औरैया: एमएलसी कमलेश को झटकाः अवैध कब्जे पर सालों से स्कूल खड़ा जेसीबी चलाकर ध्वस्त
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला बनारसीदास में रविवार की सुबह जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला प्रशासन ने समाजवादी पार्टी के एमएलसी डॉ कमलेश पाठक के विद्यालय के कुछ हिस्से को जेसीबी चलाकर ध्वस्त कर दिया।
इस बारे में जिला प्रशासन का कहना है कि एमएलसी कमलेश ने अवैध रूप से कब्जा करते हुए यहां पर निर्माण कराया था, जिसे न्यायालय के आदेश के बाद गिरा दिया गया।
रविवार की सुबह मोहल्ला बनारसीदास में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक से पुलिस के कई जवान जनक दुलारी इंटर कॉलेज के आसपास विचरण करते हुए दिखाई दिए। लोगों में मामले की जानकारी लेने की उत्सुकता जागृत हो गई। वह लोग अपने अपने घरों के दरवाजों पर खड़े हो गए।
वहीं पुलिस प्रशासन ने उन्हें अंदर का रास्ता दिखाया। थोड़ी ही देर बाद दो जेसीबी मशीनें भी आ गई। इस पर आसपास के लोगों के कान खड़े हो गए।
देखते ही देखते प्रशासनिक अमला भी जनक दुलारी इंटर कॉलेज के पास पहुंच गया। जहां पर जिला प्रशासन ने जेसीबी चालकों को आदेश दिया कि गाटा संख्या 291क, 293ग, एवं 291ख में कमलेश पाठक पुत्र राम अवतार निवासी औरैया के अवैध कब्जे को ध्वस्त कर दिया जाए।
इसके बाद जेसीबी से निर्माण ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। देखते ही देखते जेसीबी चालको ने अवैध रूप से बनाए गए भवन को जमींदोज कर दिया।
इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य द्वारा अपर जिला अधिकारी रेखा एस चौहान से निवेदन किया गया कि अगर स्कूल का यह हिस्सा ध्वस्त हो जाएगा तो बच्चों की पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न होगा। मगर अपर जिलाधिकारी ने न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कार्यवाही में व्यवधान न डाले जाने की बात कही।
इस बारे में जानकारी देते हुए अपर जिला अधिकारी रेखा एस चौहान ने बताया कि कमलेश पाठक ने अवैध कब्जइ कर स्कूल निर्माण करवाया था, जिसे बेदखल कर दिया गया है।
उनसे 3 लाख 75 हजार रुपए क्षतिपूर्ति तथा 10 रुपये निष्पादन व्यय आरोपित किया जाता है। उन्होंने बताया क्षति पूर्ति बसूली के लिए कमलेश पाठक को नोटिस जारी किया जाएगा।
वहीं जिस जगह अवैध निर्माण हुआ वह भूमि बंजर के रूप में सरकारी अभिलेखों में दर्ज हैं। जिस पर करीब तीन साल से कमलेश पाठक अवैध कब्जा किए हुए हैं। अतिक्रमण कर्ता की ओर से 14 दिसंबर 2020 को आपत्ति प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था।
जिसमें आपत्ति करने हेतु एक माह का अवसर चाहा गया था। मगर एक माह का अवसर बीत जाने पर भी आपत्ति प्रस्तुत नहीं की गई। इसलिए न्यायालय ने भवन को ध्वस्त कर भूमि को अपने कब्जे में लेने के आदेश जारी कर दिए।

