Armenia की संसद में महिलाओं पर बयान को लेकर बवाल, सत्तापक्ष-विपक्ष के सांसदों में मारपीट; कार्यवाही रोकनी पड़ी
Armenia की संसद में गुरुवार को सत्तारूढ़ दल और विपक्षी सांसदों के बीच तीखी बहस के बाद मारपीट हो गई। विवाद महिलाओं को लेकर दिए गए एक बयान से शुरू हुआ था। देखते ही देखते सदन में माहौल तनावपूर्ण हो गया और कुछ सांसद एक-दूसरे के सामने आ गए। इस दौरान एक सांसद को फर्श पर गिरा दिया गया। हालात बिगड़ते देख संसद में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और स्थिति को संभालने की कोशिश की। हंगामे के चलते संसद की कार्यवाही रोकनी पड़ी।
रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद सत्तारूढ़ दल के सांसद तारोन चखोयान और विपक्षी नेता नारेक कारापेटयन के बीच शुरू हुआ। चखोयान ने कारापेटयन से महिलाओं को लेकर की गई एक विवादित टिप्पणी पर माफी मांगने की मांग की थी। उन्होंने विपक्षी नेता के परिवार को लेकर भी टिप्पणी की, जिससे मामला और गरमा गया। इसके बाद विपक्षी सांसद स्पीकर के पोडियम की ओर बढ़े और बहस धक्का-मुक्की तक पहुंच गई।
महिलाओं पर टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
बताया गया है कि विवाद की जड़ विपक्षी नेता नारेक कारापेटयन के भाई की महिलाओं की यौन संतुष्टि को लेकर की गई टिप्पणी थी। इस बयान को लेकर संसद में सवाल उठाए गए और महिलाओं के प्रति इस तरह की भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई। मामला महिलाओं की राजनीतिक सक्रियता से शुरू होकर यौन संतुष्टि और आर्मेनिया में घटती जन्म दर जैसे विषयों तक पहुंच गया था।
सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद तारोन चखोयान ने सदन में इस बयान का उल्लेख करते हुए कारापेटयन पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि इस टिप्पणी के लिए अब तक महिलाओं से माफी क्यों नहीं मांगी गई। चखोयान की मांग के बाद दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो गई। आरोप-प्रत्यारोप के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियां भी हुईं, जिससे सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
बहस से धक्का-मुक्की तक पहुंचा मामला
विवाद बढ़ने पर विपक्षी सांसद स्पीकर के पोडियम की ओर बढ़े। इसके बाद सांसदों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। घटनाक्रम के दौरान एक सांसद को धक्का देकर फर्श पर गिराए जाने की बात सामने आई है। सदन में मौजूद अन्य सदस्यों और सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव किया।
संसद के भीतर इस तरह की घटना के बाद कार्यवाही रोकनी पड़ी। राजनीतिक मतभेदों और विवादित बयानों पर चर्चा के लिए बने सदन में बहस का हिंसक रूप लेना संसदीय अनुशासन को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, घटना के दौरान किस सांसद ने पहले शारीरिक हमला किया और पूरे घटनाक्रम में किसकी क्या भूमिका रही, इसका स्पष्ट निर्धारण विस्तृत आधिकारिक जानकारी के बिना नहीं किया जा सकता।
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और जन्म दर पर भी हुई चर्चा
इस विवाद में महिलाओं की राजनीतिक सक्रियता, यौन संतुष्टि और देश की घटती जन्म दर जैसे अलग-अलग विषय एक साथ जुड़ गए। रिपोर्ट के अनुसार, चर्चा के दौरान महिलाओं की भूमिका और उनके बारे में की गई टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ा। सत्तारूढ़ दल के सांसद ने विपक्षी नेता से माफी की मांग करते हुए इस मुद्दे को संसद में उठाया।
महिलाओं से जुड़े सामाजिक और जनसांख्यिकीय मुद्दों पर बहस कई देशों की राजनीति का हिस्सा रही है, लेकिन इस मामले में विवाद का केंद्र एक विशिष्ट टिप्पणी और उसके बाद हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया थी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि संसद में हुई मारपीट के बाद किसी पक्ष ने औपचारिक रूप से माफी मांगी है या किसी सांसद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
संसद की कार्यवाही रोकनी पड़ी, घटना ने खींचा ध्यान
आर्मेनिया की संसद में हुई इस घटना ने देश की राजनीति में बयानबाजी और संसदीय आचरण को लेकर चर्चा तेज कर दी है। महिलाओं पर विवादित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद सांसदों के बीच शारीरिक टकराव में बदल गया और अंततः सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। सुरक्षाकर्मियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया।
घटना से जुड़ी तस्वीरों में संसद के भीतर तनावपूर्ण माहौल और सांसदों के बीच टकराव के दृश्य सामने आए हैं। हालांकि, तस्वीरें पूरे घटनाक्रम का क्रम या विवाद के सभी पहलुओं को अपने आप प्रमाणित नहीं करतीं। घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने और किसी संभावित कार्रवाई की जानकारी के लिए संबंधित संसदीय अधिकारियों के आधिकारिक बयान महत्वपूर्ण होंगे।
आर्मेनिया की संसद में महिलाओं पर विवादित बयान को लेकर शुरू हुई बहस सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच मारपीट में बदल गई। सुरक्षाकर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा और सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। विवाद के बाद अब घटना के पूरे क्रम और संभावित कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी पर नजर रहेगी।

