समालखा में 126 जोड़ों का सामूहिक विवाह, Nirankari सतगुरु माता सुदीक्षा जी ने दिया सुखमय दांपत्य जीवन का संदेश
आपसी प्रेम, विश्वास और समर्पण ही वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाते हैं। इसी संदेश के साथ 79वें Nirankari संत समागम के समापन के बाद समालखा में विशाल सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में 126 नवयुगलों ने विवाह के बंधन में बंधकर अपने नए जीवन की शुरुआत की। इस अवसर पर नवविवाहित जोड़ों ने सतगुरु से सुख, शांति और खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त किया।
समारोह में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा से आए जोड़ों ने भी हिस्सा लिया। अलग-अलग भाषाओं, क्षेत्रों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आए 126 जोड़ों का एक साथ विवाह करना एकता, समानता और वैश्विक भाईचारे का संदेश बना। कार्यक्रम में सादगीपूर्ण विवाह और पारिवारिक मूल्यों को विशेष महत्व दिया गया।
जयमाला और निरंकारी सांझा-हार के साथ हुआ समारोह का शुभारंभ
सामूहिक विवाह समारोह की शुरुआत पारंपरिक जयमाला और निरंकारी सांझा-हार की रस्म के साथ हुई। मिशन की प्रधान राजकुमारी जी तथा अन्य कार्यकारिणी सदस्यों ने नवविवाहित जोड़ों को सांझा-हार पहनाकर उनके सुखमय वैवाहिक जीवन की मंगलकामना की। इसके बाद हिंदी में भक्तिमय निरंकारी लावों का गायन किया गया। इन लावों के माध्यम से पति-पत्नी के बीच विश्वास, सम्मान, प्रेम और समर्पण के महत्व को प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी ने नवविवाहित जोड़ों पर पुष्पवृष्टि कर उन्हें आशीर्वाद दिया। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक वातावरण के साथ विवाह की परंपराओं और मानवीय मूल्यों का सुंदर संगम देखने को मिला।
पति-पत्नी एक-दूसरे के दो पंख बनकर आगे बढ़ें: सतगुरु माता सुदीक्षा जी
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों में नवविवाहित जोड़ों को वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों और आपसी तालमेल का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह का भाव केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जीवन जीने का तरीका बनाना चाहिए। पति-पत्नी एक-दूसरे की जिम्मेदारियों को समान रूप से निभाएं और प्रेम, विश्वास तथा सहयोग के साथ जीवन में आगे बढ़ें।
उन्होंने प्रेरित किया कि पति-पत्नी एक-दूसरे के दो पंख बनकर हर परिस्थिति का सामना करें। जीवन में एक-दूसरे को आगे बढ़ने का अवसर दें और व्यक्तिगत प्रगति के साथ परिवार की खुशहाली का भी ध्यान रखें। उन्होंने सेवा, सुमिरन और सत्संग के मार्ग पर एक-दूसरे का सहयोग करने की भावना को भी महत्वपूर्ण बताया।
सतगुरु माता जी ने कहा कि विवाह ऐसा पवित्र रिश्ता है, जिसे जीवनभर प्रेम, आदर और समर्पण के साथ निभाया जाना चाहिए। दोनों परिवारों के बीच आपसी सम्मान और स्नेह इस रिश्ते को और मजबूत बनाते हैं। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को एक-दूसरे की कमियों को सहजता से स्वीकार करने तथा क्षमा, विनम्रता और समझदारी का भाव बनाए रखने की प्रेरणा दी।
सतगुरु माता जी के परिवार में भी सामूहिक समारोह में हुआ विवाह
इस समारोह की एक विशेष बात यह भी रही कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के परिवार के एक सदस्य का विवाह भी इसी सामूहिक एवं सादगीपूर्ण आयोजन में संपन्न हुआ। इसके माध्यम से सादगी और समानता के उस भाव को सामने रखा गया, जिसे निरंकारी मिशन अपने सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में प्रोत्साहित करता रहा है।
भारत के 16 राज्यों और विदेशों से पहुंचे नवविवाहित जोड़े
संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा जी ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित इस समारोह में भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से नवयुगलों ने भाग लिया। इनमें बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा से आए नवविवाहित जोड़ों ने भी समारोह में सहभागिता की। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों और संस्कृतियों से आए लोगों का एक ही मंच पर विवाह के बंधन में बंधना कार्यक्रम की विशेष पहचान बना।
सचिव जोगिन्दर सुखीजा जी के अनुसार, 126 जोड़ों की इस सहभागिता ने एकत्व, समानता और वैश्विक भाईचारे की भावना को प्रदर्शित किया। आयोजन में यह संदेश दिया गया कि भाषा, क्षेत्र और सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद प्रेम, विश्वास और मानवता सभी को एक सूत्र में जोड़ सकते हैं।
सादगीपूर्ण विवाह और सामाजिक समानता का संदेश
निरंकारी मिशन का यह सामूहिक विवाह समारोह केवल विवाह की रस्मों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से सादगी, सामाजिक समानता और पारिवारिक जिम्मेदारियों का संदेश भी दिया गया। एक ही आयोजन में इतने अलग-अलग क्षेत्रों से आए जोड़ों का विवाह संपन्न होना इस बात का प्रतीक बना कि रिश्तों की मजबूती का आधार बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि आपसी समझ, सम्मान और समर्पण है।
समारोह के माध्यम से नवविवाहित जोड़ों को यह प्रेरणा दी गई कि वे अपने जीवन की नई शुरुआत सकारात्मक सोच, सहयोग और मानवीय मूल्यों के साथ करें। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के आशीर्वचनों ने आयोजन को आध्यात्मिक संदेश से जोड़ा और सुखमय दांपत्य जीवन के लिए प्रेम तथा विश्वास को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया।
समालखा में आयोजित निरंकारी सामूहिक विवाह समारोह में 126 जोड़ों ने एक साथ वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने नवविवाहितों को प्रेम, विश्वास, समान जिम्मेदारी, क्षमा और आपसी सम्मान के साथ जीवन बिताने की प्रेरणा दी। देश-विदेश से आए जोड़ों की सहभागिता ने इस आयोजन को एकता, सादगी और भाईचारे का संदेश देने वाला समारोह बना दिया।

