ईद पर्व को लेकर दूध का इंतजाम करने दौड़े शहरवासी
मुजफ्फरनगर। ईद की सीर के लिए दूध की मारीमारी देखने को मिलने लगी है। इसके लिए भागदौड प्रारंभ हो गयी है। शहर के लोग दूध् के प्रबंध के लिए आज से ही गांव की ओर प्रस्थान करने लगे हैं। वहीं दूसरी ओर हर बार हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बनने वाले मंसूरपुर क्षेत्र में गांव दूधाहेड़ी में लोगों ने मुस्लिम भाइयों के लिए दूध का प्रबंध करना प्रारंभ कर दिया है। इस बारे में उनका कहना था कि त्योहार का नाम ही एक दूसरे के साथ मिल बांट कर मनाना है, जब मुस्लिम भाई हमारे साथ होली-दीवाली मनाते हैं, तो हम ईद क्यों नहीं। मिलजुल कर त्योहार मनाने से इसका मजा दोगुना हो जाता है। हमारे यहां पर दूध होते हुए वह कहीं ओर मारे-मारे फिरे, यह सही नहीं है। ईद का खास तोहफा होती है दूध से बनने वाली सीर। इसके लिए मुस्लिमों द्वारा कड़ा प्रबंध किया जाता है।
इसे लेकर हालांकि इस त्योहार पर दूध पर मारामारी रहती है। इसे देखते हुए कुछ लोगों ने हर साल होने वाली इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए आसपास के गांवों से दूध् की व्यवस्था करनी प्रारंभ कर दी है। लोग जगह-जगह दूध् के लिए इधर -उधर दौड़ते नजर आए। दूध को लेकर जारी इस मारामारी में साम्प्रदायिकता की एक मिसाल एक बार फिर से दूधाहेड़ी गांव में देखने को मिली। यहां पर मनोज कुमार ने अपनी गाय का घर का दूध रोक कर अपने जानने वाले मुस्लिम भाइयों को दूध उपलब्ध कराया। इस बारे में मनोज कुमार का कहना था कि क्या हम एक दिन बिना दूध के नहीं रह सकते। इस समय दूध की अधिक आवश्यकता हमारे मुस्लिम भाइयों को है। इस बहाने हम भी ईद के त्योहार में शामिल होकर थोड़ी खुशियां बांट लेते हैं।
त्योहार ही मिल बांट कर मनाने का नाम है। उनका कहना था कि उन्हें पूरा अनुमान है कि ईद पांच जून को ही होगी। इसके लिए उनके एक दिन पूर्व से ही दूध् का प्रबंध करा दिया गया है। इसी परिपाटी पर गांव के अन्य लोग जिसमें ललित राठी, सचिन राठी, इंद्रपाल सिंह राठी, चांदवीर राठी,देवेंद्र सिंह राठी, अशोक राठी, गजेंद्र सिंह राठी, अनिल राठी, कृष्णपाल राठी, नरेश राठी आदि शामिल रहे। सभी ने भी अपना-अपना एक दिन का दूध अपने मुस्लिम भाइयों को उपलब्ध कराया।
