ईमानदारी अभी जिंदा है: प्रधान के पुत्रों ने दो लाख 70 हजार रुपये के स्टांप लौटाए
आज जब बेमानी के अंधेरे की लाखों मिसालें मिलती रहती है वहीं बीच मे ईमानदारी की किरण भी बे मानी के अंधेरे को चीरती हुई यदाकदा सामने आती रहती है ऐसा ही एक मामला आज देखने को मिला जब प्रधान के पुत्रों ने दो लाख 70 हजार रुपये के स्टांप लौटाए
दरअसल तहसील परिसर में बैठकर स्टांप बेचने वाले नईम अहमद व उनके साथियों के करीब दो लाख 70 हजार के स्टांप मुजफ्फरनगर के मीनाक्षी चौराहे के आसपास कहीं रास्ते में गुम हो गए थे।
लगभग पौने तीन लाख रुपए के स्टांप गुम हो जाने से परेशान नईम व उसके साथी बुरी तरह से चिंतित थे। उधर उनके परिवार वाले भी इसे लेकर अंदर ही अंदर बुरी तरह से परेशान थे।
स्टांप विक्रेता ने मामले की पुलिस को सूचना देते हुए स्टांप गुम हो जाने की बात को व्हाट्सएप व अन्य सोशल मीडिया ग्रुपों पर वायरल कर लोगों से स्टांप ढूंढने में सहयोग मांगा। आखिरकार पुलिस और स्टांप विक्रेता के प्रयास और की गई भागदौड़ रंग ले आई।
सूचना तंत्र के मजबूत होते सोशल मीडिया के इस दौर में जब विक्रेता के स्टांप खो जाने की सूचना मुजफ्फरनगर के ग्राम कुटेसरा के प्रधान के भतीजे इमरान त्यागी पुत्र मुर्तजा त्यागी व उसके भाई मोहसिन त्यागी पुत्र मुस्तफा त्यागी निवासी कुटेसरा थाना चरथावल को लगी
तो उन्होंने किसी माध्यम से पीड़ित नईम को यह खबर कराई कि उसके स्टांप रास्ते में उन्हें पड़े हुए मिल गए थे और उन्होंने वह स्टांप मीनाक्षी चौक पर स्थित एक पान वाले की दुकान पर सुरक्षित रख रखें हैं। ताकि कोई मीनाक्षी चौक के आस पास ढूंढता हुआ आये तो वहां से प्राप्त कर लें।
पीड़ित नईम को जैसे ही यह जानकारी मिली तो उसने कुटेसरा वालों से संपर्क किया। बाद में सभी लोग थाना सिविल लाइन पहुंचकर थाना प्रभारी डी के त्यागी से मिले।
थाना प्रभारी ने तुरंत पूरी तत्परता और तल्लीनता के साथ स्टेडियम चौकी इंचार्ज जबर सिंह को मीनाक्षी चौक पर उक्त दुकान पर भेजा और वहां से सभी स्टॉम्प लेकर चौकी पर आने के बाद लिखा पढ़ी करके पीड़ित नईम व उसके साथियों को दिए जाने के निर्देश दिए।
बाद में लिखापढी कर जब चौकी इंचार्ज ने 2 लाख 70 हजार रुपए के स्टांप नईम व उसके साथियों को सौंपे तो उनकी व परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
पीड़ित नईम व उनके साथियों ने कुटेसरा वाले युवकों का दिल से आभार व्यक्त करते हुए उनका धन्यवाद अदा किया तथा दिल से सैल्यूट भी किया।
