Ballia में मंत्री संजय निषाद के बयान पर बवाल: करणी सेना का तीखा विरोध, जिले में प्रदर्शन तेज
Ballia जिले के बांसडीह कस्बा में आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के एक विवादित बयान के बाद पूरे जिले का माहौल गर्म हो गया है। मंत्री के बयान को लेकर जनपदवासी आक्रोशित हैं और जगह-जगह प्रदर्शन, नारेबाज़ी और विरोध सभाएँ आयोजित की जा रही हैं।
बयान का असर इतना व्यापक हो गया कि यह मामला अब Ballia protest news के रूप में प्रदेश भर में सुर्खियों में आ गया है।
मंत्री के बयान के बाद जनाक्रोश—”बलिया के लोगों को दलाल कहना अस्वीकार्य”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंत्री ने अपने भाषण में बलिया की जनता को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जो जनपदवासियों की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली थी।
इस बयान के बाहर आने के कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया और ज़मीनी स्तर पर विरोध की लहर तेज हो गई।
बलिया के इतिहास, समाज और प्रतिष्ठा को लेकर बेहद संवेदनशील जनता ने इसे अपनी अस्मिता पर आघात माना।
कई संगठनों ने कहा कि मंत्री ने “बागियों की धरती बलिया” का अपमान किया है।
करणी सेना की कड़ी प्रतिक्रिया—जिलाध्यक्ष कमलेश सिंह का तीखा बयान
इस विवाद में सबसे तीखी प्रतिक्रिया करणी सेना के जिलाध्यक्ष कमलेश सिंह की रही।
उन्होंने मंत्री की टिप्पणी को लेकर बेहद कठोर शब्दों में आपत्ति जताई और कहा कि—
बलिया स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी रहा है
1942 के आंदोलन में यहां के सेनानियों ने जिला मुक्त कराकर देश को उदाहरण दिया
ऐसे गौरवशाली जनपद को अपमानित करना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं
उन्होंने अपने संबोधन में मंत्री की टिप्पणी की आलोचना की और यह कहा कि बलिया की जनता को “दलाल” कहना ऐतिहासिक और सामाजिक रूप से गलत है।
(नोट: उन्होंने चर्चा में कई अत्यधिक तीखे और आपत्तिजनक बयान भी दिए, जिन्हें यहाँ केवल समाचार संदर्भ में जिम्मेदारी से प्रस्तुत किया जा रहा है। प्लेटफॉर्म किसी भी प्रकार की हिंसा, धमकी या दंडात्मक कार्रवाई का समर्थन नहीं करता।)
जिले में विरोध प्रदर्शन तेज—कई संगठन सड़क पर उतरे
मंत्री के बयान के विरोध में—
छात्र संगठन
सामाजिक संगठन
क्षेत्रीय युवा मोर्चा
स्थानीय व्यापार मंडल
ग्रामीण व शहरी समितियाँ
सड़क पर उतर आए हैं।
बांसडीह, रसड़ा, मनियर, चितबड़ागांव और बलिया शहर के कई हिस्सों में हज़ारों लोग इकट्ठा होकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
कई जगहों पर—
मंत्री के बयान का पुतला दहन
धरना-प्रदर्शन
प्रेस कॉन्फ्रेंस
विरोध जुलूस
जारी है।
“बलिया बागियों की धरती है”—क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को जोड़ा गया विवाद से
बलिया के लोग अपने इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई गई भूमिका को लेकर बेहद भावुक रहते हैं।
1910 के दशक से लेकर 1942 तक बलिया के सेनानियों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध कई बड़े आंदोलन चलाए।
1942 में बलिया ने पांच दिन तक खुद को अंग्रेजी शासन से मुक्त घोषित कर दिया था।
इसी गौरव को सामने रखते हुए कई संगठनों ने कहा—
“हम बागियों की संतान हैं, किसी के दलाल नहीं।”
यह बात स्थानीय जनमानस के भीतर असंतोष को और तेज कर रही है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा—क्या मंत्री के बयान का होगा बड़ा असर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आगामी महीनों में भारी राजनीतिक प्रभाव डाल सकता है।
बलिया, परंपरागत रूप से—
राजनीतिक रूप से अत्यंत सक्रिय
जातीय समीकरणों में संवेदनशील
जन आंदोलनों वाला क्षेत्र
रहा है।
ऐसे में मंत्री की यह टिप्पणी कई दलों के लिए मुद्दा बन चुकी है।
कुछ दल इसे सरकार की “जनभावनाओं से दूरी” बता रहे हैं।
कुछ संगठन मंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं।
मंत्री की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं—चुप्पी से बढ़ी असंतोष की आग
विवाद बढ़ने के बाद भी अब तक मंत्री डॉ. संजय निषाद की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
इसी चुप्पी को कई स्थानीय संगठनों ने “जनता की अनदेखी” बताया है।
सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं—
“बलिया की जनता के सम्मान की रक्षा करनी चाहिए।”
“हमारे इतिहास का मज़ाक नहीं चलेगा।”
“मंत्री माफी माँगे।”
बयान की गूंज अब लखनऊ तक पहुंच रही है।
अगले कुछ दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है आंदोलन
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह विरोध जिला स्तर से बढ़कर प्रदेश-स्तरीय राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
कई संगठन संयुक्त मोर्चा बनाने की तैयारी में हैं।
सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस प्रशासन की टीमें सतर्क रखी गई हैं।
अधिकारियों ने स्थिति पर पैनी निगरानी शुरू कर दी है।

