Muzaffarnagar में गूंजेगा सामाजिक समरसता का संदेश, ‘सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी कल; साध्वी प्रज्ञा भारती समेत कई प्रमुख वक्ता होंगे शामिल
Muzaffarnagar । सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को शहर में सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा। ब्रह्मलीन संत महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति में ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी का विषय ‘सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका’ रखा गया है।
कार्यक्रम को लेकर रविवार को उद्योगपति कुंवर आलोक स्वरूप के आवास राजभवन पर प्रेसवार्ता आयोजित की गई। प्रेसवार्ता में ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह तथा कुंवर आलोक स्वरूप ने कार्यक्रम के उद्देश्य और इसकी व्यापक पृष्ठभूमि की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज के भीतर आपसी भाईचारा, समानता और सद्भाव को मजबूत करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
उनके अनुसार, इसी विचार को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने और भारतीय चिंतन में निहित सामाजिक समरसता के विचार पर सार्थक संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से मुजफ्फरनगर में यह राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है।
समाज में भाईचारा और समानता को मजबूत करने पर होगा मंथन
शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि किसी भी मजबूत समाज की नींव केवल आर्थिक विकास या भौतिक प्रगति से नहीं बनती, बल्कि उसके लिए समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच विश्वास, सम्मान और सहयोग की भावना भी आवश्यक होती है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक जीवन में जब आपसी दूरी कम होती है और विभिन्न समुदाय एवं वर्ग एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं, तब सामाजिक एकता मजबूत होती है। इसी व्यापक विचार को लेकर संगोष्ठी में सामाजिक समरसता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष रूप से विचार किया जाएगा कि भारतीय परंपरा और चिंतन में समानता, सहयोग और सामाजिक एकता की अवधारणा किस प्रकार मौजूद रही है तथा वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में इन मूल्यों को किस तरह प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है।
‘सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका’ रहेगा मुख्य विषय
मुजफ्फरनगर में होने वाली राष्ट्रीय संगोष्ठी का केंद्रीय विषय ‘सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका’ है। कार्यक्रम में गोरक्षपीठ के इतिहास, उसकी सामाजिक गतिविधियों और विभिन्न वर्गों को जोड़ने के प्रयासों पर वक्ताओं द्वारा विचार रखे जाएंगे।
आयोजकों के अनुसार, गोरक्षपीठ की परंपरा और सामाजिक गतिविधियों को केवल धार्मिक संदर्भ में देखने के बजाय उसके सामाजिक सरोकारों पर भी चर्चा की जाएगी। विशेष रूप से समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच संवाद और संपर्क स्थापित करने के प्रयासों को संगोष्ठी में चर्चा का हिस्सा बनाया जाएगा।
इसी के साथ सनातन परंपरा में निहित सामाजिक समरसता के मूल विचार पर भी विचार-विमर्श होगा।
महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में आयोजित हो रही संगोष्ठी
यह कार्यक्रम ब्रह्मलीन संत महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति को समर्पित है। आयोजकों का कहना है कि उनके सामाजिक चिंतन और विभिन्न वर्गों को जोड़ने से जुड़े विचारों को वर्तमान समय के संदर्भ में समझने और समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
इसी उद्देश्य से ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन द्वारा संगोष्ठी श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इस श्रृंखला के माध्यम से सामाजिक समानता, सद्भाव और एकता जैसे विषयों पर अलग-अलग स्थानों पर संवाद आयोजित किए जा रहे हैं।
मुजफ्फरनगर का कार्यक्रम इसी श्रृंखला की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आयोजित किया जा रहा है।
प्रयागराज से बागपत तक हो चुके हैं कई कार्यक्रम
ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह ने बताया कि इस संगोष्ठी श्रृंखला के अंतर्गत अब तक उत्तर प्रदेश के कई शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
इनमें प्रयागराज, लखनऊ, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अम्बेडकर नगर, गाजियाबाद, जौनपुर, मेरठ और बागपत शामिल हैं।
