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पाकिस्तान की सत्ता का नया चेहरा: Asim Munir बने सुपर CDF और आर्मी चीफ—परमाणु कमान, सेना और राजनीति पर अब उनका पूरा नियंत्रण!

Asim Munir CDF की नियुक्ति के साथ पाकिस्तान की राजनीति, सेना और रणनीतिक ढांचे में एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। गुरुवार को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने जनरल आसिम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। यह पहला मौका है जब पाकिस्तान की सैन्य संरचना में एक ही अधिकारी को दो सबसे शक्तिशाली पद सौंपे गए हैं। दोनों पदों का कार्यकाल 5 वर्ष तय किया गया है, यानी आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की राजनीतिक दिशा और रणनीतिक फैसले एक बड़े पैमाने पर मुनीर के हाथों में होंगे।


एक साथ CDF और COAS—पाकिस्तान की सेना में शक्ति का सबसे बड़ा केंद्रीकरण

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने नियुक्ति की समरी भेजी थी, जिसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी से मुनीर को औपचारिक रूप से जिम्मेदारी मिली। कुछ महीनों पहले ही वे फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत हुए थे, और अब Asim Munir CDF पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति बन चुके हैं।

नए संवैधानिक ढांचे के अनुसार, CDF को अब—

  • परमाणु हथियारों पर सीधा नियंत्रण

  • तीनों सेनाओं के बीच तालमेल की सर्वोच्च जिम्मेदारी

  • सुरक्षा और सामरिक फैसलों पर अंतिम अधिकार

—जैसे अधिकार मिल गए हैं, जिन्हें अब तक अलग-अलग संस्थाएँ संभालती थीं।


27वां संवैधानिक संशोधन—सेना को दिया गया अभूतपूर्व अधिकार

12 नवंबर को पारित 27वां संविधान संशोधन पाकिस्तान के सैन्य इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक माना जा रहा है।
इसके तहत—

  • CJCSC (चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी) का पद समाप्त किया गया

  • उसकी जगह CDF पद का निर्माण हुआ

  • परमाणु हथियारों की कमान सीधे सैन्य ढांचे को दी गई

  • प्रधानमंत्री से अधिकार हटाकर सेना के शीर्ष नेतृत्व के पास भेजे गए

इस संशोधन ने ही Asim Munir CDF पद की नींव रखी और उन्हें पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था का सर्वोच्च अधिकारी बना दिया।


परमाणु हथियारों की कमान अब पूरी तरह सेना के हाथ में—NSC का गठन

संविधान संशोधन का सबसे बड़ा बदलाव है नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड (NSC) का गठन।
यह संस्था अब—

  • परमाणु हथियारों की निगरानी

  • मिसाइल सिस्टम की कमान

  • सामरिक संचालन की योजना

जैसे अधिकार संभालेगी।

पहले यह जिम्मेदारी नेशनल कमांड अथॉरिटी (NCA) के पास थी, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते थे। अब यह अधिकार सीधे सेना के दायरे में आ चुका है।

NSC का प्रमुख—

  • सिर्फ सेना से चुना जाएगा

  • नियुक्ति प्रधानमंत्री की मंजूरी से होगी, लेकिन सिफारिश CDF देगा

इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान की सबसे संवेदनशील सैन्य क्षमता पर मुनीर का लगभग एकछत्र अधिकार हो गया है।


2022 से शुरू हुई मुनीर की यात्रा—अब पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स

29 नवंबर 2022 को आसिम मुनीर को आर्मी चीफ बनाया गया था, जिसका मूल कार्यकाल 28 नवंबर 2025 तक था।
इस अवधि को संसद ने कानून पास कर 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया था, जिससे उनकी स्थिति और मजबूत हो गई।

लेकिन जब CJCSC शाहिद शमशाद मिर्जा 27 नवंबर को रिटायर हुए, तब तक मुनीर की नई नियुक्ति पर नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ था।
इसी देरी को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में भारी हलचल हुई।


शहबाज शरीफ के ‘दूर रहने’ पर उठे सवाल—क्या यह सत्ता संघर्ष का संकेत?

