी आटे के बदले शादी, माता-पिता खो चुकी किशोरियों की कम उम्र में शादी और यौन हिंसा की पीड़िताओं को कथित आरोपी से शादी के लिए मजबूर किए जाने जैसी घटनाएं इस संकट की भयावहता को दिखाती हैं।
हालांकि प्रत्येक घटना की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर आवश्यक है, UNFPA का व्यापक डेटा यह जरूर दिखाता है कि गाजा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ लैंगिक हिंसा तथा बाल और जबरन विवाह की रिपोर्टिंग बढ़ी है।

