संपादकीय विशेषMuzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

कोरोना की बंदिश के कारण दूधली की ऐतिहासिक म्हाड़ी पर मेला नहीं सजेगा

चरथावल। कोरोना की बंदिश के कारण दूधली की ऐतिहासिक म्हाड़ी पर मेला नहीं सजेगा। करीब पांच सौ साल से लगने वाले मेला ग्रामीणों की याद में पहली बार स्थगित रहेगा। विभिन्न प्रांतों के लाखों श्रद्धालुओं को इस बार २० अगस्त में लगने वाले मेले में गोगा म्हाड़ी पर दर्शन नहीं करने का मलाल रहेगा।

कोविड महामारी धार्मिक परंपराओं के लिए इतिहास बन गई है। दूधली गांव स्थित जाहरवीर गोगा माढ़ी की मान्यता राजस्थान के बागड़ के बाद मानी जाती हैं।

मान्यता है कि करीब पांच सौ साल पहले इस गांव के मजरे मरूवा आलमगीरपुर निवासी किसान भक्त की मन्नत पूरी हुई, तो वह आस्था में वशीभूत होकर अपने यहां जन्मे बछेरे को पैदल बागड़ (राजस्थान) में जाहरवीर को अर्पित करने पहुंच गया। जाहरवीर को खुद प्रकट होने पर ही उसने बछेरा भेंट करने का संकल्प लिया था।

मान्यता है कि भक्ति से प्रसन्न होकर जाहरवीर ने खुद प्रकट होकर बछेरा लिया और भक्त किसान को गांव में माढ़ी बनाने को पांच ईट प्रदान की थीं। बुजुर्ग महेंद्र सिंह बताते है कि उस वक्त गोगा ने किसान को वचन दिया था कि यदि ईट कहीं भी रख दोंगे, तो वहां से उठेगी नहीं।

लेकिन किसान गोगा के वादे को भूल गया और थकावट के कारण दूधली में हुक्का पीने की खातिर ईटों की चद्दर रख दी। उसके बाद वहां से ईंट नहीं उठी और वहीं म्हाड़ी बनानी पड़ी थी।

म्हाड़ी की महिमा कई प्रांतों में विख्यात है। तभी से गांव में मेला लगता आ रहा है। हर साल भादों में भव्य मेला सजता है। इस बार मेला की तिथि २० अगस्त तय थी।

इस बार मेले में उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड़, राजस्थान तक के लाखों श्रद्धालुओं के नहीं आने का मलाल है। – ग्राम प्रधान के पति रविंद्र पुंडीर बताते है कई पीढ़ियों के मुताबिक करीब पांच सौ साल से लगते आ रहा मेला इस बार नहीं लगने का हर किसी को मलाल है।

दूर प्रांतों में रिश्तेदारियों में इस बार मेला नहीं लगने की खबर भेजी जा रही है। – भाजपा मंडल अध्यक्ष विकास आर्य ने बताया कि म्हाड़ी की मान्यता पूरे भारत में है।

गांव में हर परिवार में मेले से कई दिन पहले उत्सव सा नजारा रहता था। कोविड से बचाव के कारण मेले के लिए दूरदराज से आने वाले सर्कस, झूले और दुकान वाले नहीं आए है।

Editorial Desk

संपादकीय टीम अनुभवी पेशेवरों का एक विविध समूह है, जो मीडिया उत्कृष्टता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्ध है। अकादमिक, पत्रकारिता, कानून और स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता के साथ, प्रत्येक सदस्य अद्वितीय दृष्टिकोण और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री प्रदान करने के प्रति जुनून लाता है। टीम में वरिष्ठ संपादक, लेखक और विषय विशेषज्ञ शामिल हैं, जो व्यापक, समयबद्ध और आकर्षक लेख सुनिश्चित करते हैं। सार्थक वार्तालापों को बढ़ावा देने और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाने के लिए समर्पित, टीम समाज को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर पाठकों को अच्छी तरह से सूचित रखती है।

Editorial Desk has 430 posts and counting. See all posts by Editorial Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

eleven + eleven =