कई रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम शहबाज शरीफ ने खुद को प्रक्रिया से “दूर” रखा, ताकि उन्हें विवादित दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर न करने पड़ें।
भारत के पूर्व सुरक्षा सलाहकार बोर्ड सदस्य तिलक देवाशेर ने एएनआई से कहा कि यह स्थिति बेहद असामान्य है और इससे संकेत मिलता है कि—

  • सेना का दबदबा पहले से अधिक बढ़ गया है

  • प्रधानमंत्री अपनी राजनीतिक जोखिम कम करना चाहते हैं

  • पाकिस्तान में सत्ता का केंद्र बदल रहा है

देवाशेर ने यह भी चेतावनी दी कि Asim Munir CDF अपनी शक्ति दिखाने के लिए भारत के खिलाफ किसी प्रकार का तनाव भड़काने की कोशिश कर सकते हैं।


विपक्ष का हमला—“शहबाज अब सेना पर नियंत्रण नहीं रखते”

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
“CDF नोटिफिकेशन में हुई देरी साबित करती है कि शहबाज शरीफ अब सेना पर कंट्रोल नहीं रखते।”

पीपीपी के वरिष्ठ नेता रजा रब्बानी ने पूछा—
“क्या संविधान से ऊपर कोई ‘अनकहा वीटो’ चल रहा है?”

पूर्व जनरलों ने भी नोटिफिकेशन की देरी को “सेना प्रमुख का अपमान” बताया।


संयुक्त राष्ट्र भी चिंतित—न्यायपालिका और लोकतंत्र पर असर का डर

यूएन ह्यूमन राइट्स एजेंसी के हाई कमिश्नर वोल्कर टर्क ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान का यह संशोधन—

  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता

  • लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं

  • नागरिक अधिकारों

को कमजोर कर सकता है।
हालांकि पाकिस्तान सरकार ने 30 नवंबर को इस चिंता को “गलत आशंका” करार दिया।


एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू को भी बड़ा फायदा—दो साल का एक्सटेंशन

पाकिस्तान ने सिर्फ सेना में ही नहीं, बल्कि एयर फोर्स में भी स्थिरता बनाए रखने की कोशिश की है।
एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू को दो साल का विस्तार दिया गया है, जो मार्च 2026 से लागू होगा।
यह भी संकेत है कि पाकिस्तानी सैन्य ढांचा अगले कुछ वर्षों तक एक ही नेतृत्व के अंतर्गत काम करेगा।


पाकिस्तान की नई सैन्य संरचना—राजनीतिक अस्थिरता के बीच सेना का दबदबा और मजबूत

पाकिस्तान में लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता रही है, और ऐसे में सेना हमेशा से ‘अदृश्य शक्ति केंद्र’ के रूप में देखी जाती रही है।
लेकिन अब Asim Munir CDF का अधिकार इतना व्यापक हो चुका है कि—

  • सेना

  • परमाणु हथियार

  • रणनीतिक फैसले

  • सुरक्षा नीति

सभी लगभग एक ही व्यक्ति के नियंत्रण में हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह पाकिस्तान की सैन्य-राजनीतिक संतुलन को पूरी तरह बदल देगा।


Asim Munir CDF बनने के साथ पाकिस्तान के शक्ति ढांचे में एक गहरा और निर्णायक बदलाव आ गया है। परमाणु कमान से लेकर तीनों सेनाओं के समन्वय और राजनीतिक फैसलों पर असर डालने तक, अब देश की सुरक्षा नीति एक ऐसे अधिकारी के हाथों में है जो पहले ही अत्यधिक प्रभावशाली माने जाते थे। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुनीर का यह उभार पाकिस्तान के भीतर स्थिरता लाता है या दक्षिण एशिया में नया तनाव पैदा करता है।

 

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