Sergio Gore होंगे भारत में अमेरिकी राजदूत, ट्रम्प ने दी नई जिम्मेदारी – एशिया में बढ़ेंगे अमेरिका-भारत संबंध
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को घोषणा की कि Sergio Gore को भारत में अगला अमेरिकी राजदूत नियुक्त किया गया है। उन्हें दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत की जिम्मेदारी भी दी गई है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवाद लगातार बढ़ रहे हैं।
सर्जियो गोर की नियुक्ति और उनके पूर्ववर्ती
सर्जियो गोर, भारत में पूर्व अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी की जगह लेंगे। गार्सेटी ने इस पद पर 11 मई 2023 से 20 जनवरी 2025 तक काम किया। उनके पहले केनेथ जस्टर भारत में अमेरिकी राजदूत रहे थे, जिन्होंने 23 नवंबर 2017 से 20 जनवरी 2021 तक सेवा दी थी। गार्सेटी के जाने के बाद से दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास का अंतरिम चार्ज डि’अफेयर्स जॉर्गन के. एंड्रयूज संभाल रहे थे।
गार्सेटी अपने अंतिम हफ्तों में कई भाषणों में भारत-अमेरिका साझेदारी को लेकर “शांति, समृद्धि और वैश्विक उपलब्धियां” का उल्लेख कर चुके थे।
सर्जियो गोर का करियर और ट्रम्प का भरोसा
सर्जियो गोर वर्तमान में प्रेसिडेंशियल पर्सनल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर लिखा कि गोर और उनकी टीम ने रिकॉर्ड समय में करीब 4 हजार ‘अमेरिका फर्स्ट’ पैट्रियट्स की भर्ती की है। ट्रम्प ने उन्हें अपने करीबी दोस्त बताया और कहा कि उन पर पूरा भरोसा है।
ट्रम्प ने आगे कहा कि सर्जियो कई सालों से उनके साथ हैं। उन्होंने ट्रम्प के ऐतिहासिक राष्ट्रपति चुनाव अभियानों में अहम भूमिका निभाई, उनकी बेस्टसेलर किताबें प्रकाशित कीं और उनके समर्थन वाले सुपर PAC का मैनेजमेंट किया। प्रेसिडेंशियल पर्सनल डायरेक्टर के रूप में गोर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है और एशिया जैसे सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में उनकी नियुक्ति नीतियों को लागू करने में निर्णायक साबित होगी।
भारत-अमेरिका व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवाद
सर्जियो गोर की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत को अमेरिकी व्यापार टैरिफ का 50% तक सामना करना पड़ रहा है। इसमें रूस से तेल खरीद पर 25% की अतिरिक्त पेनल्टी भी शामिल है। अमेरिकी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में कहा गया है कि यह कार्रवाई रूसी तेल की खरीद के कारण की गई है। इससे पहले 30 जुलाई को भारत पर 25% टैरिफ का ऐलान किया गया था। अब कुल 50% टैरिफ लागू होगा।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर सर्जियो गोर की भूमिका
सर्जियो गोर का कार्यकाल केवल राजनयिक पद नहीं होगा। उनका लक्ष्य भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका अहम होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि गोर की नियुक्ति भारत में अमेरिकी नीतियों के प्रभाव को बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों में संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। उनकी नियुक्ति से यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक विवाद और टैरिफ मुद्दों पर संवाद तेज होगा।
सर्जियो गोर के प्रयास और अमेरिका-भारत सहयोग
गोर की नियुक्ति से भारत और अमेरिका के बीच शिक्षा, ऊर्जा, निवेश और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है। ट्रम्प प्रशासन ने उनके अनुभव और भरोसे को देखते हुए उन्हें एशिया में अपनी नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी दी है। उनके अनुभव से यह भी संभावना जताई जा रही है कि भारत-अमेरिका रिश्ते न केवल व्यापार बल्कि वैश्विक रणनीति के स्तर पर भी मजबूत होंगे।
व्यापारिक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाएं
टैरिफ विवाद के बीच भारत को अमेरिका के उच्च टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सर्जियो गोर की नियुक्ति व्यापारिक मुद्दों पर समझौता करने और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने में सहायक हो सकती है।
भविष्य में सर्जियो गोर की अहमियत
सर्जियो गोर की नियुक्ति से न केवल अमेरिका-भारत के राजनयिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका की रणनीतिक स्थिति भी मजबूती से स्थापित होगी। उनके नेतृत्व में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।

