उत्तर प्रदेश

Budaun के स्कूल में 5 साल की मासूम की रहस्यमयी मौत, ब्रेसलेट के मोती से मौत का दावा, लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

Budaun  के एक निजी स्कूल के भीतर, पढ़ाई के दौरान, एक 5 साल की मासूम बच्ची की अचानक हुई मौत ने न सिर्फ परिजनों बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। सवाल सिर्फ मौत का नहीं है, सवाल है स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, निगरानी और जिम्मेदारी का।


🔴 बदायूं स्कूल मौत मामला: क्या है पूरा घटनाक्रम

उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद के थाना आलापुर क्षेत्र अंतर्गत कस्बा ककराला स्थित न्यू होप्स पब्लिक स्कूल में यह दर्दनाक घटना सामने आई। स्कूल की एनसी क्लास में पढ़ने वाली 5 वर्षीय छात्रा तापसी की स्कूल परिसर में ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

स्कूल प्रशासन का दावा है कि बच्ची ने अपने हाथ में पहने ब्रेसलेट का मोती निगल लिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ी और उसकी जान चली गई। वहीं दूसरी ओर, परिजन इस पूरे मामले को स्कूल की गंभीर लापरवाही बता रहे हैं।


🔴 सुबह तक बिल्कुल स्वस्थ थी बच्ची, फिर क्या हुआ?

मृतक बच्ची के पिता टेकचंद, जो कस्बा ककराला के गांव उघैनी के निवासी हैं, ने बताया कि सुबह जब वे अपनी बेटी तापसी को स्कूल छोड़कर गए थे, तब वह पूरी तरह स्वस्थ थी। न तो उसे बुखार था, न किसी तरह की कोई बीमारी।

पिता के अनुसार, बच्ची लंच में दो पराठे भी साथ लेकर गई थी। लेकिन कुछ ही घंटों बाद स्कूल से फोन आया कि बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई है। जब परिजन दौड़ते हुए स्कूल पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि उनकी बच्ची की मौत हो चुकी है।


🔴 स्कूल का पक्ष: ब्रेसलेट का मोती बना मौत की वजह?

न्यू होप्स पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल भूराज सिंह ने बताया कि बच्ची सुबह स्कूल में पूरी तरह सामान्य अवस्था में आई थी। क्लास रूम में बच्ची के पास बैठी एक अन्य छात्रा ने बताया कि तापसी ने अपने हाथ में पहने ब्रेसलेट का मोती मुंह में चबा लिया था।

इस जानकारी के बाद तुरंत क्लास टीचर ने स्कूल प्रशासन को सूचित किया। प्रिंसिपल के अनुसार, उन्होंने स्वयं बच्ची के परिजनों को फोन कर हालात की जानकारी दी।


🔴 अस्पतालों के चक्कर, फिर भी नहीं बच सकी जान

स्कूल प्रशासन के मुताबिक, सूचना मिलते ही बच्ची की दादी स्कूल पहुंचीं और बच्ची को स्कूल की गाड़ी से तुरंत बदायूं शहर ले जाया गया। पहले उन्हें नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉक्टर आर.के. अग्रवाल के पास ले जाया गया, जिन्होंने स्थिति गंभीर बताते हुए सर्जन डॉक्टर ए.के. वर्मा के पास भेजा।

इसके बाद बच्ची को जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दौरान हर मिनट बच्ची की जान पर भारी पड़ता गया।


🔴 परिजनों का आरोप: स्कूल की लापरवाही से गई जान

परिजनों का साफ कहना है कि अगर स्कूल में समय रहते सही निगरानी और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था होती, तो शायद उनकी बेटी की जान बच सकती थी। उनका सवाल है कि पांच साल के बच्चों के हाथों में ऐसी वस्तुएं क्यों रहने दी जाती हैं, जिन्हें निगलने का खतरा हो।

Budaun Latest News से जुड़े इस मामले में परिजनों ने स्कूल की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।


🔴 पुलिस जांच में जुटी, CCTV फुटेज खंगाले जा रहे

मामला पुलिस तक पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी अपने कब्जे में ले ली है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्ची की तबीयत कब और कैसे बिगड़ी।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।


🔴 स्कूल प्रशासन का भावुक बयान

स्कूल प्रिंसिपल भूराज सिंह ने कहा कि यह बच्ची सिर्फ उसके पिता की नहीं, बल्कि स्कूल की भी बच्ची थी। उनका कहना है कि बच्ची रोजाना 5 से 6 घंटे स्कूल में रहती थी, ऐसे में उसकी जिम्मेदारी स्कूल की भी बनती है।

उन्होंने कहा कि पुलिस जांच में स्कूल पूरा सहयोग कर रहा है और परिजन जिस तरह की मदद चाहते हैं, स्कूल प्रशासन उसके लिए तैयार है।


🔴 बड़ा सवाल: स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा कितनी पुख्ता?

Budaun Latest News का यह मामला एक बार फिर निजी स्कूलों में छोटे बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। क्या क्लास रूम में बच्चों पर पर्याप्त नजर रखी जाती है? क्या टीचर्स और स्टाफ को आपातकालीन स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया है?

पांच साल की उम्र में बच्चों का व्यवहार अनिश्चित होता है, ऐसे में छोटी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।


बदायूं के स्कूल में हुई इस मासूम की मौत ने पूरे जिले को सोचने पर मजबूर कर दिया है। Budaun Latest News में दर्ज यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उन तमाम स्कूलों के लिए चेतावनी है, जहां नन्हे बच्चों की सुरक्षा भविष्य की नींव मानी जाती है। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सच्चाई सामने आएगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसी घटनाओं से सबक लिया जाएगा या फिर अगली खबर किसी और मासूम की होगी।

 

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