DDU Junction पर RPF का बड़ा एक्शन: ऑपरेशन आहट में 5 नाबालिगों को बाल मजदूरी से बचाया, दिल्ली ले जा रहे आरोपी गिरफ्तार
RPF child rescue DDU Junction—चंदौली जिले के डीडीयू जंक्शन पर एक बार फिर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने सतर्कता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने न केवल पांच मासूम बच्चों का भविष्य बचाया, बल्कि समाज के उस काले सच पर भी रोशनी डाली, जहां गरीबी और मजबूरी का फायदा उठाकर नाबालिगों को बाल मजदूरी की चक्की में झोंकने की कोशिश की जाती है।
ऑपरेशन आहट के तहत की गई इस कार्रवाई में आरपीएफ ने ट्रेन से दिल्ली ले जाए जा रहे बच्चों को समय रहते रेस्क्यू कर लिया और एक ऐसे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, जो कथित तौर पर मासूमों को बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर मजदूरी के लिए महानगरों तक पहुंचाता है।
🔴 डीडीयू जंक्शन: जहां हर पल रहती है सतर्क निगाह
डीडीयू जंक्शन पूर्वोत्तर रेलवे का एक व्यस्त और संवेदनशील स्टेशन है। यहां से देश के अलग-अलग राज्यों की ओर जाने वाली दर्जनों ट्रेनें गुजरती हैं। इसी वजह से यह स्टेशन अवैध गतिविधियों के लिहाज से भी हमेशा हाई अलर्ट जोन माना जाता है।
आरपीएफ की टीम यहां नियमित रूप से शराब तस्करी, मोबाइल छिनैती, चांदी तस्करी और मानव तस्करी जैसे मामलों पर नजर रखती है। कभी किसी अपराधी को पकड़ना, तो कभी जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों की मदद करना—आरपीएफ की मौजूदगी यहां यात्रियों के लिए सुरक्षा की गारंटी बन चुकी है।
🔴 ऑपरेशन आहट: बाल मजदूरी के खिलाफ मोर्चा
आरपीएफ डीडीयू पोस्ट के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत के नेतृत्व में चलाए गए ऑपरेशन आहट का मकसद बाल मजदूरी और मानव तस्करी जैसे अपराधों को जड़ से खत्म करना है। इस अभियान में बचपन बचाओ आंदोलन, चाइल्ड हेल्प डेस्क और सीआईबी (क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच) की टीम ने मिलकर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है, ताकि स्टेशन और ट्रेनों में हर संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
इस बार भी इसी समन्वय और सतर्कता ने पांच बच्चों की जिंदगी की दिशा बदल दी।
🔴 मुखबिर की सूचना और ट्रेन की घेराबंदी
सूचना मिली कि ट्रेन संख्या 12487 सीमांचल एक्सप्रेस में कुछ नाबालिग बच्चों को संदिग्ध हालात में ले जाया जा रहा है। जैसे ही ट्रेन डीडीयू जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 06 पर पहुंची, आरपीएफ की टीम पहले से तैयार थी।
टीम ने ट्रेन की पिछली जनरल कोच की तलाशी ली, जहां पांच बच्चे डरे-सहमे हालत में बैठे मिले। उनके साथ एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति मौजूद था, जिसकी गतिविधियां संदिग्ध लग रही थीं। बच्चों के चेहरे पर घबराहट और अनजान शहर की ओर जाने का डर साफ झलक रहा था।
🔴 पूछताछ में खुला पूरा मामला
आरपीएफ ने उस व्यक्ति और बच्चों को आगे की पूछताछ के लिए पोस्ट पर बुलाया। प्राथमिक पूछताछ में बच्चों ने अपना नाम और उम्र बताई—
फरियाद (12 वर्ष)
मो. नवाजिश (13 वर्ष)
रहमत (14 वर्ष)
अंजार (14 वर्ष)
हसनैन (15 वर्ष)
राहुल भुइयां (17 वर्ष)
सभी बच्चे बिहार के अररिया जिले के निवासी बताए गए। बच्चों ने बताया कि उन्हें ले जाने वाला व्यक्ति माजिद (40 वर्ष), निवासी थाना महलगांव, जिला अररिया, बिहार है।
🔴 दिल्ली में मजदूरी का लालच
पूछताछ में यह सामने आया कि आरोपी माजिद बच्चों को दिल्ली के उस्मानपुर इलाके में एक बिंदी बनाने वाली कंपनी में काम दिलाने के लिए ले जा रहा था। उसने बच्चों से कहा था कि उन्हें 12 घंटे काम के बदले करीब 10,000 रुपये महीना मिलेगा।
लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा कड़वी थी। बच्चों के परिजनों को प्रति बच्चा सिर्फ 2,000 से 5,000 रुपये की मामूली रकम अग्रिम देकर उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि उनके बच्चों को “अच्छा काम” मिलेगा। परिजनों को यह नहीं बताया गया कि बच्चों से किस तरह का काम कराया जाएगा, कितने घंटे काम होगा और उनकी सुरक्षा का क्या इंतजाम होगा।
🔴 आरोपी की स्वीकारोक्ति
आरपीएफ की सख्त पूछताछ में माजिद ने कबूल किया कि उसने बच्चों के टिकट अपने खर्च पर कराए, उन्हें खाना खिलाया और माता-पिता को पैसे देकर दिल्ली ले जा रहा था। उसका मकसद बच्चों को बाल मजदूरी में लगाना था।
इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि यह केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जहां गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को बड़े शहरों में मजदूरी के लिए भेजा जाता है।
🔴 चाइल्ड हेल्प डेस्क को सौंपे गए बच्चे
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरपीएफ ने सभी नाबालिग बच्चों को तुरंत रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से चाइल्ड हेल्प डेस्क को सौंप दिया। यहां बच्चों की काउंसलिंग, मेडिकल जांच और उनके परिजनों से संपर्क की प्रक्रिया शुरू की गई।
बच्चों के परिवारों को सूचना दी गई और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनके बच्चे सुरक्षित हैं। सामाजिक संगठनों की मदद से बच्चों को उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
🔴 आरोपी पर कानूनी शिकंजा
आरोपी माजिद को अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए कोतवाली मुगलसराय को सौंप दिया गया है। उसके खिलाफ बाल श्रम निषेध कानून और मानव तस्करी से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि माजिद अकेला था या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा है, जो बिहार और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से बच्चों को दिल्ली और अन्य महानगरों में भेजता है।
🔴 टीमवर्क बना सफलता की कुंजी
इस पूरे अभियान में आरपीएफ और सहयोगी संगठनों की भूमिका सराहनीय रही। उप निरीक्षक सुनील कुमार, सहायक उप निरीक्षक राकेश कुमार सिंह, आरक्षी अशोक यादव, सीआईबी के सहायक उप निरीक्षक सतीश सिंह, आरक्षी अवधेश प्रताप पांडेय, बचपन बचाओ आंदोलन से चंदा गुप्ता और चाइल्ड हेल्प डेस्क से शब्बो कुमारी ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया।
इन सभी की सतर्कता और संवेदनशीलता ने पांच बच्चों का बचपन और भविष्य दोनों बचा लिया।
🔴 बाल मजदूरी: एक सामाजिक चुनौती
भारत में बाल मजदूरी आज भी एक बड़ी सामाजिक समस्या है। गरीबी, अशिक्षा और रोजगार की कमी के कारण कई परिवार अपने बच्चों को काम पर भेजने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में तस्कर और दलाल इन हालात का फायदा उठाते हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रेलवे स्टेशन और बस अड्डे बच्चों की तस्करी के लिए सबसे संवेदनशील स्थानों में गिने जाते हैं। इसी वजह से आरपीएफ और चाइल्ड हेल्प डेस्क जैसे तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।
🔴 समाज की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से ही इस समस्या का समाधान नहीं होगा। समाज को भी सतर्क रहना होगा। अगर कहीं बच्चों को संदिग्ध हालात में ले जाया जा रहा हो, तो तुरंत स्थानीय प्रशासन या चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना देना जरूरी है।
डीडीयू जंक्शन पर हुई यह कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि अगर सही समय पर सही कदम उठाया जाए, तो कई जिंदगियां बेहतर दिशा में मोड़ी जा सकती हैं।
🔴 RPF की सतर्कता बनी मिसाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आरपीएफ सिर्फ रेलवे की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग—बच्चों—की रक्षा में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।
डीडीयू जंक्शन पर ऑपरेशन आहट के तहत की गई यह कार्रवाई न केवल कानून की जीत है, बल्कि इंसानियत की भी।

