KGMU Nurse Rules: लखनऊ अस्पताल में नर्सों के लिए कड़े नियम लागू, नेल पॉलिश और भारी गहनों पर प्रतिबंध
KGMU Nurse Rules/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) ने नर्सिंग अधिकारियों के लिए एक नया और कड़ा नियमावली लागू की है। इस नियमावली के तहत नर्सों को ड्यूटी के दौरान नेल पॉलिश लगाने और भारी गहने पहनने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। यह कदम अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुरक्षा, स्वच्छता और देखभाल की गुणवत्ता को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया है।
केजीएमयू ने नर्सों के लिए पहली बार नर्सिंग मैनुअल तैयार किया है, जिसमें नर्सिंग अधिकारियों के दायित्व, अधिकार और ड्यूटी संबंधी नियम विस्तार से दर्ज किए गए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इससे न केवल नर्सिंग प्रणाली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए भी सेवा प्रक्रिया सरल और स्पष्ट होगी।
केजीएमयू नर्सिंग मैनुअल: पहली बार लागू हुआ दस्तावेज़
केजीएमयू नर्सिंग मैनुअल के लागू होने से पहले किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में इस तरह का कोई आधिकारिक दस्तावेज़ मौजूद नहीं था। इस मैनुअल में नर्सों की ड्यूटी के समय क्या पहनना अनिवार्य है, कौन से गहने पहन सकते हैं, और किस प्रकार से मरीजों के साथ व्यवहार करना है, यह विस्तार से लिखा गया है।
नर्सिंग मैनुअल लागू होने के बाद, नर्सिंग अधिकारियों को केवल सामान्य और हल्के गहने पहनने की अनुमति होगी। महंगे और भारी गहने पहनने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। साथ ही, नेल पॉलिश या किसी प्रकार का कॉस्मेटिक उपयोग करना ड्यूटी के दौरान मना है।
वार्ड और इमरजेंसी में बोर्ड लगेगा
नए नियमों के अनुसार, हर वार्ड और इमरजेंसी विभाग में बोर्ड लगाए जाएंगे, जिसमें नर्सिंग अधिकारियों के ड्यूटी संबंधी नियम लिखे होंगे। इससे मरीज और उनके तीमारदार नर्सों की ड्यूटी नियमों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
यदि कोई नर्स नियमों का पालन नहीं करती है, तो मरीज या तीमारदार सीधे संबंधित अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इससे मरीज सेवा में पारदर्शिता बढ़ेगी और अस्पताल में अनुशासन सख्त होगा।
नर्सिंग अधिकारियों की प्रमुख जिम्मेदारियां
केजीएमयू नर्सिंग मैनुअल में नर्सिंग अधिकारियों की जिम्मेदारियों को भी विस्तार से लिखा गया है। प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं:
मरीज और उनके तीमारदारों के साथ विनम्रता से संवाद करना।
मरीजों को दवाई, भोजन, पानी, नाई की उपलब्धता और मिलने का समय बताना।
मरीज के डॉक्टर से जल्द मिलवाना और जरूरत पड़ने पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को सूचना देना।
मरीज की देखभाल के लिए तुरंत उपलब्ध होना।
वार्ड परिचारकों के माध्यम से रक्त नमूना लेना और देना।
संक्रमण फैलने से रोकना और नियमित रूप से हाथ साफ करना।
डिस्चार्ज समरी को अकाउंट सेक्शन और तीमारदारों को देना।
इन नियमों से नर्सिंग अधिकारियों का काम सरल, स्पष्ट और मरीज-केंद्रित होगा।
केजीएमयू पहला संस्थान बना
प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू ने कहा कि केजीएमयू नर्सिंग मैनुअल लागू करने वाला पहला संस्थान बन गया है। इसका उद्देश्य नर्सों की ड्यूटी और अधिकारों को सुनिश्चित करना और मरीज सेवा प्रणाली को बेहतर बनाना है।
उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे मरीजों को बेहतर देखभाल, पारदर्शिता और अनुशासन मिले। नर्सिंग मैनुअल इस दिशा में पहला कदम है। इसके लागू होने से नर्सिंग स्टाफ की जिम्मेदारी और मरीजों की सेवा में सुधार होगा।”
नर्सिंग नियमों का सामाजिक और स्वास्थ्य लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के नियमों के कई फायदे हैं:
संक्रमण कम होगा: नेल पॉलिश और भारी गहनों के प्रतिबंध से अस्पताल में संक्रमण फैलने की संभावना घटेगी।
पारदर्शिता बढ़ेगी: मरीज और तीमारदार नर्सिंग अधिकारियों के अधिकार और दायित्व समझ पाएंगे।
नर्सिंग पेशे का सम्मान बढ़ेगा: स्पष्ट नियमों से नर्सिंग अधिकारियों की प्रोफेशनल जिम्मेदारी और भूमिका मजबूत होगी।
इस तरह का कदम देश के अन्य अस्पतालों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है।
नर्सिंग मैनुअल से जुड़े भविष्य के कदम
केजीएमयू ने भविष्य में नर्सिंग मैनुअल को और व्यापक बनाने की योजना बनाई है। इसमें नर्सिंग अधिकारियों के प्रशिक्षण, वार्ड प्रबंधन और मरीज सेवा से जुड़े नई तकनीकों और डिजिटल सिस्टम को भी शामिल किया जाएगा।
नर्सिंग अधिकारियों को इसके तहत मासिक मूल्यांकन और प्रगति रिपोर्ट भी दी जाएगी। इससे अस्पताल प्रशासन नर्सिंग स्टाफ के कामकाज और दक्षता को लगातार मॉनिटर कर पाएगा।
यह कदम न केवल केजीएमयू के लिए बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन सकता है। इससे मरीजों की सेवा, सुरक्षा और अस्पताल में अनुशासन दोनों सुनिश्चित होंगे।
केजीएमयू नर्सिंग मैनुअल ने नर्सों के ड्यूटी नियमों में नया मानक स्थापित किया है। नेल पॉलिश और भारी गहनों पर प्रतिबंध, वार्ड और इमरजेंसी में बोर्ड, और जिम्मेदारियों की स्पष्ट रूपरेखा से नर्सिंग प्रणाली में सुधार और मरीज सेवा में गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।