आयोजकों के अनुसार, इन कार्यक्रमों में सामाजिक समानता, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता के विषयों पर चर्चा की गई तथा इन संदेशों को व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
मुजफ्फरनगर में होने वाला कार्यक्रम इसी क्रम को आगे बढ़ाएगा।
साध्वी प्रज्ञा भारती और महामंडलेश्वर संदीप खत्री रखेंगे विचार
राष्ट्रीय संगोष्ठी में कई प्रमुख वक्ताओं की भागीदारी रहेगी। कार्यक्रम में साध्वी प्रज्ञा भारती जी तथा महामंडलेश्वर श्री संदीप खत्री जी महाराज प्रमुख वक्ताओं के रूप में अपने विचार रखेंगे।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल भी कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
तीनों वक्ताओं द्वारा सामाजिक समरसता, भारतीय सामाजिक चिंतन, गोरक्षपीठ की भूमिका तथा वर्तमान समय में समाज के भीतर भाईचारे और सहयोग की आवश्यकता जैसे विषयों पर अपने विचार रखे जाने की जानकारी दी गई है।
जाति और वर्ग से ऊपर उठकर सम्मान की भावना पर जोर
संगोष्ठी में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी रहेगा कि आज के समय में सामाजिक विभाजन को कम करने के लिए किस तरह के प्रयास किए जाने चाहिए।
आयोजकों के अनुसार, जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना को मजबूत करना वर्तमान समय की आवश्यकता है।
समाज में अलग-अलग पहचान और विविधताओं का होना स्वाभाविक है, लेकिन इन विविधताओं के बीच संवाद और आपसी सम्मान कायम रहना सामाजिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी संदर्भ में संगोष्ठी में सामाजिक समरसता को केवल एक विचार के रूप में नहीं, बल्कि व्यवहारिक सामाजिक आवश्यकता के रूप में देखने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
सनातन परंपरा में समरसता के विचार पर भी होगी चर्चा
कार्यक्रम में सनातन परंपरा में मौजूद सामाजिक समरसता के विचार पर भी विशेष चर्चा प्रस्तावित है। आयोजकों के अनुसार, अनेक पौराणिक और धार्मिक ग्रंथों में समाज में सहयोग, कर्तव्य, सेवा और सामूहिक कल्याण से जुड़े विचारों का उल्लेख मिलता है।
संगोष्ठी में इन विचारों को वर्तमान सामाजिक संदर्भ के साथ जोड़कर समझने का प्रयास किया जाएगा।
वक्ताओं के सामने यह भी महत्वपूर्ण विषय रहेगा कि प्राचीन भारतीय चिंतन में मौजूद सामाजिक मूल्यों को आधुनिक समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप किस प्रकार संवाद और सामाजिक जागरूकता का आधार बनाया जा सकता है।
समरस समाज को बताया गया मजबूत राष्ट्र की आधारशिला
प्रेसवार्ता में शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि सामाजिक समरसता केवल सामाजिक शांति का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की मजबूती से भी जुड़ा हुआ है।
उनका कहना है कि जब समाज में विभिन्न वर्गों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग मजबूत होता है, तब सामाजिक संस्थाएं भी अधिक प्रभावी ढंग से काम करती हैं। इसी कारण सामाजिक एकता को मजबूत करना राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आयोजकों की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि समरस समाज ही सशक्त समाज और मजबूत राष्ट्र की आधारशिला बन सकता है।
मुजफ्फरनगर में कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूरी
राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे किया जाएगा। कार्यक्रम का स्थान लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर, जानसठ रोड, मुजफ्फरनगर निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रम को लेकर आयोजकों की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी भी कार्यक्रम में रहने की उम्मीद है।
मुजफ्फरनगर में होने वाली यह संगोष्ठी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यहां सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक लोग अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं। ऐसे में सामाजिक समरसता जैसे व्यापक विषय पर होने वाली चर्चा को स्थानीय स्तर पर भी महत्व मिल सकता है।
प्रेसवार्ता में कई सामाजिक प्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेसवार्ता में उद्योगपति कुंवर आलोक स्वरूप के साथ ललित माहेश्वरी, प्रभाव स्वरूप, अभय जैन, नितिन तायल, मनोज सैनी और अखिलेश जाटव सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रेसवार्ता में संगोष्ठी के उद्देश्य, वक्ताओं और कार्यक्रम की रूपरेखा से संबंधित जानकारी साझा की गई।
आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसी एक वर्ग तक सीमित न रहकर समाज में व्यापक स्तर पर सामाजिक सद्भाव और समानता के विचार को लेकर संवाद स्थापित करना है।
क्यों महत्वपूर्ण है सामाजिक समरसता पर संवाद?
