उत्तर प्रदेश

CBSE Junior Clerk Exam Scam: दिव्यांग प्रमाण पत्र के नाम पर भर्ती में सेंधमारी, झांसी-ललितपुर से बना फर्जी नेटवर्क उजागर

उत्तर प्रदेश में CBSE Junior Clerk Exam Scam से जुड़ा बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें अभ्यर्थियों को फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाने वाले गिरोह का संगठित नेटवर्क सामने आया है। इस मामले में झांसी और ललितपुर के सीएमओ कार्यालयों से प्रमाण पत्र बनवाने की बात सामने आई है, जबकि झांसी सिविल अस्पताल के एक कर्मचारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। 🚨

स्पेशल टास्क फोर्स (STF) इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।


सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, 9 आरोपी गिरफ्तार

CBSE Junior Clerk Exam Scam की जांच के दौरान एसटीएफ ने एक संगठित सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया। गिरोह का सरगना बीसीए पास मनीष मिश्रा बताया गया है।

पुलिस ने उसके साथियों आकाश अग्रवाल, सौरभ सोनी समेत तीन अभ्यर्थी—राजकिशोर, राम मिलन, अभिषेक यादव—और तीन सॉल्वर—नीरज झा, सत्यम कुमार और दीपक कुमार—को गिरफ्तार किया है। कुल नौ लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।


झांसी और ललितपुर से बनवाए गए 40 फीसदी दिव्यांगता प्रमाण पत्र

CBSE Junior Clerk Exam Scam में यह सामने आया कि अभ्यर्थियों ने खुद को दिव्यांग दिखाने के लिए सरकारी दस्तावेजों का दुरुपयोग किया।

राजकिशोर ने 40 प्रतिशत लो-विजन दिव्यांगता प्रमाण पत्र ललितपुर सीएमओ कार्यालय से बनवाया था। इसी तरह राम मिलन ने 40 प्रतिशत शारीरिक अक्षमता का प्रमाण पत्र झांसी सीएमओ कार्यालय से बनवाया।

अभिषेक यादव ने भी लो-विजन का प्रमाण पत्र बनवाकर परीक्षा में हिस्सा लिया। जांच में इन प्रमाण पत्रों की वैधता और प्रक्रिया की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


7-8 वर्षों से सक्रिय था गिरोह, 40 हजार रुपये में बनते थे प्रमाण पत्र

जांच में सामने आया कि यह गिरोह पिछले सात से आठ वर्षों से सक्रिय था और व्यवस्थित तरीके से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचा रहा था।

गिरोह का सदस्य आकाश अग्रवाल सीधे झांसी सिविल अस्पताल के कर्मचारी मोंटी यादव उर्फ शिवा यादव से संपर्क में था। आरोप है कि मोंटी यादव प्रति प्रमाण पत्र करीब 40 हजार रुपये लेकर फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र तैयार करवाता था।

जांच में तीन से चार अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं, जो इस नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं।


चलने-फिरने में अक्षम बताकर दी दरोगा भर्ती परीक्षा

CBSE Junior Clerk Exam Scam की जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपी राम मिलन ने खुद को शारीरिक रूप से अक्षम बताकर परीक्षा दी, जबकि जांच में सामने आया कि उसने 14 मार्च को आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा में भी भाग लिया था।

एसटीएफ अब इस मामले की रिपोर्ट पुलिस भर्ती बोर्ड को भेजने की तैयारी कर रही है। इससे उसकी पात्रता पर सवाल उठ सकते हैं और परीक्षा परिणाम प्रभावित हो सकता है।


सरकारी कर्मचारी भी जांच के घेरे में

CBSE Junior Clerk Exam Scam में गिरफ्तार सॉल्वर नीरज झा बीटेक कंप्यूटर साइंस से शिक्षित है और वर्तमान में दिल्ली के पीडब्ल्यूडी विभाग में मल्टी टास्किंग स्टाफ के रूप में कार्यरत है।

वहीं आकाश अग्रवाल झांसी पीडब्ल्यूडी में क्लर्क के पद पर कार्यरत है। एसटीएफ इन दोनों के खिलाफ संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेजेगी, जिसके आधार पर विभागीय कार्रवाई संभव है।


बैंक भर्ती तक फैला था नेटवर्क, कई चयन संदिग्ध

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं था। आरोपियों ने कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सॉल्वर बैठाकर चयन करवाने की बात स्वीकार की है।

बताया गया कि वर्ष 2023 में सुमित कुशवाहा का चयन दिव्यांग श्रेणी में बैंक में कराया गया था, जो वर्तमान में State Bank of India उरई शाखा में तैनात है।

इसी तरह वर्ष 2025 में रुकमणि देवी को बैंक क्लर्क पद पर चयन दिलाया गया। उरई की सृष्टि द्विवेदी का चयन Bank of Baroda में पीओ पद पर हुआ और उनकी ट्रेनिंग लखनऊ में चल रही है।

इसके अलावा मंजूलिका का चयन Canara Bank में कराया गया। अब इन सभी चयन प्रक्रियाओं की जांच शुरू हो सकती है।


सैकड़ों चयन पर उठे सवाल, कई और नाम सामने आने की संभावना

CBSE Junior Clerk Exam Scam में आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि इस नेटवर्क के जरिए सैकड़ों अभ्यर्थियों का चयन विभिन्न परीक्षाओं में कराया गया है। इससे भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

एसटीएफ अब पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है और संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेजने की तैयारी कर रही है।


CBSE Junior Clerk Exam Scam में सामने आए खुलासों ने भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एसटीएफ द्वारा फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस संगठित सॉल्वर गिरोह से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं।

 

News-Desk

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