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भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी में नई ऊर्जा: पीएम मोदी और मार्क कार्नी की ऐतिहासिक मुलाकात, 10 साल का यूरेनियम समझौता तय | India-Canada Uranium Deal

India-Canada Uranium Deal ने भारत और कनाडा के रिश्तों में नई जान फूंक दी है। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में सोमवार सुबह प्रधानमंत्री Narendra Modi और कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के बीच अहम बैठक हुई।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार समझौते पर रचनात्मक चर्चा हुई है। सबसे अहम उपलब्धि सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति को लेकर ऐतिहासिक समझौता है।


10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता: ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती

इस दौरे का मुख्य आकर्षण 10 वर्षों के लिए यूरेनियम आपूर्ति समझौता रहा। सूत्रों के अनुसार, यह डील लगभग 3 अरब डॉलर की हो सकती है।

कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है। भारत के तेजी से विस्तार कर रहे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए यह समझौता रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और कनाडा के बीच 2013 में न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट लागू हुआ था, जिसके बाद से कनाडा भारत को यूरेनियम की आपूर्ति कर रहा है। नया समझौता इस साझेदारी को दीर्घकालिक स्थिरता देगा।


छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर सहयोग

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) और उन्नत रिएक्टर तकनीकों के विकास पर भी मिलकर काम करेंगे।

ऊर्जा क्षेत्र के अलावा कृषि, कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा में मूल्यवर्धन को भी प्राथमिकता दी गई है। भारत में “भारत-कनाडा पल्स प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र” स्थापित किया जाएगा, जो दाल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा में सहयोग को बढ़ावा देगा।


रक्षा और सुरक्षा सहयोग में नया अध्याय

बैठक में रक्षा और समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने भारत-कनाडा रक्षा संवाद स्थापित करने का निर्णय लिया है।

रक्षा उद्योगों में साझेदारी, समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और परिपक्व संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।


पश्चिम एशिया पर भारत की चिंता

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत विश्व में शांति और स्थिरता का पक्षधर है और हर समस्या का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।

उन्होंने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरता को वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती बताया और कहा कि इनसे निपटने में दोनों देशों का घनिष्ठ सहयोग आवश्यक है।


निवेश और व्यापार: 21 अरब डॉलर से अधिक का वार्षिक कारोबार

कनाडा के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत और कनाडा के बीच वार्षिक व्यापार 21 अरब डॉलर से अधिक है।

भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां सक्रिय हैं। भारत से कनाडा को दवाइयां, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पाद निर्यात होते हैं।

कनाडा के बड़े पेंशन फंड भारत में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में करीब 100 बिलियन डॉलर का निवेश कर चुके हैं। अब कनाडा इस निवेश को और विस्तार देना चाहता है।


राजनीतिक मतभेदों के बाद सुधार की कोशिश

2023 में सिख अलगाववादी नेता Hardeep Singh Nijjar की हत्या के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आया था। उस समय कनाडा के प्रधानमंत्री Justin Trudeau ने संसद में आरोप लगाए थे कि भारतीय एजेंसियां इस घटना में शामिल हो सकती हैं।

भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया था और कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों पर चिंता जताई थी। दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया और वीजा सेवाओं पर भी असर पड़ा।

मार्च 2025 में मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं।


उद्योग जगत से भी संपर्क

विदेश मंत्री S. Jaishankar ने भी मार्क कार्नी से मुलाकात की।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन Mukesh Ambani और उनके परिवार ने मुंबई स्थित आवास पर कनाडाई प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी डायना फॉक्स कार्नी की मेजबानी की। यह संकेत है कि दोनों देशों के बीच कारोबारी संपर्क भी मजबूत किए जा रहे हैं।


रणनीतिक साझेदारी की नई दिशा

India-Canada Uranium Deal केवल ऊर्जा क्षेत्र का समझौता नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक साझेदारी की ओर कदम है। निवेश, रक्षा, कृषि, प्रौद्योगिकी और वैश्विक मुद्दों पर समन्वय के जरिए दोनों देश अपने संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

राजनीतिक मतभेदों के दौर के बाद यह मुलाकात संबंधों में स्थिरता और व्यावहारिक सहयोग की वापसी का संकेत मानी जा रही है।


नई दिल्ली में हुई यह उच्चस्तरीय बैठक भारत-कनाडा संबंधों के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। India-Canada Uranium Deal के साथ ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है, वहीं रक्षा, कृषि और निवेश सहयोग के नए रास्ते खुले हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़कर रणनीतिक साझेदारी को कितनी मजबूती दे पाते हैं।

 

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