आज समाज में विकास के साथ-साथ सामाजिक संबंधों की प्रकृति भी तेजी से बदल रही है। शहरीकरण, डिजिटल संचार, राजनीतिक और सामाजिक बहसों के बढ़ते प्रभाव तथा अलग-अलग सामाजिक पहचान के बीच संवाद की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
ऐसे वातावरण में सामाजिक समरसता पर सार्वजनिक चर्चा का महत्व बढ़ जाता है। समाज में मतभेद होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है, लेकिन मतभेदों को सामाजिक टकराव में बदलने से रोकने के लिए संवाद, सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना जरूरी है।
इसी व्यापक संदर्भ में मुजफ्फरनगर में होने वाली संगोष्ठी में सामाजिक समरसता के विचार पर मंथन किया जाएगा।
सिर्फ विचार नहीं, व्यवहार में समरसता पर जोर
सामाजिक समरसता का अर्थ केवल मंच से भाईचारे की बात करना नहीं है। इसका वास्तविक महत्व तब सामने आता है जब समाज के अलग-अलग वर्ग रोजमर्रा के जीवन में एक-दूसरे के अधिकारों और सम्मान का ध्यान रखते हैं।
जाति, वर्ग, आर्थिक स्थिति, सामाजिक पहचान या किसी अन्य आधार पर भेदभाव कम करने के लिए केवल कानून ही पर्याप्त नहीं होते। सामाजिक व्यवहार में भी बदलाव की जरूरत होती है।
यही कारण है कि मुजफ्फरनगर की इस संगोष्ठी में विचार-विमर्श का केंद्र केवल ऐतिहासिक संदर्भ नहीं रहेगा, बल्कि वर्तमान समाज में समरसता के मूल्यों को मजबूत करने के संभावित तरीकों पर भी चर्चा किए जाने की उम्मीद है।
गोरक्षपीठ के सामाजिक योगदान पर केंद्रित रहेगा विमर्श
गोरक्षपीठ की भूमिका को लेकर आयोजित इस कार्यक्रम में पीठ के इतिहास और उसके सामाजिक कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, विभिन्न सामाजिक वर्गों को जोड़ने और सामाजिक समरसता की दिशा में किए गए ऐतिहासिक प्रयासों पर वक्ताओं द्वारा प्रकाश डाला जाएगा।
इस दौरान यह समझने का प्रयास भी किया जाएगा कि धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं समाज में संवाद और सहयोग की भावना को मजबूत करने में किस प्रकार योगदान दे सकती हैं।
यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका केवल धार्मिक या सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई संस्थाएं शिक्षा, सेवा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में भी काम करती हैं।
मुजफ्फरनगर में जुटेगा सामाजिक और सार्वजनिक जीवन का प्रतिनिधित्व
कार्यक्रम में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े वक्ताओं की मौजूदगी इसे व्यापक स्वरूप देगी। साध्वी प्रज्ञा भारती, महामंडलेश्वर संदीप खत्री महाराज और मंत्री कपिल देव अग्रवाल के विचार कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण में रहेंगे।
संगोष्ठी के माध्यम से आयोजक यह संदेश देना चाहते हैं कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद जितना मजबूत होगा, सामाजिक एकता की संभावनाएं उतनी ही बेहतर होंगी।
मुजफ्फरनगर में होने वाला यह आयोजन ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन की पहले से चल रही संगोष्ठी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके तहत प्रदेश के कई जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
कार्यक्रम को लेकर क्या है आयोजकों का संदेश?
ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह के अनुसार, वर्तमान समय में सामाजिक भाईचारे और समानता को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। उनका कहना है कि समाज को ऐसी विचारधारा की जरूरत है जो विभाजन के बजाय संवाद, सहयोग और सम्मान को बढ़ावा दे।
इसी सोच के साथ फाउंडेशन की ओर से अलग-अलग शहरों में संगोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं।
मुजफ्फरनगर में होने वाला कार्यक्रम भी इसी प्रयास की अगली कड़ी है, जहां गोरक्षपीठ के ऐतिहासिक योगदान और सामाजिक समरसता के व्यापक विचार पर विशेषज्ञों और प्रमुख वक्ताओं के बीच चर्चा होगी।
5 अक्टूबर को जानसठ रोड पर होगा आयोजन
मुजफ्फरनगर के लोगों और सामाजिक संगठनों की नजर अब 5 अक्टूबर 2026, सोमवार, दोपहर 2:30 बजे होने वाली इस राष्ट्रीय संगोष्ठी पर है। कार्यक्रम लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर, जानसठ रोड में आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, गोरक्षपीठ की भूमिका, भारतीय चिंतन, सामाजिक एकता और वर्तमान समय में भाईचारे की जरूरत जैसे कई विषयों पर विचार सामने आने वाले हैं।
प्रेसवार्ता में आयोजकों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सामाजिक समानता और सद्भाव के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है। ऐसे में मुजफ्फरनगर में होने वाली यह संगोष्ठी सामाजिक संवाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में देखी जा रही है।

