Muzaffarnagar चरथावल में ठंड का प्रकोप चरम पर: ग्रामीणों की अलाव व्यवस्था को लेकर शिकायत, मजदूर वर्ग बेहाल
जनपद Muzaffarnagar के चरथावल थाना क्षेत्र की न्याय पंचायत दूधली इस समय कड़ाके की ठंड की चपेट में है। Charthawal cold wave के कारण ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। तापमान लगातार गिरने से सुबह और रात का समय बेहद कठिन होता जा रहा है।
ग्रामीणों को इस भीषण ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन सरकारी स्तर पर व्यवस्था न होने से लोगों में निराशा भी देखी जा रही है।
ग्राम पंचायत में अलाव की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों में नाराज़गी
ग्रामीणों में से अनिल कुमार, करेशन और मनोज ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में सरकार द्वारा अलाव की व्यवस्था की जाती है।
नगर क्षेत्रों में चौराहों, बस स्टॉप्स और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाए जाते हैं, जिससे गरीब एवं मजदूर वर्ग को राहत मिलती है।
लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बिल्कुल उलट है।
गांवों में ग्राम पंचायत की ओर से कोई भी अलाव व्यवस्था नहीं की गई, जिसके चलते लोगों को अपनी जेब से लकड़ी खरीदकर या सूखी लकड़ियाँ इकट्ठा कर अलाव जलाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि—
गांव स्तर पर भी अलाव की सरकारी व्यवस्था हो
पंचायत को आवश्यक बजट और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ
गरीब और मजदूर वर्ग को राहत के लिए विशेष इंतज़ाम किए जाएँ
ठंड से बचने को मजबूरन अलाव—मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
गांव के निवासी वीर सिंह ने बताया कि कड़ाके की सर्दी लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल रही है।
ग्रामीण मजदूर वर्ग, जो सुबह जल्दी काम पर निकलता है, ठंड की वजह से बेहद परेशान है।
भीषण ठंड में—
खेतों में काम करना कठिन
सुबह के समय धुंध और ठंड दोनों का असर
कमाई पर सीधा प्रभाव
बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर खतरा
गांव में कई परिवार ऐसे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अपने स्तर पर अलाव की व्यवस्था भी नहीं कर पाते। ऐसे में सरकारी सहयोग का न होना और भी चुनौती पैदा कर रहा है।
Charthawal cold wave के बीच ग्रामीणों की स्पष्ट मांग—सुव्यवस्थित अलाव की तत्काल व्यवस्था की जाए
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शहरों की तरह गांवों में भी सरकारी अलाव की व्यवस्था हो जाए, तो गरीब लोग ठंड से राहत पा सकते हैं।
यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लगातार गिरता तापमान स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकता है, विशेषकर—
बुजुर्ग
मजदूर
छोटे बच्चे
बाहर काम करने वाले लोग
इन वर्गों पर ठंड का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई होने से कई लोगों को राहत मिल सकती है।

