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Massacre in Congo- कांगो में खून की होली: आधी रात को आतंकियों ने मचाया तांडव, 52 से ज्यादा मासूमों की गला रेतकर हत्या

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DR Congo) से ऐसी खौफनाक खबर सामने आई जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया है. आधी रात को जब गांव के लोग गहरी नींद में थे, तभी इस्लामिक स्टेट समर्थित एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेज (ADF) के आतंकियों ने हमला बोल दिया. हाथों में गंडासे और कुदाल लिए ये खूनी दरिंदे घर-घर घुसे, लोगों को नींद से जगाया, रस्सियों से बांधा और फिर बेरहमी से गला रेतकर मार डाला.Massacre in Congo

इस घटना में अब तक 52 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. मरने वालों में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं. कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे हालात और भी डरावने हो गए.


आंखों देखा हाल – बच गई महिला ने सुनाई पूरी दास्तां

इस नरसंहार में चमत्कारिक रूप से बच गई एक महिला ने जब पूरी घटना बताई तो सुनकर रोंगटे खड़े हो गए. उसने कहा कि आतंकी पहले सभी लोगों को एक जगह इकट्ठा करते हैं, उन्हें रस्सियों से बांधते हैं और फिर गंडासे व कुदाल से हमला शुरू करते हैं. बच्चे चीखते रहते हैं, महिलाएं रहम की भीख मांगती हैं लेकिन दरिंदों के दिल में कोई इंसानियत नहीं बची.

उस महिला ने यह भी बताया कि आतंकी बिना किसी डर के गांवों में घुसे और यहां तक कि छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ा. उनके गले पर वार करके मौत के घाट उतार दिया गया.


लुबेरो और बेनी के गांव बने कब्रगाह

लुबेरो और बेनी इलाके में यह हमला हुआ है. सिर्फ मेलिया गांव में ही करीब 30 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. स्थानीय प्रशासन के मुताबिक आतंकियों ने बच्चों और महिलाओं तक को बर्बरता से मारा और कई घर जलाकर राख कर दिए.

संयुक्त राष्ट्र (UN) मिशन MONUSCO ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि 9 से 16 अगस्त के बीच हुए इन हमलों में कम से कम 52 नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें आठ महिलाएं और दो छोटे बच्चे शामिल हैं. मौत का आंकड़ा और बढ़ सकता है क्योंकि कई लोग लापता हैं और खोजबीन अभी जारी है.


क्यों भड़क रही है कांगो में हिंसा?

कांगो में हिंसा और आतंक कोई नई बात नहीं है. यह देश लंबे समय से गृहयुद्ध, विद्रोह और संसाधनों की लूट का शिकार रहा है. कांगो के पूर्वी हिस्से में सोना, कोबाल्ट, हीरे और अन्य खनिजों की भरमार है. यही वजह है कि कई विद्रोही गुट इस इलाके पर कब्जा जमाना चाहते हैं.

ADF विद्रोही इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़े हुए हैं और लगातार स्थानीय लोगों को निशाना बनाते हैं. हाल ही में कांगो की सेना और उसके सहयोगी देश युगांडा ने ADF पर बड़े हमले किए थे, जिसमें उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा. इस हार का बदला लेने के लिए उन्होंने आम नागरिकों पर यह खौफनाक हमला बोला.


जुलाई में भी हुआ था बड़ा नरसंहार

यह पहली बार नहीं है जब कांगो ने इतनी बड़ी त्रासदी देखी हो. जुलाई के महीने में ही रवांडा समर्थित M23 विद्रोहियों ने कम से कम 140 लोगों की हत्या की थी. मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सिर्फ रुत्शुरु इलाके में ही 300 से ज्यादा नागरिक मारे गए थे.

इसके अलावा, जुलाई के आखिर में ADF ने पूर्वी कांगो के एक चर्च पर हमला करके 38 लोगों की हत्या कर दी थी. यह साफ दिखाता है कि कांगो लगातार खून से लथपथ हो रहा है और हालात बिगड़ते जा रहे हैं.


संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चिंता

संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन बार-बार चेतावनी दे चुके हैं कि कांगो में लगातार बढ़ती हिंसा वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा है. MONUSCO ने कहा है कि ऐसे हमले मानवता के खिलाफ अपराध हैं और दोषियों को किसी भी कीमत पर सजा दिलाई जाएगी.

लेकिन सवाल यह है कि जब तक इन विद्रोहियों का सफाया नहीं होता, तब तक मासूमों का खून बहना कैसे रुकेगा?


स्थानीय लोगों में डर और गुस्सा

इस कत्लेआम के बाद लुबेरो और बेनी इलाकों के लोग दहशत में हैं. कई परिवार अपने गांव छोड़कर भाग रहे हैं. लोग कह रहे हैं कि अब गांव में रहना नामुमकिन हो गया है.

कांगो की सेना ने दावा किया है कि उन्होंने विद्रोहियों के खिलाफ ऑपरेशन तेज कर दिया है और आने वाले दिनों में इन आतंकियों को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर बार हमलों के बाद यही वादे किए जाते हैं और फिर निर्दोषों का खून बहता रहता है.


आतंकवाद की जड़ें कितनी गहरी हैं?

कांगो में आतंकवाद और हिंसा की जड़ें बहुत गहरी हैं. यहां दशकों से गृहयुद्ध चलता आया है. कई गुटों को पड़ोसी देशों का समर्थन मिलता है और खनिज संपदा पर कब्जे के लिए खूनी संघर्ष चलता है.

ADF जैसे संगठन न सिर्फ हथियारबंद हैं, बल्कि इनका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है. यही वजह है कि सेना और शांति सैनिकों के लिए इन्हें खत्म करना इतना मुश्किल हो जाता है.


दुनिया की जिम्मेदारी

आज जब पूरा विश्व आतंकवाद से लड़ रहा है, तो कांगो की इन घटनाओं को नजरअंदाज करना मानवता के साथ धोखा होगा. जरूरत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकजुट होकर इस संकट से जूझ रहे कांगो की मदद करे और निर्दोषों की जान बचाई जाए.


कांगो का यह नरसंहार सिर्फ अफ्रीका की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है कि आतंकवाद जब भी और जहां भी सिर उठाता है, वह मासूमों की जिंदगी को निगल जाता है. अब समय आ गया है कि वैश्विक समुदाय मिलकर ऐसे खूनी संगठनों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़े और कांगो जैसे देशों को स्थायी शांति की राह पर ले जाए.

 

News-Desk

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