Abbottabad का ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा विवादों में: बेचने और गिराने के आरोप से सिख समुदाय में रोष | Abbottabad Gurdwara Sri Guru Singh Sabha Controversy
Abbottabad शहर स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा को कथित रूप से बेचने और उसकी इमारत गिराने की अनुमति देने के आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा अब जर्जर हालत में है और इसके ढांचे के साथ छेड़छाड़ की गई है। सिख समुदाय ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है।
इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड पर गंभीर आरोप
मामले में Evacuee Trust Property Board (ETPB) के एक अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये की रिश्वत लेकर गुरुद्वारा परिसर को बेच दिया।
ETPB पाकिस्तान में सिखों, हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों के रखरखाव और संरक्षण के लिए जिम्मेदार संस्था है। आरोप यह भी है कि संबंधित अधिकारी ने गुरुद्वारे की इमारत को गिराने और वहां व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने की अनुमति दे दी।
गुरुद्वारे की जमीन पर बुटीक निर्माण की तैयारी
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अटोक जिले के हसन अब्दाल स्थित ETPB प्रशासक ने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा का कब्जा वाहिद बाला नामक स्थानीय निवासी को सौंप दिया।
बताया जा रहा है कि खरीदार ने इस जमीन को अपनी दो पत्नियों—रिदा जादून और आयशा वाहिद—के नाम पर दर्ज कराया है। अब वहां कपड़ों का बुटीक खोलने की तैयारी चल रही है।
सिख समुदाय का कहना है कि धार्मिक स्थल को व्यावसायिक उपयोग में बदलना ऐतिहासिक और धार्मिक भावनाओं का अपमान है।
गुरुद्वारा गली और मार्केट आज भी नाम से मौजूद
एबटाबाद में जिस इलाके में यह गुरुद्वारा स्थित है, वह आज भी ‘गुरुद्वारा गली’ और ‘गुरुद्वारा मार्केट’ के नाम से जाना जाता है।
स्थानीय सिखों का आरोप है कि ETPB ने वर्षों तक परिसर में बनी दुकानों से किराया वसूला, लेकिन इमारत की मरम्मत नहीं कराई। समय के साथ भवन जर्जर होता गया और अब इसे गिराने की अनुमति दिए जाने का दावा किया जा रहा है।
मुख्य द्वार पर अब भी गुरुमुखी में अंकित नाम
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के मुख्य प्रवेश द्वार पर आज भी गुरुमुखी में ‘गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा’ अंकित है। दीवान हॉल के बाहर ‘सचखंडि वसै निरंकार’ शब्द स्पष्ट दिखाई देते हैं।
इन धार्मिक चिह्नों के बावजूद, अंदरूनी हिस्सों में तोड़फोड़ की खबरें सामने आई हैं। इससे समुदाय में आक्रोश और बढ़ गया है।
19वीं सदी की ऐतिहासिक विरासत
इतिहासकारों के अनुसार, यह गुरुद्वारा 19वीं सदी में बनाया गया था, जब हजारा-एबटाबाद क्षेत्र सिख शासन के अधीन था। माना जाता है कि इसका निर्माण 1818 से 1849 के बीच हुआ, जब Maharaja Ranjit Singh का शासन था।
हजारा क्षेत्र उस समय सिख प्रशासन और सैन्य उपस्थिति का महत्वपूर्ण केंद्र था। इसलिए यह गुरुद्वारा स्थानीय सिख आबादी का प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता था।
आजादी के बाद वीरान पड़ा धार्मिक स्थल
1947 के बाद हिंदू और सिख समुदाय के पलायन के कारण यह गुरुद्वारा धीरे-धीरे वीरान हो गया। धार्मिक गतिविधियां बंद हो गईं और 1976 के बाद भवन की स्थिति लगातार खराब होती चली गई।
समय के साथ रखरखाव की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर खंडहर में बदलती गई।
सिख समुदाय की मांग: जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हो
पाकिस्तान में रह रहे सिखों ने संबंधित ETPB अधिकारी को तत्काल बर्खास्त करने और गुरुद्वारा भवन को संरक्षित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि सिख इतिहास और आस्था का प्रतीक है।
समुदाय ने सरकार से हस्तक्षेप कर इस स्थल को संरक्षित करने और व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने की अपील की है।
धार्मिक विरासत और संरक्षण पर उठते सवाल
Abbottabad Gurdwara Sri Guru Singh Sabha Controversy ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक तंत्र की आवश्यकता है, ताकि धार्मिक स्थलों का व्यावसायीकरण रोका जा सके।

