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India-Pak Border पर तनाव के बीच देशभर में युद्ध सायरन मॉक ड्रिल, पहली बार इतने बड़े पैमाने पर अलर्ट

India-Pak Border/देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाया है। War Siren Mock Drill के तहत 7 मई को देशभर में एक साथ युद्ध सायरन बजाकर नागरिकों की सतर्कता और तैयारियों का परीक्षण किया जाएगा। भारत-पाकिस्तान सीमा पर हाल ही में बढ़े तनाव को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में आम जनता को युद्ध जैसे हालात से निपटने के लिए मानसिक और भौतिक रूप से तैयार किया जा सके।

इस पूरे मॉक ड्रिल का संचालन केंद्रीय गृह मंत्रालय के सख्त निर्देशों के तहत किया जा रहा है। इसमें देश के 244 चिन्हित सिविल डिफेंस जिलों को शामिल किया गया है, जिनमें महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात जैसे संवेदनशील राज्य प्रमुख रूप से शामिल हैं।


मुंबई से श्रीनगर तक गूंजेगा युद्ध सायरन

7 मई को मुंबई के दादर स्थित एंटनी डिसिल्वा हाई स्कूल में युद्ध सायरन बजाकर मॉक ड्रिल की शुरुआत की गई। यह सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि इस बड़े पैमाने पर हो रही तैयारी की प्रतीक है। स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर बच्चों और अभिभावकों को सायरन की ध्वनि और उसकी प्रक्रिया से अवगत कराया। लोगों को सिखाया गया कि सायरन बजने पर क्या करना है, कहां जाना है और किन गलतियों से बचना है।

दूसरी ओर श्रीनगर की डल झील के किनारे सुरक्षा एजेंसियों ने खास रणनीति के तहत मॉक ड्रिल की रूपरेखा तैयार की है। घाटी में तनाव के हालात को देखते हुए इस ड्रिल को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। घाटी में सेना और अर्धसैनिक बलों ने नागरिकों को ट्रेनिंग दी, जिससे वे हवाई हमले या अन्य आपात स्थिति में सही प्रतिक्रिया दे सकें।


जानिए क्या होता है War Siren और इसका उद्देश्य

युद्ध सायरन एक विशेष प्रकार का साउंड अलर्ट सिस्टम होता है जो युद्ध या हवाई हमले की आशंका के समय नागरिकों को चेतावनी देने के लिए बजाया जाता है। इसकी तीव्रता 120 से 140 डेसिबल तक होती है और यह 2 से 5 किलोमीटर तक की दूरी में सुनाई देता है।

इस सायरन का मुख्य उद्देश्य लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना होता है। ऐसे समय में घबराना नहीं, बल्कि सूझबूझ के साथ सही दिशा में कार्य करना बेहद आवश्यक होता है।


नागरिकों को दी जा रही है खास ट्रेनिंग

मॉक ड्रिल के माध्यम से आम नागरिकों को न सिर्फ सायरन की आवाज से परिचित कराया जा रहा है, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि ऐसी स्थिति में क्या करना है। निर्देश दिए गए हैं कि सायरन बजने पर—

  • खुले स्थानों को तुरंत खाली कर दें।

  • पास के सुरक्षित शेल्टर या मजबूत इमारत में शरण लें।

  • सरकारी निर्देशों और रेडियो, टीवी जैसे माध्यमों से जुड़े रहें।

  • अफवाहों से दूर रहें और सिर्फ प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर विश्वास करें।

यह अभियान नागरिकों को War Siren Mock Drill की गंभीरता और आवश्यकता से अवगत कराने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।


1971 के बाद पहली बार इतनी बड़ी तैयारी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉक ड्रिल 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद सबसे व्यापक नागरिक सुरक्षा अभ्यास है। उस युद्ध के दौरान भी कई बार सायरन बजाकर नागरिकों को अलर्ट किया गया था, लेकिन तब तकनीकी और संचार के साधन सीमित थे। आज, डिजिटल युग में जब मिसाइल और हवाई हमले चंद मिनटों में संभव हैं, तो इस तरह की तैयारियां और भी अहम हो जाती हैं।


अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर बढ़ी हलचल

हाल ही में पाकिस्तान की तरफ से कई बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया गया है। साथ ही सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों और ड्रोन मूवमेंट्स में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इन सबको देखते हुए भारत सरकार की यह तैयारी न केवल तार्किक है बल्कि राष्ट्रहित में एक निर्णायक कदम भी है।

बीएसएफ और इंडियन आर्मी के सूत्रों के अनुसार, सीमाई इलाकों में अब नियमित मॉक ड्रिल्स और रणनीतिक अलर्ट सिस्टम एक्टिवेट किया जा रहा है। यह न केवल आंतरिक सुरक्षा बलों को बल्कि सीमावर्ती गांवों के नागरिकों को भी जागरूक करने की दिशा में उठाया गया कदम है।


सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की भूमिका अहम

इस ड्रिल में सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की भूमिका भी बेहद अहम रही है। इन वॉलंटियर्स को पहले से ट्रेनिंग दी गई है और ये लोग जनता को सही दिशा में मार्गदर्शन दे रहे हैं। शहरों से लेकर गांवों तक, इन वॉलंटियर्स को सायरन एक्टिवेशन के समय मुस्तैदी से काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


आने वाले दिनों में और बढ़ेगा मॉक ड्रिल का दायरा

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में इस ड्रिल को और भी ज्यादा व्यापक रूप देने की योजना है। हर राज्य की राजधानी से लेकर प्रमुख कस्बों तक इसे ले जाया जाएगा ताकि हर नागरिक इस प्रक्रिया में शामिल हो और संभावित खतरे से समय रहते खुद को सुरक्षित कर सके।


अंत में: यह सिर्फ एक मॉक ड्रिल नहीं, एक चेतावनी है

War Siren Mock Drill एक संकेत है कि देश अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अब ज्यादा सजग और सक्रिय हो चुका है। यह अभ्यास न केवल जनता को जागरूक करता है, बल्कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों की भी परीक्षा लेता है। जब सीमाओं पर खतरे मंडरा रहे हों, तब घर-घर में जागरूकता फैलाना ही सबसे प्रभावी हथियार है।

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