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India Maldives संबंध: राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की यात्रा और द्विपक्षीय रिश्तों की नई दिशा

India Maldives संबंध मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और उनकी पत्नी 5 दिनों की राजकीय यात्रा पर रविवार को भारत पहुंचे। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य पिछले साल से भारत और मालदीव के बीच जारी तनाव को समाप्त कर द्विपक्षीय संबंधों को फिर से सशक्त बनाना है। मालदीव के राष्ट्रपति के आगमन पर नई दिल्ली के हवाई अड्डे पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी दी और कहा, “मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू का भारत की राजकीय यात्रा पर नई दिल्ली में हार्दिक स्वागत किया गया।”

यह यात्रा 10 अक्टूबर तक चलेगी और इस दौरान मुइज्जू भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस यात्रा में दोनों देशों के बीच आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, मुइज्जू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात कर सकते हैं। दिल्ली के बाद, मुइज्जू मुंबई और बेंगलुरु का दौरा करेंगे, जहां वह औद्योगिक समारोहों में भाग लेंगे।

द्विपक्षीय संबंधों में तनाव की पृष्ठभूमि

मालदीव और भारत के बीच रिश्ते पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण रहे हैं। नवंबर 2023 में मुइज्जू ने राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभाला और शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने मालदीव में तैनात भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी की मांग की। इस मांग के बाद, दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। हालांकि, भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी के बाद उनके स्थान पर नागरिकों ने जिम्मेदारी संभाली।

मालदीव के राष्ट्रपति का चीन की ओर झुकाव उनके सत्ता में आने के बाद से स्पष्ट हो चुका है। मुइज्जू ने कई मौकों पर चीन के साथ बेहतर संबंधों की ओर इशारा किया है, जिससे भारत और मालदीव के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौतियां और बढ़ गई हैं। हालांकि, भारत और मालदीव के बीच ऐतिहासिक रूप से मजबूत रिश्ते रहे हैं, और यह यात्रा इन रिश्तों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

ऐतिहासिक संबंध और मौजूदा चुनौतियां

भारत और मालदीव के बीच संबंध हमेशा से घनिष्ठ रहे हैं। दोनों देश एक दूसरे के प्राकृतिक और सामरिक सहयोगी माने जाते हैं। भारत ने मालदीव की सुरक्षा, स्वास्थ्य और विकास के लिए समय-समय पर सहायता प्रदान की है। 1988 में जब मालदीव में तख्तापलट की कोशिश की गई थी, तब भारत ने “ऑपरेशन कैक्टस” के तहत मालदीव सरकार की मदद की थी। इसके बाद से दोनों देशों के बीच रिश्ते और भी प्रगाढ़ हो गए थे।

हालांकि, मुइज्जू की सरकार बनने के बाद से भारत और मालदीव के संबंधों में कुछ नए मोड़ आए हैं। मुइज्जू ने अपने राष्ट्रपति पद के शुरुआती चरणों में ही चीन के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने की दिशा में संकेत दिए। चीन और मालदीव के बीच बढ़ते संबंधों को देखते हुए भारत को अपनी विदेश नीति को नए सिरे से परिभाषित करना पड़ा।

इस तनाव का मुख्य कारण मुइज्जू की भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी की मांग थी। यह कदम मालदीव के राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों को लेकर उठाया गया, लेकिन भारत ने इसे अपने कूटनीतिक प्रयासों को प्रभावित करने वाला कदम माना। भारत हमेशा से मालदीव के साथ अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने में रुचि रखता आया है, ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखा जा सके।

आर्थिक सहयोग और पर्यटन क्षेत्र में संभावनाएं

भारत और मालदीव के बीच केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आर्थिक सहयोग भी गहरा है। मालदीव की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पर्यटन पर निर्भर करता है, और भारतीय पर्यटक इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाते हैं। भारत और मालदीव के बीच पर्यटन उद्योग के अलावा भी अन्य व्यापारिक और औद्योगिक क्षेत्रों में गहरा सहयोग रहा है। मुइज्जू की इस यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों में भी आपसी सहयोग को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, मालदीव की स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में भी भारत की सहायता महत्वपूर्ण रही है। भारत ने मालदीव को दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति की है, खासकर COVID-19 महामारी के समय। इस यात्रा के दौरान स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में नए समझौते और सहयोग की योजनाओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।

क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद

भारत और मालदीव के बीच बातचीत का मुख्य मुद्दा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करते हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दे इस यात्रा के दौरान चर्चा का मुख्य बिंदु होंगे। मालदीव की भौगोलिक स्थिति इसे हिंद महासागर में एक प्रमुख रणनीतिक स्थान बनाती है, और भारत इसे अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

इस संदर्भ में, भारत का उद्देश्य मालदीव को चीन के बढ़ते प्रभाव से संतुलित करना है। मुइज्जू की चीन के प्रति नीतियों को देखते हुए, भारत और मालदीव के बीच सामरिक समझौतों पर पुनर्विचार हो सकता है।

भविष्य की संभावनाएं

मोहम्मद मुइज्जू की इस यात्रा से यह उम्मीद की जा रही है कि भारत और मालदीव के बीच संबंधों में नया मोड़ आएगा। मुइज्जू की सरकार ने अपने शुरुआती दिनों में कुछ कड़े फैसले लिए, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में दरार आ गई थी। हालांकि, यह यात्रा संकेत देती है कि दोनों देश अपने ऐतिहासिक रिश्तों को संवारने और एक नई शुरुआत करने के लिए तैयार हैं।

मालदीव के राष्ट्रपति की यह यात्रा एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहां दोनों देश अपने मतभेदों को दूर करके नई दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। व्यापार, सुरक्षा, शिक्षा, और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए यह समय सही है। अगर दोनों देश अपने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करें, तो भारत और मालदीव के बीच रिश्ते और भी मजबूत हो सकते हैं।

भारत और मालदीव के संबंधों की यह यात्रा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दोनों देशों को आपसी तनाव को खत्म करने और अपने द्विपक्षीय सहयोग को पुनर्जीवित करने का अवसर प्रदान करती है। मुइज्जू की सरकार ने भले ही शुरुआत में भारत के खिलाफ कुछ कड़े कदम उठाए हों, लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि दोनों देश अपने पुराने रिश्तों को पुनर्जीवित करने के लिए तैयार हैं। इस यात्रा के दौरान होने वाली बातचीत और समझौते दोनों देशों के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

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