Maharashtra के पूर्व मंत्री Anil Deshmukh को राहत-जमानत आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इंकार
Supreme Court ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री Anil Deshmukh को बड़ी राहत दी. मुंबई हाई कोर्ट ने देशमुख को ज़मानत दे दी थी, जिसके ख़िलाफ़ ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि वो हाई कोर्ट के ज़मानत के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेंगे. देशमुख को पिछले साल 2 नवंबर को मनी लॉड्रिंग मामले में ED ने गिरफ़्तार किया था. मुंबई हाई कोर्ट ने 4 अक्टूबर को ज़मानत का आदेश पारित किया था.
Supreme Court ने सोमवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय को धनशोधन के एक मामले में गिरफ्तार किए गए महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर शीघ्र फैसला करने का निर्देश दिया था. न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि देशमुख की जमानत अर्जी उच्च न्यायालय में 21 मार्च से लंबित है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि वो 1 हफ्ते के अंदर अनिल देशमुख की बेल पर सुनवाई करे और आर्डर दे.
हालांकि अनिल देशमुख की जमानत का विरोध करते हुए ईडी की तरफ से पैरवी कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कोर्ट में कहा कि जेल में बद Anil Deshmukh को अगर जमानत दी जाती है तो इसका मतलब होगा कि वो PMLA के तहत मुख्य आरोपी ही नही है.
आर्थिक अपराध गंभीर है और यह देश की वित्तीय ताकत को प्रभावित करता है. ऐसे में जमानत देते वक्त अदालत को यह मानना होगा कि आरोपी बिल्कुल भी शामिल नहीं है.

