Lucknow में धर्म छिपाकर शादी का आरोप: आर्य समाज विवाह से तीन बेटियों तक, महिला का गंभीर खुलासा, पुलिस पर भी उठे सवाल
Lucknow religious fraud marriage का यह मामला राजधानी में सामाजिक, कानूनी और मानवीय दृष्टि से गहरी बहस को जन्म दे रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आए इस प्रकरण में एक महिला ने आरोप लगाया है कि एक मुस्लिम युवक ने अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर उससे विवाह किया, वर्षों तक धोखे में रखा और बाद में जबरन धर्म परिवर्तन व उत्पीड़न किया।
यह मामला केवल वैवाहिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पहचान छुपाने, विश्वासघात, महिला अधिकार और प्रशासनिक संवेदनशीलता जैसे कई गंभीर पहलू जुड़े हुए हैं।
🔴 धर्म छिपाकर शादी का आरोप, आर्य समाज मंदिर में विवाह
पीड़िता के अनुसार, करीब दस वर्ष पहले उसकी मुलाकात एक युवक से हुई, जिसने खुद को रितेश मौर्य बताया। दोनों के बीच संबंध आगे बढ़े और युवक ने भरोसा दिलाया कि वह हिंदू है। इसी विश्वास के आधार पर दोनों ने आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया।
महिला का कहना है कि विवाह के समय उसे युवक के असली नाम, धार्मिक पहचान या पारिवारिक पृष्ठभूमि की कोई जानकारी नहीं दी गई। शादी के बाद वह पूरी तरह अपने पति और उसके परिवार पर निर्भर हो गई।
🔴 बेटी के जन्म के बाद सामने आई सच्चाई
Lucknow religious fraud marriage मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब शादी के लगभग दो साल बाद दंपती की पहली बेटी का जन्म हुआ। पीड़िता का आरोप है कि इसी दौरान पति ने पहली बार अपना असली नाम मोहम्मद आसिफ बताया।
इस खुलासे से महिला को गहरा आघात लगा। उसके अनुसार, यह सिर्फ नाम बदलने की बात नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उसकी पहचान, विश्वास और भावनाओं से खेला गया।
🔴 जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव और डर का माहौल
पीड़िता का कहना है कि असली पहचान सामने आने के बाद पति और उसके परिजनों का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। उस पर मानसिक दबाव बनाया गया और धमकियों के जरिए धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया।
महिला ने आरोप लगाया कि बेटी के भविष्य और सुरक्षा का हवाला देकर उसे डराया गया। इस दौरान वह अकेली और असहाय महसूस करती रही। बाद के वर्षों में उसकी दो और बेटियां हुईं, जिससे उसकी जिम्मेदारियां और बढ़ गईं।
🔴 धार्मिक भावनाओं के खिलाफ जबरदस्ती और उत्पीड़न
महिला ने आरोप लगाया कि उसे जबरन मांस खाने के लिए मजबूर किया गया, जो उसकी धार्मिक आस्था के पूरी तरह खिलाफ था। इसके साथ ही उसने शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
पीड़िता के अनुसार, विरोध करने पर उसे प्रताड़ित किया जाता था और उसकी भावनाओं का लगातार अपमान किया गया। यह स्थिति लंबे समय तक चलती रही, जिससे वह भीतर ही भीतर टूटती चली गई।
🔴 कुकर्म और वैवाहिक शोषण के आरोप
Lucknow religious fraud marriage मामले में महिला ने पति पर कुकर्म जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उसका कहना है कि शादी का संबंध उसकी सहमति और सम्मान पर आधारित नहीं रहा, बल्कि दबाव और डर के माहौल में बदल गया।
इन आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है, क्योंकि इसमें महिला की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े सवाल सीधे तौर पर खड़े होते हैं।
🔴 दूसरी महिला के साथ रहने का आरोप, पत्नी और बच्चों से दूरी
पीड़िता का दावा है कि वर्तमान समय में आरोपी उसे और तीनों बेटियों को छोड़कर किसी दूसरी महिला के साथ रह रहा है। न तो वह पति के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा है और न ही बच्चों की परवरिश या खर्च की चिंता कर रहा है।
महिला का कहना है कि वह आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन दौर से गुजर रही है और बच्चों का भविष्य उसे सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है।
🔴 पुलिस पर सहयोग न करने के आरोप
इस Lucknow religious fraud marriage प्रकरण में महिला ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि जब वह शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंची, तो उसे पूरा सहयोग नहीं मिला।
पीड़िता का कहना है कि पुलिस आरोपी का पक्ष ले रही है या मामले को गंभीरता से नहीं ले रही, जिससे उसे न्याय मिलने में लगातार देरी हो रही है। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसकी शिकायत को हल्के में लिया गया।
🔴 प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
महिला ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उसका कहना है कि यदि शुरुआत में ही सच्चाई सामने आ जाती, तो उसकी जिंदगी और बच्चों का भविष्य इस मोड़ पर न आता।
उसने आरोपी मोहम्मद आसिफ के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसी और महिला के साथ ऐसा न हो और कानून का भरोसा बना रहे।
🔴 समाज और कानून के लिए बड़ा सवाल
यह मामला केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह पहचान, विश्वास और विवाह जैसे संवेदनशील विषयों पर समाज को सोचने पर मजबूर करता है। धर्म छिपाकर शादी जैसे आरोप यदि सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल नैतिक बल्कि कानूनी रूप से भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कानून, प्रशासन और समाज—तीनों की जिम्मेदारी बनती है कि पीड़ित को सुरक्षा और न्याय मिले।

