12 साल बाद बड़ी कार्रवाई: पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी की कथित साजिश बेनकाब, Balrampur में अवैध मजार पर चला बुलडोज़र
जनपद Balrampur के सादुल्लानगर थाना परिसर में वर्षों से विवादित चल रहे अवैध कब्जे पर आखिरकार प्रशासन ने निर्णायक कार्रवाई कर दी।
2013 से कब्जाई गई जमीन को मुक्त कराने के लिए चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 1 दिसंबर 2025 को प्रशासन ने बुलडोज़र चलाकर अवैध रूप से बनाई गई मजार को ध्वस्त करा दिया।
यह पूरा मामला अब Balrampur illegal mazar demolition के नाम से प्रदेशभर में चर्चा का मुद्दा बना हुआ है।
2013 में पूर्व विधायक पर लगा गंभीर आरोप—थाना परिसर की भूमि पर अवैध कब्जे की साजिश
जांच व अभिलेखों के अनुसार थाना सादुल्लानगर के गाटा संख्या 696, रकबा 2.16 एकड़ की भूमि सरकारी तौर पर दशकों से पुलिस के नाम दर्ज थी।
लेकिन वर्ष 2013 में समाजवादी पार्टी के तत्कालीन विधायक आरिफ अनवर हाशमी पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इस सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की।
आरोपों के अनुसार—
उनकी साजिश के तहत जमीन का अवैध नामांतरण किया गया
0.18 एकड़ भूमि पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर इसे “मजार शरीफ बाबा सहीदे मिल्लत अब्दुल कुद्दूश शाह रहमतुल्लाह अलैह” के नाम दर्ज कराया गया
उनके भाई मारूफ अनवर हाशमी को ‘मजार प्रबंधक’ बताया गया
इसके बाद भूमि पर भव्य मजार का निर्माण करा दिया गया
यह कदम न केवल गैरकानूनी था बल्कि सरकारी जमीन को लंबे समय तक कब्जे में रखने का प्रयास माना गया।
थानाध्यक्ष की शिकायत बनी turning point—2013 का नामांतरण 2024 में निरस्त हुआ
मामले की जानकारी मिलते ही तत्कालीन थानाध्यक्ष ने कानूनी लड़ाई शुरू की।
प्रभावी पैरवी के चलते 19 मार्च 2024 को उपजिलाधिकारी उतरौला ने बड़ा आदेश जारी करते हुए—
2013 में किया गया अवैध नामांतरण रद्द कर दिया
गाटा संख्या 696 को पुनः थाना सादुल्लानगर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया
यह आदेश 12 साल से जमीन कब्जाए बैठे भूमाफियाओं के लिए बड़ा झटका था।
फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी जमीन कब्जाने पर मुकदमा—गैंगस्टर एक्ट तक लगा
नामांतरण निरस्त होने के बाद 2024 में थानाध्यक्ष सादुल्लानगर ने गंभीर कार्रवाई शुरू की।
पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी, उनके भाई मारूफ और सहयोगियों पर दर्ज हुए गंभीर मुकदमे—
IPC 420 — धोखाधड़ी
IPC 467 — फर्जी दस्तावेज़
IPC 468 — जालसाजी
IPC 471 — फर्जी दस्तावेज़ का उपयोग
IPC 120B — आपराधिक साजिश
गैंगस्टर एक्ट 2/3 — संगठित अपराध
स्पष्ट था कि प्रशासन ने इस मामले को सामान्य अवैध कब्जा नहीं, बल्कि संगठित भूमि माफिया गतिविधि मानकर कार्रवाई की।
मजार समिति की अपील भी खारिज—आयुक्त देवीपाटन मंडल ने सुनवाई के बाद वाद निरस्त किया
अवैध कब्जा और नामांतरण रद्द होने के बाद आरोपी पक्ष की ओर से खुद को “मजार समिति” बताकर आयुक्त देवीपाटन मंडल में अपील दायर की गई।
लेकिन थानाध्यक्ष की ठोस पैरवी और अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर—
28 नवंबर 2025 को आयुक्त ने अपील को पूरी तरह निरस्त कर दिया
सभी स्थगन आदेश वापस ले लिए गए
फाइल को अवर न्यायालय भेज दिया गया
कानूनी रूप से भूमि अब बिना किसी विवाद के सरकार की घोषित हो चुकी थी।
तहसीलदार ने बेदखली और क्षतिपूर्ति का आदेश दिया—विरोधी पक्ष अनुपस्थित रहा
न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद थानाध्यक्ष ने अवैध निर्माण हटाने हेतु तहसीलदार उतरौला को प्रार्थना पत्र दिया।
इसके आधार पर—
28 नवंबर 2025 को बेदखली व क्षतिपूर्ति का आदेश जारी हुआ
आरोपियों को नोटिस देकर दो दिन का समय दिया गया
लेकिन किसी ने आदेश का पालन नहीं किया
इससे प्रशासन को कड़ी कार्रवाई का रास्ता अपनाना पड़ा।
1 दिसंबर 2025—बुलडोज़र की गर्जना, मजार हुआ जमींदोज़, मलबा तालाब में दफन
राजस्व और पुलिस टीम की संयुक्त मौजूदगी में 1 दिसंबर को Balrampur illegal mazar demolition को अमल में लाया गया।
भारी पुलिस बल
जेसीबी/बुलडोज़र
राजस्व अधिकारी
मलबे की सरकारी निगरानी
कुछ ही घंटों में अवैध रूप से बनी पूरी संरचना ध्वस्त कर दी गई।
मलबे को पास के सरकारी तालाब में दफन कराया गया ताकि दोबारा कोई निर्माण न हो सके।
इसके साथ ही 12 वर्षों से कब्जाई गई थाना भूमि को पूर्ण रूप से प्रशासन ने अपने नियंत्रण में वापस ले लिया।
ज़ीरो टॉलरेंस की मिसाल—जिले में भूमाफियाओं को स्पष्ट संदेश
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश की ज़ीरो टॉलरेंस नीति का सबसे प्रत्यक्ष उदाहरण मानी जा रही है।
प्रशासन और पुलिस दोनों स्तरों पर यह स्पष्ट संदेश है कि—
सरकारी भूमि पर कब्जा बर्दाश्त नहीं होगा
फर्जी दस्तावेज़ बनाने वालों पर कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज होगा
राजनीतिक प्रभाव पर भी कानून की कार्रवाई प्राथमिक रहेगी
जिले में इसे वर्षों की सबसे निर्णायक कार्रवाई माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों में संतोष—लंबे विवाद का अंत, थाना परिसर अब पूरी तरह सुरक्षित
आसपास के ग्रामीणों व क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन की कार्रवाई की सराहना की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मजार बन जाने के बाद वर्षों से यह भूमि विवादित हो चुकी थी और थाना परिसर की सुरक्षा तथा सरकारी कामकाज पर भी असर पड़ रहा था।
अब जमीन मुक्त होने के बाद क्षेत्र में व्यवस्था और सुरक्षा दोनों मजबूत होने की उम्मीद है।

