Iran US Saudi Airbase Attack: सऊदी में अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल-ड्रोन हमला, AWACS विमान क्षतिग्रस्त; होर्मुज से गुजरते LPG टैंकरों को भारतीय नौसेना की सुरक्षा
Iran US Saudi Airbase Attack ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ईरान की ओर से दावा किया गया है कि उसने सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इस हमले में अमेरिका के उन्नत सैन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है, जिसमें एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) का हिस्सा बोइंग E-3 सेंट्री विमान भी शामिल बताया गया है।
हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अभी तक इस नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
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Iranian हमलों के बाद Prince Sultan Air Base पर US Air Force का एक विमान पूरी तरह तबाह होने की रिपोर्ट।
हमले से बेस पर नुकसान की पुष्टि, क्षेत्र में तनाव और बढ़ा।#Iran #USAirForce #MiddleEast #BreakingNews pic.twitter.com/LdBBTdNij0
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प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला, 10 से 15 अमेरिकी सैनिक घायल होने का दावा
Iran US Saudi Airbase Attack के दौरान ईरान ने कथित तौर पर 6 बैलिस्टिक मिसाइलें और 29 ड्रोन दागे। रिपोर्टों में कहा गया कि इस हमले में 10 से 15 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई है।
यह एयरबेस रियाद से लगभग 96 किलोमीटर दूर स्थित है और इसे सऊदी एयर फोर्स संचालित करती है, हालांकि यहां अमेरिकी सेना की भी महत्वपूर्ण तैनाती रहती है। पिछले कुछ समय से जारी क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान इस बेस को कई बार निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आती रही हैं।
AWACS विमान को नुकसान, अमेरिकी निगरानी क्षमता पर असर की आशंका
हमले में जिस बोइंग E-3 सेंट्री विमान के क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है, वह आधुनिक युद्ध में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह विमान सैकड़ों किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमानों और मिसाइलों की निगरानी करने में सक्षम होता है।
रिपोर्टों के अनुसार इस तरह के विमान अमेरिका के पास सीमित संख्या में ही उपलब्ध हैं और इसकी कीमत लगभग 700 मिलियन डॉलर से अधिक बताई जाती है। ऐसे विमान को नुकसान पहुंचना सामरिक दृष्टि से बड़ी घटना माना जा रहा है।
कुवैत में बिजली और पानी संयंत्र पर हमला, भारतीय नागरिक की मौत
Iran US Saudi Airbase Attack के बीच क्षेत्र में अन्य हमलों की भी खबरें सामने आई हैं। कुवैत के दक्षिणी हिस्से में बिजली उत्पादन और पानी के डीसैलीनेशन प्लांट को निशाना बनाए जाने के बाद एक भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि हुई है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार हमले के बाद संयंत्र परिसर में आग लग गई और आपातकालीन टीमों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। इससे पहले भी कुवैत के हवाई क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों का पता चल चुका था।
होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकले भारत के LPG टैंकर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर यह रही कि LPG से लदे दो बड़े टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इन जहाजों—BW TYR और BW ELM—पर लगभग 94 हजार मीट्रिक टन LPG लदी हुई है।
भारतीय नौसेना की सुरक्षा में यह जहाज भारत की ओर बढ़ रहे हैं और इसी सप्ताह मुंबई पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले चार अन्य भारतीय झंडे वाले टैंकर भी इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर चुके हैं।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रम्प की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि यदि ईरान इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की कोशिश करता है, तो अमेरिका तुरंत जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका बहुत कम समय में इस समुद्री रास्ते को नियंत्रित कर सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
खोंदाब हैवी वाटर प्लांट बंद होने की पुष्टि
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने जानकारी दी है कि ईरान का खोंदाब हैवी वाटर प्रोडक्शन प्लांट 27 मार्च को हुए हमले के बाद काम करना बंद कर चुका है। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इस संयंत्र में परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी।
इस घटनाक्रम को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पड़े प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।
खार्ग द्वीप पर कब्जे के विकल्प पर भी विचार
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी नेतृत्व ईरान के खार्ग द्वीप को लेकर भी रणनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहा है। यह द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है, जहां से लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र पर नियंत्रण से ईरान की आर्थिक क्षमता पर सीधा असर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रयास भी तेज
क्षेत्रीय तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने इस संघर्ष को समाप्त करने के संभावित उपायों पर चर्चा की है। इन देशों ने माना कि युद्ध किसी भी पक्ष के हित में नहीं है और स्थायी समाधान केवल संवाद के माध्यम से ही संभव है।
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता की मेजबानी करने की पेशकश भी की है।
तेहरान में विस्फोट और उत्तरी इजराइल पर रॉकेट हमलों की खबर
क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में जोरदार धमाके की आवाज सुने जाने की खबर सामने आई है, हालांकि नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं लेबनान के सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजराइल के मेटुला शहर पर रॉकेट हमलों का दावा किया है।
इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना दिया है।
वैश्विक बाजारों पर भी दिखा असर
ईरान से जुड़े तनाव का असर एशियाई शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। जापान के निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

