Iran की दो टूक-एक ग्राम भी संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं भेजेंगे, अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें
तेहरान। अमेरिका और Iran के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपना संवर्धित यूरेनियम किसी दूसरे देश में नहीं भेजेगा। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई ने कहा कि जब तक अमेरिका भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता और तेहरान की शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के प्रयासों के तहत ईरान के दौरे पर हैं। ईरान के शीर्ष नेताओं ने उनके साथ मुलाकातों में अमेरिका के सामने अपनी मांगें दोहराईं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने बातचीत शुरू करने से पहले अमेरिकी कदमों को जरूरी बताया है।
ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं सात शर्तें
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका तब तक ईरान का भरोसा नहीं जीत सकता, जब तक वह तेहरान की सात शर्तों को पूरा नहीं करता। ये मांगें पिछले महीने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और व्यापक बातचीत का रास्ता तैयार करने के संदर्भ में सामने आई थीं।
ईरान की प्रमुख मांगों में उसके बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त करना, तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के विभिन्न मोर्चों पर जारी लड़ाई रोकना शामिल है। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले ऐसे कदम उठाए, जिनसे उसके भरोसे को बहाल किया जा सके।
गालिबाफ ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बैठक में कहा कि केवल बातचीत की पेशकश या दबाव बनाने से ईरान का भरोसा वापस नहीं आएगा। तेहरान का कहना है कि आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया अमेरिका की ओर से ठोस कार्रवाई किए जाने पर निर्भर करेगी। हालांकि, सभी सात शर्तों का पूरा विवरण और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
संवर्धित यूरेनियम ईरान से बाहर नहीं जाएगा
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और तेहरान के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है। मोहसिन रजाई ने कहा कि ईरान अपना संवर्धित परमाणु पदार्थ देश से बाहर नहीं भेजेगा। उन्होंने इसे ईरानी जनता की राष्ट्रीय संपत्ति बताया। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई भी पहले कह चुके हैं कि हथियार बनाने के लिए जरूरी स्तर के करीब पहुंच चुके संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए।
दूसरी ओर, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता में ठोस कमी करे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसी महीने कहा था कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर प्रगति के बिना दोनों देशों के बीच समझौते की राह आसान नहीं होगी। इस तरह यूरेनियम को देश से बाहर भेजने और संवर्धन की क्षमता सीमित करने का मुद्दा बातचीत में बड़ी बाधा बना हुआ है।
यूरेनियम संवर्धन पर अमेरिका और ईरान के दावे अलग-अलग
यूरेनियम संवर्धन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें यूरेनियम के एक विशेष समस्थानिक यूरेनियम-235 का अनुपात बढ़ाया जाता है। इसका उपयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है, जबकि अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियारों में भी संभव है। इसका वास्तविक उपयोग संवर्धन के स्तर, सामग्री की मात्रा और संबंधित तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
अमेरिका, इजराइल और कई पश्चिमी देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। इसकी एक प्रमुख वजह ईरान द्वारा यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक संवर्धित करना है। आम नागरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन के लिए सामान्यतः इतने ऊंचे संवर्धन स्तर की जरूरत नहीं होती। परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाला यूरेनियम आम तौर पर लगभग 90 प्रतिशत तक संवर्धित होता है।
हालांकि, ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने के आरोपों से इनकार करता रहा है। उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के उपयोग का अधिकार है। दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद अभी भी बरकरार हैं।
ट्रम्प बोले- ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 15 अक्टूबर को न्यूजमैक्स को दिए एक इंटरव्यू में दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। रॉयटर्स के अनुसार, ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार न हों। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि यदि ईरान ऐसे हथियार हासिल कर लेता है, तो उनका इस्तेमाल कर सकता है।
ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े पहाड़ के नीचे स्थित एक ठिकाने को निशाना बनाने की संभावना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस ठिकाने पर हमला करना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ संघर्ष में अमेरिका परमाणु बम का इस्तेमाल नहीं करेगा।
अमेरिका का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताते हुए संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने से इनकार कर रहा है। दोनों देशों के इन अलग-अलग रुखों के कारण समझौते की संभावनाएं सीमित बनी हुई हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत बहाल कराने की कोशिश
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इसी प्रयास के तहत सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर मंगलवार को तेहरान पहुंचे। ईरानी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने उनसे मुलाकात की। बैठक में क्षेत्रीय हालात और दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल कराने के प्रयासों पर चर्चा हुई।
आसिम मुनीर ने ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में ईरान ने अपनी शर्तें दोहराईं और कहा कि अमेरिका को भरोसा बहाल करने के लिए पहले कदम उठाने होंगे।
इससे पहले पाकिस्तान की मध्यस्थता से जून में दोनों देशों के बीच एक समझ बनी थी, लेकिन बाद में बातचीत की प्रक्रिया ठप पड़ गई और संघर्ष फिर तेज हो गया। अब पाकिस्तान एक बार फिर कूटनीतिक रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ईरान की ओर से रखी गई शर्तों और अमेरिका के परमाणु कार्यक्रम पर जोर के बीच सहमति बनना आसान नहीं दिख रहा है।
28 फरवरी से जारी संघर्ष ने बढ़ाई क्षेत्रीय चिंता
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। संघर्ष के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस विवाद का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। यहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर असर पड़ सकता है। ईरान की ओर से इस मार्ग को दोबारा खोलने के प्रस्ताव और अमेरिका की ओर से परमाणु कार्यक्रम पर जोर दिए जाने के बीच दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग-अलग बनी हुई हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल कराने के लिए पाकिस्तान की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल तेहरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपनी शर्तों पर समझौते से पीछे हटने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान की परमाणु क्षमता सीमित करने को अहम शर्त मान रहा है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट होगा कि कूटनीतिक प्रयास संघर्ष को रोकने की दिशा में आगे बढ़ पाते हैं या नहीं।
ईरान ने संवर्धित यूरेनियम विदेश भेजने से साफ इनकार करते हुए अमेरिका से बातचीत के लिए अपनी सात शर्तें दोहराई हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं।

