उत्तर प्रदेश

Meerut Nagar Nigam ने शुरू की घर-घर स्वकर निर्धारण फॉर्म वितरण योजना। टॉप गृहकर दाताओं को मिलेगा सम्मान। जानिए पूरी योजना और नगर निगम की तैयारियाँ।

Meerut नगर निगम मेरठ ने एक बेहद अहम और दूरगामी निर्णय लेते हुए शहर के नागरिकों के लिए कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनसहयोगी बनाने का ऐलान किया है। अब मेरठ के प्रत्येक वार्ड में घर-घर जाकर स्वकर निर्धारण प्रपत्र (Self-Assessment Form) वितरित किया जाएगा, जिससे कि गृह स्वामी बिना किसी परेशानी के अपने गृहकर का निर्धारण कर सकें और समय से टैक्स जमा कर शहर के विकास में अपना योगदान दे सकें।

हर वार्ड के टॉप 5 गृहकरदाताओं को मिलेगा विशेष सम्मान

नगर निगम ने इस नई योजना को और भी प्रोत्साहित करने के लिए एक अनोखा कदम उठाया है। महापौर हरिकांत अहलूवालिया के अनुसार, हर वार्ड में जो गृहस्वामी समय से और सबसे अधिक कर का भुगतान करेंगे, उन टॉप 5 करदाताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। इन नागरिकों के नाम उस वार्ड में सार्वजनिक रूप से लगाए जाएंगे ताकि अन्य लोगों को भी समय से कर देने के लिए प्रेरणा मिल सके।

महापौर और नगर आयुक्त की बड़ी पहल: चौपालों और समाधान दिवसों से जुड़ेंगे लोग

नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हर शुक्रवार को समाधान दिवस का आयोजन किया जा रहा है जहां गृहकर बिलों की गलतियों को सुधारा जा रहा है। साथ ही हर वार्ड में चौपाल का आयोजन करके लोगों की समस्याओं को सीधे सुना जा रहा है। शिकायतों के समाधान के लिए विशेष हेल्प सेल भी बनाया गया है।

पार्षद अब पहुंचाएंगे फॉर्म: नमूना भरा हुआ फार्म भी साथ में होगा

नवीन व्यवस्था के अंतर्गत, प्रत्येक वार्ड के पार्षद डोर-टू-डोर जाकर स्वकर फॉर्म वितरित करेंगे। इसके साथ एक भरा हुआ नमूना फार्म भी दिया जाएगा जिससे गृहस्वामी को फॉर्म भरने में कोई कठिनाई न हो। सभी भरे हुए फॉर्म नगर निगम कार्यालय में जमा करवाए जाएंगे। यह प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में भी पारित किया जाएगा।

पुराने टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं, मकान का स्वरूप ही टैक्स का आधार

नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने स्पष्ट किया कि नगर निगम अब भी 2003-04 के सर्वे के अनुसार गृहकर का निर्धारण कर रहा है। यदि किसी मकान में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है तो टैक्स भी पहले जैसा ही रहेगा। लेकिन मकान का स्वरूप बदला है या नवीनीकरण हुआ है, तो नया टैक्स उसी के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।

जीआईएस सर्वे और शिकायतें: कंप्यूटर जनित बिलों से भ्रम की स्थिति

GIS आधारित सर्वेक्षण के बाद कुछ लोगों को अधिक बिल मिलने की शिकायतें मिली हैं। यह बिल सेटेलाइट तकनीक और कंप्यूटर प्रणाली से स्वतः तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें मकान के क्षेत्रफल या स्वरूप में बदलाव होने पर कर अधिक आ रहा है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए स्वकर फॉर्म वितरण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है ताकि नागरिक सही जानकारी देकर सही टैक्स निर्धारण करवा सकें।

हाउस टैक्स देने वालों की संख्या अभी भी बहुत कम

नगर आयुक्त ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया – नगर निगम क्षेत्र में लगभग साढ़े तीन लाख मकान हैं, परंतु केवल 1.14 लाख ही गृहकर जमा कर रहे हैं। शेष मकान मालिक हाउस टैक्स नहीं दे रहे हैं। यह न केवल नगर निगम की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है, बल्कि शहर के विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है।

भ्रष्टाचार का साया, जीआईएस सर्वे पर उठे सवाल

पिछले कुछ महीनों में GIS सर्वे को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। इस वजह से नगर निगम को काफी किरकिरी झेलनी पड़ी। करीब 10 महीने पहले बोर्ड बैठक में महापौर को नया गृहकर होल्ड करना पड़ा था। हालांकि अब नगर निगम ने इस पर फीडबैक लेकर सभी आपत्तियों का समाधान करने का दावा किया है।

अब शिकायत सुनने के लिए कंट्रोल रूम नंबर भी होगा जारी

शहरवासियों की सुविधा के लिए नगर निगम ने नया कंट्रोल रूम नंबर जारी करने का भी फैसला किया है जिससे किसी को भी आपत्ति हो तो वह सीधे अपनी शिकायत दर्ज करवा सके। महापौर और नगर आयुक्त का कहना है कि अब घर-घर जाकर स्वकर फॉर्म वितरित किए जाएंगे, शिकायतें सुनी जाएंगी और उसके बाद ही नया गृहकर तय किया जाएगा।

कांवड़ यात्रा: नगर निगम की पूरी तैयारी, दुकानों पर नाम जरूरी

कांवड़ यात्रा के दौरान नगर निगम ने साफ-सफाई, पानी, पथ प्रकाश आदि पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कहा कि नगर निगम कांवड़ यात्रियों की सुविधा के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। साथ ही उन्होंने दुकानदारों से कहा कि वे अपनी दुकानों पर नाम स्पष्ट रूप से लिखें, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न हो। उन्होंने इस पर पूरी तरह समर्थन जताया और इसे आवश्यक कदम बताया

नगर निगम की यह नई रणनीति: ईमानदारी से टैक्स देने वालों को बढ़ावा, चोरी करने वालों पर शिकंजा

नगर निगम मेरठ की यह नई नीति न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा देगी, बल्कि टैक्स चोरों पर भी अंकुश लगाएगी। ईमानदारी से टैक्स देने वाले नागरिकों को प्रोत्साहन और सम्मान, और चुपके से बचने वालों के लिए चेतावनी – यही है इस रणनीति की मूल भावना। इससे न केवल कर संग्रहण में वृद्धि होगी, बल्कि नगर की योजनाएं और विकास परियोजनाएं भी समय पर पूरी होंगी।

क्यों जरूरी है समय पर गृहकर जमा करना?

गृहकर शहर के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने का सबसे बड़ा आधार है। सड़कें, नालियां, स्ट्रीट लाइट्स, साफ-सफाई, जल व्यवस्था – ये सब नगर निगम द्वारा गृहकर से ही संचालित होते हैं। यदि नागरिक समय से कर जमा नहीं करते तो शहर की मूलभूत सेवाएं प्रभावित होती हैं। इसीलिए नगर निगम अब जनभागीदारी के साथ ईमानदारी की मिसाल पेश करने की ओर कदम बढ़ा रहा है।


**नगर निगम मेरठ की यह नई पहल केवल कर संग्रहण की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक नई सोच, एक नए विश्वास का प्रतीक है – जहां नागरिक और प्रशासन मिलकर शहर को बेहतर बनाने के लिए साथ आएंगे।**

 

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