India-US ने किया 10 साल का ऐतिहासिक रक्षा समझौता — टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा में बढ़ेगा सहयोग 🇮🇳🤝🇺🇸
India-US के बीच रक्षा सहयोग के नए युग की शुरुआत हो चुकी है। शुक्रवार को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में दोनों देशों ने 10 साल का डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (Defense Framework Agreement) साइन किया।
यह समझौता एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच दोनों देशों के सैन्य, तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को अगले दशक तक और मज़बूत करेगा।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस पर हस्ताक्षर किए। दोनों नेता ASEAN रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM-Plus) में शामिल होने के लिए मलेशिया में मौजूद थे।
कूटनीति और रणनीति का संगम – रक्षा समझौते से खुलेंगे 10 साल के नए दरवाज़े
इस समझौते के तहत भारत और अमेरिका अगले 10 वर्षों तक न केवल साझा सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण करेंगे, बल्कि संयुक्त हथियार निर्माण और एडवांस टेक्नोलॉजी शेयरिंग पर भी काम करेंगे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डील से दोनों देशों को चार बड़े फायदे होंगे:
1️⃣ सैन्य सहयोग में वृद्धि – दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के साथ संयुक्त अभ्यास करेंगी और सुरक्षा ऑपरेशनों में सहयोग बढ़ेगा।
2️⃣ संयुक्त उत्पादन (Joint Production) – भारत और अमेरिका मिलकर आधुनिक हथियार, रक्षा उपकरण और नई तकनीक का उत्पादन करेंगे।
3️⃣ टेक्नोलॉजी साझाकरण (Technology Transfer) – अमेरिका भारत के साथ अपनी कुछ एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी साझा करेगा, जिससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और बढ़ेगी।
4️⃣ सूचना और खुफिया साझेदारी (Intelligence Exchange) – दोनों देशों की एजेंसियां सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़ी जानकारी आपस में साझा करेंगी।
पीट हेगसेथ बोले – “भारत-अमेरिका साझेदारी अब और भी मजबूत”
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा –
“मैंने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ 10 साल का अमेरिका-भारत रक्षा समझौता साइन किया है। यह हमारी साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। दोनों देशों के बीच समन्वय, जानकारी और तकनीकी सहयोग का नया दौर शुरू हो रहा है।”
उन्होंने राजनाथ सिंह को धन्यवाद देते हुए कहा कि भारत-अमेरिका संबंध अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और भरोसेमंद रिश्तों में से एक बन चुके हैं।
हेगसेथ ने यह भी कहा कि दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए एक साथ काम करेंगे।
राजनाथ सिंह का बयान – “यह समझौता भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूती देगा”
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह डील न केवल भारत-अमेरिका संबंधों के लिए बल्कि आसियान देशों के साथ रक्षा सहयोग को भी मजबूत करेगी।
“यह समझौता भारत की ‘Act East Policy’ को और सशक्त बनाएगा। भारत अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर खुले और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक के लिए प्रतिबद्ध है।”
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि आने वाले दशक में भारत और अमेरिका रक्षा उत्पादन, साइबर सुरक्षा, समुद्री निगरानी और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में साथ काम करेंगे।
अमेरिका की नई रणनीतिक रियायत – चाबहार बंदरगाह पर भारत को राहत
इस डील से ठीक पहले अमेरिका ने भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक रियायत दी है।
अमेरिका ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर लगाए गए प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट (waiver) दी है।
पहले अमेरिका ने कहा था कि इस बंदरगाह को चलाने, वित्त देने या उससे जुड़ी किसी कंपनी को जुर्माना भुगतना होगा।
लेकिन अब उसने कहा है कि भारत की भूमिका क्षेत्रीय स्थिरता और अफगानिस्तान के व्यापार मार्गों के लिए जरूरी है।
यह बंदरगाह 10 साल की लीज पर भारत के पास है और अब भारत यहां बिना किसी अमेरिकी दबाव के विकास कार्य जारी रख सकेगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी बढ़ी गर्मी – बातचीत जारी
यह रक्षा समझौता ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के अधिकारी एक नए व्यापार समझौते (Trade Deal) पर भी चर्चा कर रहे हैं।
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है।
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा है –
“भारत कोई व्यापार समझौता जल्दीबाजी में नहीं करेगा। हम ऐसी कोई शर्त नहीं मानेंगे जो हमारे उद्योग या व्यापार के हितों के खिलाफ हो।”
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार केवल टैरिफ का खेल नहीं है, बल्कि विश्वास और साझेदारी का मामला है।
गोयल ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच न्यायसंगत और पारदर्शी व्यापार समझौता जल्द होगा।
जयशंकर और मार्को रूबियो की मुलाकात – कूटनीतिक तालमेल पर चर्चा
कुछ दिन पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मलेशिया में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की थी।
दोनों ने ऊर्जा व्यापार, एशिया-प्रशांत सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहन बातचीत की।
जयशंकर ने कहा था कि दुनिया में “ऊर्जा बाजार पर दबाव और नीतियों में दोहरा मापदंड” देखने को मिल रहा है, इसलिए अब देशों को विश्वसनीय साझेदारों के साथ काम करना चाहिए।
यह बयान अब अमेरिका-भारत रक्षा समझौते के संदर्भ में और प्रासंगिक लग रहा है।
इंडो-पैसिफिक में नई साझेदारी – चीन पर अप्रत्यक्ष संदेश
यह समझौता केवल रक्षा सहयोग नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है।
भारत और अमेरिका अब मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री निगरानी, सप्लाई चेन सुरक्षा और तकनीकी साझेदारी को बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में है।
साझेदारी का नया अध्याय – लोकतांत्रिक सुरक्षा गठजोड़ की ओर कदम
विश्लेषकों का कहना है कि भारत-अमेरिका का यह 10 साल का समझौता भविष्य में दोनों देशों को Quad (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के भीतर भी अधिक रणनीतिक भूमिका देगा। रक्षा उद्योग में Make in India और Defence Innovation Bridge जैसे प्रोजेक्ट्स को अमेरिकी समर्थन मिलने की उम्मीद है।

