उत्तर प्रदेश

Kanpur किडनी रैकेट का बड़ा खुलासा: मेरठ से दिल्ली तक फैला नेटवर्क, मौत की रिकॉर्डिंग से खुली साजिश की परतें

Kanpur Kidney Racket ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली के चिकित्सा तंत्र को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले गिरोह का नेटवर्क कानपुर से निकलकर मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली, प्रयागराज और वाराणसी तक फैला हुआ था। इस संगठित रैकेट के तार कई निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और जरूरतमंद मरीजों तथा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाकर किडनी ट्रांसप्लांट का अवैध कारोबार चलाया जा रहा था। इस पूरे मामले में कई नए नाम सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और तेज कर दी गई है।


जेल भेजे गए शिवम अग्रवाल के मोबाइल से खुली बड़ी साजिश

Kanpur Kidney Racket की जांच के दौरान पुलिस को आहूजा अस्पताल के स्टाफ सदस्य शिवम अग्रवाल के मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण रिकॉर्डिंग मिली है। इसी रिकॉर्डिंग ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी।

रिकॉर्डिंग में शिवम अग्रवाल की बातचीत प्रयागराज के एक नर्सिंग होम में काम करने वाले नवीन पांडेय से हो रही थी। बातचीत के दौरान एक महिला मरीज की मौत का जिक्र सामने आया, जिसे दिल्ली के द्वारका स्थित एक बड़े अस्पताल में भेजा गया था। रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया था।

इस बातचीत में शिवम अग्रवाल नवीन पांडेय से कहता सुनाई दिया कि वह रोहित नाम के व्यक्ति से कहे कि वह परिजनों को “मैनेज” कर ले। इस रिकॉर्डिंग ने जांच एजेंसियों को पूरे नेटवर्क की गंभीरता का एहसास कराया।


प्रयागराज और वाराणसी में छापेमारी की तैयारी, नवीन पांडेय की तलाश तेज

Kanpur Kidney Racket से जुड़े एक अहम संदिग्ध के रूप में नवीन पांडेय का नाम सामने आने के बाद पुलिस टीमों को प्रयागराज और वाराणसी रवाना किया गया है। जांच एजेंसियों को शक है कि वह इस अवैध नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है।

डीसीपी पश्चिम MM Qasim Abidi ने बताया कि मामले में शामिल आरोपियों की जड़ें काफी गहरी हैं और प्रदेश के कई शहरों में इनके सहयोगियों के सक्रिय होने की संभावना है। इसी वजह से जांच कई जिलों तक फैलाई गई है।


कई शहरों में फैले गुर्गों की तलाश, पुलिस की जांच का दायरा बढ़ा

पुलिस को आशंका है कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग शहरों में सक्रिय थे और जरूरत पड़ने पर मरीजों तथा डोनरों को एक शहर से दूसरे शहर भेजा जाता था। जांच के दौरान मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में भी संपर्क सूत्रों की पहचान की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक यह गिरोह मरीजों को भरोसे में लेकर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को वैध बताता था, जबकि पर्दे के पीछे फर्जी दस्तावेजों और गलत पहचान के आधार पर अवैध ऑपरेशन कराए जाते थे।


मौत की घटना ने खोली पूरे नेटवर्क की परतें

जांच में सामने आई महिला मरीज की मौत इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बनकर उभरी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि महिला को किस परिस्थिति में दिल्ली भेजा गया था और ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।

रिकॉर्डिंग में परिजनों को “मैनेज” करने की बात सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक मामला नहीं, बल्कि संगठित अवैध मेडिकल नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।


अस्पतालों और नर्सिंग होम की भूमिका भी जांच के दायरे में

Kanpur Kidney Racket की जांच अब केवल दलालों या मध्यस्थों तक सीमित नहीं रही है। पुलिस उन अस्पतालों और नर्सिंग होम की भूमिका भी खंगाल रही है जहां संदिग्ध मरीजों को भर्ती कराया गया था।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ स्वास्थ्य संस्थानों के कर्मचारी इस नेटवर्क को लॉजिस्टिक सपोर्ट दे रहे थे। मरीजों को दूसरे शहर भेजने, दस्तावेज तैयार करने और ट्रांसप्लांट प्रक्रिया के समन्वय में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।


गरीब और जरूरतमंद लोगों को बनाया जाता था निशाना

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लालच देकर या दबाव बनाकर किडनी डोनर बनने के लिए तैयार करता था। कई मामलों में डोनरों को पूरी जानकारी तक नहीं दी जाती थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क अक्सर बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाते हैं, जिससे अवैध अंग व्यापार का दायरा तेजी से फैलता है।


दिल्ली तक फैले संपर्क, कई और गिरफ्तारियों की संभावना

जांच के दौरान दिल्ली के द्वारका स्थित अस्पताल तक मरीज भेजे जाने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने राजधानी से जुड़े संपर्कों की भी पड़ताल शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क में कई और लोग शामिल हो सकते हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। मोबाइल रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल्स और वित्तीय लेनदेन की जांच तेजी से की जा रही है।


स्वास्थ्य तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

Kanpur Kidney Racket के खुलासे के बाद प्रदेश में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे नेटवर्क की पहचान हो जाए तो कई निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती है।

प्रशासन अब ट्रांसप्लांट प्रक्रियाओं की निगरानी को और सख्त करने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।


कानपुर किडनी रैकेट का खुलासा उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र और कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है। कई शहरों में फैले इस नेटवर्क की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, जांच एजेंसियां और अधिक सतर्कता के साथ कार्रवाई कर रही हैं ताकि अवैध अंग प्रत्यारोपण के इस संगठित खेल को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।

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