Ranji Trophy में इतिहास रचा: जम्मू-कश्मीर ने दिल्ली को हराया, आकिब नबी और कामरान इकबाल बने हीरो – मैदान पर गूंजा ‘कश्मीर का जश्न’!
जम्मू-कश्मीर ने Ranji Trophy के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। क्रिकेट के इस प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट में पहली बार जम्मू-कश्मीर ने दिल्ली जैसी दिग्गज टीम को 7 विकेट से पराजित कर दिया। यह जीत सिर्फ एक मुकाबला नहीं, बल्कि उन दशकों के संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की जीत है जो इस टीम ने अपने खेल में झोंक दिया।
आकिब नबी का कहर: 35 रन पर 5 विकेट
इस मुकाबले में जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी ने कमाल कर दिया। उन्होंने दिल्ली की पहली पारी को मात्र 211 रनों पर रोकने में अहम भूमिका निभाई। नबी ने घातक स्पेल में 35 रन देकर 5 विकेट झटके। उनकी स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ के आगे दिल्ली के अनुभवी बल्लेबाज टिक नहीं पाए। इस स्पेल को रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सीजन के बेहतरीन प्रदर्शन में गिना जा रहा है।
कप्तान पारस डोगरा का शतक और टीम की मजबूत पारी
जवाब में जम्मू-कश्मीर की टीम ने अपने कप्तान पारस डोगरा की अगुवाई में शानदार बल्लेबाजी की। डोगरा ने सधी हुई 106 रनों की पारी खेली। उनके साथ अब्दुल समद ने आक्रामक 85 रन जोड़कर दिल्ली पर दबाव बना दिया। टीम ने 310 रन बनाकर पहली पारी में 99 रनों की बढ़त हासिल की, जिसने मुकाबले की दिशा तय कर दी।
दिल्ली की वापसी की कोशिश और वंशज शर्मा का धमाका
दूसरी पारी में दिल्ली ने कप्तान आयुष बडोनी के 72 रनों की बदौलत 277 रन बनाए, जिससे जम्मू-कश्मीर को 179 रनों का लक्ष्य मिला। लेकिन यह बढ़त भी वंशज शर्मा के सामने फीकी साबित हुई। शर्मा ने 68 रन देकर 6 विकेट लेकर दिल्ली की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया। उनकी स्पिन और वैरिएशन के आगे दिल्ली के बल्लेबाज एक-एक कर पवेलियन लौटते गए।
कामरान इकबाल का नाबाद शतक – जीत का सूत्रधार
अंतिम दिन का नायक बने कामरान इकबाल, जिन्होंने 133 रनों की नाबाद पारी खेलकर जम्मू-कश्मीर को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनके बल्ले से चौकों-छक्कों की बरसात ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर शॉट में आत्मविश्वास और धैर्य का संगम दिखाई दिया। यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि उस मेहनत का प्रतीक थी जो इस टीम ने वर्षों तक लगाई थी।
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट की नई पहचान
यह जीत जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक मोड़ है। 1960 में पहली बार रणजी ट्रॉफी खेलने वाली यह टीम अब दिल्ली जैसी मजबूत टीम को हरा चुकी है। खिलाड़ियों का आत्मविश्वास, घरेलू कोचिंग की गुणवत्ता और युवा ऊर्जा इस जीत के पीछे के प्रमुख कारण रहे हैं। अब यह टीम आने वाले सीजन में एक नई पहचान के साथ मैदान में उतरेगी।
दिल्ली के बल्लेबाजों की नाकामी – बडोनी अकेले लड़े
दिल्ली की ओर से कप्तान आयुष बडोनी ने पहली पारी में 64 और दूसरी पारी में 72 रन बनाए। हर्षित दोसेजा ने 65 रन जोड़े। लेकिन मिडल ऑर्डर और लोअर ऑर्डर पूरी तरह विफल रहा। टीम का बैटिंग लाइन-अप वंशज शर्मा और आकिब नबी के सामने टिक नहीं पाया।
मध्यप्रदेश ने गोवा को हराया – रोमांचक मुकाबले का अंत
इसी राउंड के एक अन्य मैच में मध्यप्रदेश ने गोवा को 3 विकेट से हराया। गोवा ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 284 रन बनाए, जबकि एमपी की पहली पारी मात्र 187 रनों पर सिमट गई। दूसरी पारी में गोवा ने 230 रन बनाए और 328 का लक्ष्य दिया। अंतिम दिन हर्ष ग्वाली, शुभम शर्मा और सारांश जैन की बेहतरीन पारियों से मध्यप्रदेश ने रोमांचक जीत हासिल की।
सारांश जैन बने हीरो – बल्ले और गेंद दोनों से चमके
सारांश जैन ने इस मैच में ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए 6 विकेट लिए और कुल 130 रन बनाए। दूसरी पारी में उनकी नाबाद 82 रनों की पारी ने टीम को जीत की राह पर ला खड़ा किया। उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का खिताब मिला। गोवा की ओर से सुयश प्रभुदेसाई और अभिनव तेजराणा ने क्रमशः 65 और 69 रन बनाए, जबकि अर्जुन तेंदुलकर ने गेंदबाजी में 3 विकेट लिए।
रणजी ट्रॉफी 2025 में उभरती नई कहानियाँ
इस सीजन में कई छोटे राज्यों ने अपने खेल से सबको चौंकाया है। जम्मू-कश्मीर, मिज़ोरम, और मेघालय जैसी टीमें अब बड़ी टीमों को चुनौती दे रही हैं। रणजी ट्रॉफी का यह संस्करण भारतीय घरेलू क्रिकेट के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और प्रदर्शन यह दिखा रहा है कि अब क्रिकेट केवल मेट्रो सिटीज़ तक सीमित नहीं रहा।
जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों की प्रेरक कहानी
कामरान इकबाल, आकिब नबी, अब्दुल समद, और वंशज शर्मा जैसे खिलाड़ी उस नई पीढ़ी का प्रतीक हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल पेश कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों ने अपने संघर्ष और मेहनत से क्रिकेट के मैदान पर उम्मीदों की नई रोशनी फैलाई है।
रणजी ट्रॉफी में दिल्ली की गिरती स्थिति
दिल्ली की टीम, जो कभी रणजी की दिग्गज हुआ करती थी, अब लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रही है। चयन में अस्थिरता, युवा खिलाड़ियों पर भरोसे की कमी और रणनीतिक गलतियाँ इसकी बड़ी वजह मानी जा रही हैं। इस हार के बाद दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर टीम को फिर से विजेता बनाने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।

