Manipur Violence: मणिपुर में फिर से भड़की हिंसा, सैबोल गांव में तनाव चरम पर
Manipur Violence: मणिपुर में एक बार फिर से तनाव और हिंसा ने राज्य को हिला कर रख दिया है। शुक्रवार को कांगपोकपी जिले के पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर भीड़ ने हमला कर दिया। यह हमला सैबोल गांव में केंद्रीय बलों को हटाने की मांग को लेकर हुआ। इस घटना में पुलिस अधीक्षक समेत कई लोग घायल हुए हैं। सैबोल गांव, इंफाल के पूर्वी जिले की सीमा पर स्थित है, और यह इलाका बीते कुछ महीनों से अशांत है।
मणिपुर की हिंसा का नया अध्याय: क्या है पूरी घटना?
राज्य में हिंसा का यह सिलसिला नया नहीं है। 3 मई 2023 से मणिपुर कुकी और मैतेई समुदायों के बीच भयंकर संघर्ष की चपेट में है। इस सांप्रदायिक टकराव में अब तक सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। शुक्रवार को हुई हिंसा ने एक बार फिर से मणिपुर की स्थिति को चर्चा का विषय बना दिया है।
सैबोल गांव में 31 दिसंबर को महिलाओं पर कथित रूप से हुए लाठीचार्ज के विरोध में कुकी समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर हमला कर दिया। घटनास्थल पर मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि हमलावरों ने सुरक्षा बलों की तैनाती पर अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए जमकर पथराव किया। इसके अलावा, जिला पुलिस के वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया।
क्यों है सैबोल गांव विवाद का केंद्र?
सैबोल गांव में कुकी समुदाय के लोगों का आरोप है कि महिलाओं पर केंद्रीय बलों द्वारा बर्बरता की गई। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है। कुकी और मैतेई समुदायों के बीच पहले से ही भूमि विवाद और आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर तनाव था। शुक्रवार को हुई हिंसा ने दोनों समुदायों के बीच खाई को और गहरा कर दिया।
सैबोल गांव इंफाल के पूर्वी जिले और कांगपोकपी जिले के बीच स्थित है, जो इसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है। गांव में सुरक्षा बलों की तैनाती ने स्थानीय समुदायों के बीच असंतोष को बढ़ा दिया है।
केंद्रीय बलों पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय नेताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय बलों की तैनाती पर सवाल उठाए हैं। बीएसएफ और सीआरपीएफ की मौजूदगी पर समुदाय विशेष ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सैबोल गांव में लगातार सुरक्षा बलों की तैनाती से स्थानीय निवासियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर हुए हमले के बाद प्रशासन ने हिंसा को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। घटना के बाद कांगपोकपी जिले में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही, पूरे इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है। पुलिस ने बताया कि हिंसा में शामिल उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक हलकों में मचा हड़कंप
इस घटना ने मणिपुर की राजनीतिक स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की सरकार पर समुदायों के बीच शांति स्थापित करने में विफल होने का आरोप लगाया है।
क्या कहता है इतिहास?
मणिपुर लंबे समय से जातीय और सांप्रदायिक तनाव का गवाह रहा है। कुकी और मैतेई समुदायों के बीच विवाद का मुख्य कारण भूमि और आरक्षण है। मैतेई समुदाय मणिपुर की कुल आबादी का लगभग 53% है और वे इंफाल घाटी में बसे हुए हैं। वहीं, कुकी और नागा समुदाय ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में रहते हैं।
मैतेई समुदाय ने खुद को अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में शामिल करने की मांग की थी, जिससे कुकी और नागा समुदायों में असंतोष बढ़ा।
अंतरराष्ट्रीय नजरिया और मीडिया की भूमिका
मणिपुर में हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने राज्य में शांति बहाल करने की अपील की है।
क्या आगे की राह होगी आसान?
मणिपुर में शांति बहाल करना किसी चुनौती से कम नहीं है। समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना और विकास कार्यों को प्राथमिकता देना ही स्थायी समाधान हो सकता है। राज्य सरकार को चाहिए कि वह इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए सभी समुदायों के साथ संवाद स्थापित करे।

