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धुबरी हिंसा पर Himanta Biswa Sarma का बड़ा एक्शन: उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश, बांग्लादेशी साजिश बेनकाब!

असम के सीमावर्ती ज़िले धुबरी में एक छोटी सी घटना ने राज्य में साम्प्रदायिक तनाव की आग को भड़का दिया। 7 जून को बकरीद के तुरंत बाद हनुमान मंदिर के बाहर मांस का टुकड़ा मिलने से जनाक्रोश भड़क उठा। इसके बाद राज्य में हालात बिगड़ने लगे और लोगों ने सड़कों पर उतरकर जमकर प्रदर्शन किया। इस संवेदनशील घटना के बाद असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने बिना किसी देरी के स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बड़ा फैसला लिया—धुबरी ज़िले में उपद्रवियों के लिए “देखते ही गोली मारने” के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

बांग्लादेश सीमा से सटी असम की ज़मीन पर साजिश का खेल

मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने अपने दौरे में बेहद चिंताजनक खुलासा किया। उन्होंने कहा कि राज्य की सीमा से लगे बांग्लादेशी तत्व और उनके समर्थक असम में अस्थिरता फैलाने की योजना बना रहे हैं। धुबरी, जो बांग्लादेश सीमा से सटा हुआ है, वहां के हालात सामान्य नहीं हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।

“अगर रात को कोई उपद्रवी मिला, तो उसी जगह पर गोली मार दी जाए”—सीएम सरमा का सख्त निर्देश

सरमा ने सुरक्षा बलों को आदेश दिया है कि यदि कोई व्यक्ति रात के समय संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाया जाता है या क्षेत्र में माहौल खराब करने की कोशिश करता है, तो उसे बिना किसी चेतावनी के गोली मार दी जाए। यह फैसला राज्य की शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लिया गया है और सीएम ने साफ किया कि यह कोई दिखावा नहीं बल्कि एक सख्त क्रियान्वयन है।

धार्मिक भावना को चोट पहुंचाने वाली घटना ने बढ़ाया तनाव

बकरीद के दूसरे दिन, यानी 7 जून को मंदिर के बाहर गाय का कटा हुआ सिर मिलना सिर्फ एक धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने की घटना नहीं थी, बल्कि यह एक बड़ी साजिश का संकेत था। इस घटना के तुरंत बाद दो समुदायों के बीच तनाव बढ़ गया, और सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो गया। स्थिति को देखते हुए धुबरी में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, साथ ही केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की भी तैनाती की गई है।

नबीन बांग्ला संगठन के पोस्टर से सामने आई बांग्लादेशी साजिश

सरमा ने यह भी बताया कि एक संगठन—“नबीन बांग्ला”—ने धुबरी में एक पोस्टर लगाया, जिसमें लिखा गया था कि धुबरी को बांग्लादेश का हिस्सा बना देना चाहिए। यह पोस्टर बकरीद के अगले दिन लगाया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सब कुछ सुनियोजित साजिश के तहत किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे भारत की अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ साज़िश करार दिया।

सख्त कार्रवाई का भरोसा, आरोपियों की गिरफ्तारी के आदेश

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा है कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों को जल्द ही गिरफ़्तार किया जाएगा। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस साजिश में शामिल हर एक व्यक्ति की पहचान कर सख्त से सख्त सज़ा दी जाए। सीएम ने लोगों से भी अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और राज्य सरकार के साथ सहयोग करें

सीआरपीएफ की तैनाती और हाई अलर्ट: धुबरी बना सुरक्षा का गढ़

धुबरी में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है। शहर में जगह-जगह पुलिस बैरिकेडिंग, ड्रोन निगरानी, और पैदल गश्त हो रही है। CRPF के जवानों को हर संवेदनशील इलाके में तैनात किया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि धुबरी को दूसरे किसी भी “कश्मीर” की तरह नहीं बनने दिया जाएगा।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी तेज, विपक्ष ने मांगी जांच

इस घटना के बाद राज्य के विपक्षी दलों ने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, लेकिन मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य की अखंडता से समझौता करने वालों के लिए किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वालों को नहीं मिलेगी जगह—सीएम

सरमा ने सभी धर्मों के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह वक्त एकजुटता दिखाने का है, ना कि नफरत फैलाने का। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर उस व्यक्ति के साथ है जो शांति और सौहार्द चाहता है, लेकिन जो भी हिंसा फैलाने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

धुबरी की जनता से मुख्यमंत्री की मार्मिक अपील

मुख्यमंत्री ने धुबरी के निवासियों से भावुक अपील की—“आपका शहर, आपका राज्य, आपकी जिम्मेदारी है। धर्म के नाम पर कोई अगर आपको तोड़ने आए, तो समझ जाइए कि वो दुश्मन है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह समय नफरत को नहीं, समझदारी को चुनने का है।


ध्यान देने योग्य बात यह है कि असम सरकार अब अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। धुबरी जैसी संवेदनशील जगह पर यदि कोई उपद्रवी, विशेषकर रात के समय, संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ गोली चलाने का आदेश अब केवल बयान नहीं, एक सख्त नीति बन चुकी है। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि अब असम में देशविरोधी तत्वों के लिए कोई जगह नहीं बची है।

 

News-Desk

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