Muzaffarnagar News: अग्रणी साहित्यिक संस्था वाणी की मासिक गोष्ठी का हुआ आयोजन
Muzaffarnagar News अंतर्द्वंद चल रहा मेरे मन के अंदर। डा. मुकेश दर्पन ने अपनी रचना बखूबी ऐसे पढ़ी…गुरु का ध्यान समंदर खंगाल सकता है, मुसीबत से वह तुझको निकाल सकता है । जिसे यकीन हो अपने गुरु की वाणी पर, जमीं की तह से वो सूरज निकाल सकता है। सुमन सिंह चंदेल ने अपनी रचना में वसंत की बात करते हुए कहा, मेरे जीवन के जब से बीते हैं पचपन, पिताजी के मेरे लौट आया है बचपन।
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