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Animation, visual effects, gaming और कॉमिक्स को बढ़ावा देने के लिए भारत में स्थापित होगा राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र IIIC

भारत सरकार ने एवीजीसी-एक्सआर (Animation, visual effects, gaming और कॉमिक्स एवं एक्सटेंडेड रियलिटी) क्षेत्र में उत्कृष्टता के नए आयाम स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट की हालिया बैठक में इस क्षेत्र को समर्पित एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र/IIIC की स्थापना की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक मीडिया और मनोरंजन सामग्री का प्रमुख केंद्र बनाना है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी और बताया कि यह केंद्र मुंबई में स्थापित किया जाएगा।

एवीजीसी-एक्सआर: रचनात्मकता और तकनीकी के संगम का भविष्य

एवीजीसी-एक्सआर (AVGC-XR) क्षेत्र अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य और विज्ञापन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। इस क्षेत्र में बढ़ती प्रौद्योगिकी और इंटरनेट की व्यापक पहुंच ने इसे तेजी से विकसित होते हुए वैश्विक परिदृश्य में प्रमुख बना दिया है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “आज का समय क्रिएटर इकोनॉमी का है, जो एक शक्तिशाली अर्थव्यवस्था में तब्दील हो रही है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए हम आईआईएम और आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की तर्ज पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्सिव क्रिएटर्स (IIIC) की स्थापना करने जा रहे हैं, जिसका औपचारिक नाम बाद में तय किया जाएगा।”

राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र IIIC: युवाओं के लिए सुनहरा अवसर

यह उत्कृष्टता केंद्र न केवल पेशेवरों के लिए बल्कि शौकिया लोगों के लिए भी एक शानदार अवसर साबित होगा। यहां पर उन्हें नवीनतम तकनीकों और कौशलों में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे Animation, visual effects, gaming और कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर सकें। यह केंद्र विभिन्न क्षेत्रों जैसे कंप्यूटर विज्ञान, इंजीनियरिंग, डिजाइन और कला के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने का भी काम करेगा, ताकि विभिन्न विषयों के बीच तालमेल बैठाकर नई क्रिएटिव संभावनाओं का सृजन किया जा सके।

फिक्की और सीआईआई का सहयोग

इस केंद्र की स्थापना के लिए उद्योग मंडल फिक्की और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) सरकार के साथ भागीदार होंगे। यह साझेदारी सुनिश्चित करेगी कि केंद्र में न केवल तकनीकी और रचनात्मक पहलुओं को बढ़ावा दिया जाए, बल्कि इसके साथ-साथ उद्योग जगत की जरूरतों के हिसाब से एक सक्षम ढांचा तैयार किया जाए।

स्टार्टअप्स और रोजगार सृजन में बड़ा योगदान

एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केंद्र न केवल शोध एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि स्टार्टअप्स और शुरुआती चरण की कंपनियों को समर्थन देने के लिए एक इन्क्यूबेशन केंद्र के रूप में भी काम करेगा। इससे उभरते उद्यमियों और कंपनियों को एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में अपने विचारों को साकार करने का मौका मिलेगा।

राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र भारत के युवाओं के लिए एक विशाल रोजगार अवसर भी लेकर आएगा। यह केंद्र रचनात्मक कला, डिजाइन और तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खोलेगा। इसके साथ ही, यह केंद्र भारत को वैश्विक एवीजीसी-एक्सआर गतिविधियों का मुख्य केंद्र बनाने में मदद करेगा, जिससे यह क्षेत्र और अधिक विकसित हो सकेगा

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों पर आधारित सामग्री का सृजन

इस केंद्र का एक अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्य भारत की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों पर आधारित सामग्री का निर्माण करना है। इससे न केवल देश में स्थानीय बौद्धिक संपदा (IP) का विकास होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारतीय संस्कृति की पहचान मजबूत होगी।

एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र के जरिए अब न केवल फिल्म निर्माण और ओटीटी मंचों को लाभ मिलेगा, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। इसके जरिए शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीकों का उपयोग कर बच्चों और युवाओं के लिए सीखने की प्रक्रिया को और रोचक बनाया जा सकेगा। वहीं, स्वास्थ्य क्षेत्र में वर्चुअल और ऑगमेंटेड रियलिटी के जरिए नए चिकित्सा उपकरण और तकनीकें विकसित की जा सकेंगी।

कैबिनेट की अन्य योजनाएं और इनोवेशन हब का विस्तार

इस कैबिनेट बैठक में चर्चा किए गए अन्य मुद्दों पर नजर डालें तो, सरकार ने इनोवेशन और शोध को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न राज्यों में अन्य उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की भी योजना बनाई है। इन केंद्रों के जरिए न केवल तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ मिलेगा, बल्कि वे सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए भी उत्प्रेरक का काम करेंगे।

यह नई पहल भारत सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य देश में उच्च स्तरीय कौशल और तकनीकी प्रतिभाओं का विकास करना है। इसके साथ ही यह केंद्र “मेक इन इंडिया” और “स्किल इंडिया” जैसे कार्यक्रमों को भी मजबूती प्रदान करेगा, जो भारत को वैश्विक उद्योगों में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के तहत चलाए जा रहे हैं।

एवीजीसी-एक्सआर के लिए स्थापित किया जा रहा राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र भारत के रचनात्मक और तकनीकी क्षेत्र के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल देश की बौद्धिक संपदा का विकास होगा, बल्कि यह देश के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए सक्षम बनाएगा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्सिव क्रिएटर्स (IIIC) जैसी संस्थाओं के माध्यम से भारत अब एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है, जहां रचनात्मकता और तकनीकी का समन्वय कर देश को वैश्विक मानचित्र पर एक अग्रणी स्थान दिलाया जाएगा।

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