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मणिपुर में स्थायी शांति की दिशा में बढ़ते कदम: India-Myanmar सीमा पर बाड़ और आतंकवाद के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि सरकार मणिपुर में स्थायी शांति बहाल करने के लिए मेइती और कुकी समुदायों से सक्रिय बातचीत कर रही है। इसके अलावा, India-Myanmar  सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए बाड़ लगाने की प्रक्रिया को भी तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह पहल मणिपुर में हाल ही के वर्षों में फैली हिंसा और अस्थिरता के मद्देनज़र महत्वपूर्ण है।

मणिपुर की ताज़ा स्थिति और सरकार की रणनीति

मणिपुर में पिछले कुछ समय से जातीय और सामुदायिक तनाव का माहौल बना हुआ है। मेइती और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष के चलते कई हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें दोनों समुदायों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हो चुकी है। गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मणिपुर में तीन दिनों की हालिया हिंसा को छोड़ दिया जाए तो वर्तमान स्थिति काफ़ी हद तक शांतिपूर्ण है।

शाह ने बताया कि सरकार मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है और इसके लिए दोनों समुदायों से बातचीत की जा रही है। मणिपुर में स्थायी शांति के लिए एक खाका भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें दोनों समुदायों की चिंताओं और मांगों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है।

म्यांमार से घुसपैठ पर रोक: सीमा पर बाड़ लगाने की पहल

India-Myanmar के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा पर घुसपैठ और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। अमित शाह ने बताया कि म्यांमार के साथ लगती सीमा पर 30 किलोमीटर तक बाड़ लगाने का काम पूरा हो चुका है और इस परियोजना के लिए 1,500 किलोमीटर की सीमा के लिए धनराशि भी स्वीकृत कर दी गई है। इससे मणिपुर और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों में अवैध आवागमन, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी जैसी समस्याओं को रोकने में मदद मिलेगी।

India-Myanmar मुक्त आवागमन व्यवस्था (एफएमआर) का अंत

मणिपुर और म्यांमार के बीच ‘भारत-म्यांमार मुक्त आवागमन व्यवस्था’ (एफएमआर) लागू थी, जो सीमा के पास रहने वाले लोगों को बिना किसी दस्तावेज के 16 किलोमीटर तक एक-दूसरे के क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति देती थी। यह नीति 2018 में भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत और म्यांमार के बीच व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना था।

हालांकि, हाल के वर्षों में इस नीति का दुरुपयोग देखा गया है, जहां आतंकवादियों और तस्करों ने इसका फायदा उठाकर मणिपुर में अस्थिरता फैलाने की कोशिश की। अमित शाह ने बताया कि अब यह नीति समाप्त कर दी गई है और अब दोनों देशों के लोग केवल वीज़ा के साथ ही एक-दूसरे के क्षेत्र में प्रवेश कर सकेंगे। यह कदम सीमा सुरक्षा को मज़बूत करेगा और आतंकवाद, घुसपैठ और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद करेगा।

मणिपुर हिंसा का इतिहास: एक नज़र

मणिपुर में हिंसा का सिलसिला 3 मई 2022 से शुरू हुआ जब मेइती समुदाय ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा पाने की मांग की। इस मांग के विरोध में आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया था, जिसके बाद राज्य के पहाड़ी जिलों में हिंसा भड़क गई। इस हिंसा में अब तक 220 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।

मेइती समुदाय, जो मणिपुर की कुल जनसंख्या का लगभग 53% है, का प्रमुख निवास इम्फाल घाटी में है। वहीं, कुकी और अन्य आदिवासी समुदाय मुख्यतः पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं, जो राज्य के लगभग 40% क्षेत्र को कवर करते हैं। इन दोनों समुदायों के बीच जारी संघर्ष ने मणिपुर को लंबे समय से अस्थिर बना रखा है, जिससे राज्य में विकास और शांति प्रक्रिया पर भी प्रभाव पड़ा है।

भारत-म्यांमार संबंध: चुनौतियाँ और संभावनाएं

भारत और म्यांमार के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध काफी पुराने हैं। म्यांमार भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है, विशेषकर पूर्वोत्तर भारत के लिए। दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ सुरक्षा के मुद्दों पर भी सहयोग हो रहा है।

हालांकि, म्यांमार में हालिया राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य शासन के आने के बाद से भारत के लिए नई चुनौतियां उत्पन्न हो गई हैं। म्यांमार की सीमा से लगते भारतीय राज्यों, विशेषकर मणिपुर, मिज़ोरम और नागालैंड में घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है।

भारत ने म्यांमार के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग बढ़ाया है। हाल के वर्षों में भारत ने म्यांमार की सीमा पर आतंकवादी ठिकानों पर भी हमला किया है, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय आतंकवादी समूहों को कमजोर करना था।

मणिपुर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा पर जोर

मणिपुर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा की स्थिति लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रही है। क्षेत्र में अलगाववादी समूह, ड्रग्स की तस्करी और घुसपैठ जैसे मुद्दे राज्य की स्थिरता को प्रभावित करते हैं। मणिपुर के अलावा, नागालैंड और मिज़ोरम में भी सुरक्षा को लेकर कई समस्याएं हैं। म्यांमार की सीमा से सटे इन राज्यों में आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां बढ़ने से स्थिति और जटिल हो जाती है।

भारत सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें सीमा पर बाड़ लगाना, आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज़ करना और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित करना शामिल है।

वीजा और आव्रजन नीति में बदलाव

म्यांमार से लगते क्षेत्रों में भारत ने आव्रजन नीति में भी बड़े बदलाव किए हैं। एफएमआर (मुक्त आवागमन व्यवस्था) के खत्म होने के बाद अब सीमा पार करने के लिए वीजा अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए लिया गया है, ताकि आतंकवादी और तस्कर सीमा पार कर भारत में प्रवेश न कर सकें।

सरकार की यह पहल पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद और तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगी।

भारत की एक्ट ईस्ट नीति और मणिपुर की भूमिका

भारत की एक्ट ईस्ट नीति के तहत पूर्वोत्तर राज्यों को म्यांमार और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ बेहतर आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों से जोड़ा जा रहा है। मणिपुर, जो म्यांमार से सटा हुआ है, इस नीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

हालांकि, मणिपुर में जारी अशांति और सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों के चलते एक्ट ईस्ट नीति के तहत विकास परियोजनाओं को पूरी तरह से लागू करना कठिन साबित हो रहा है। इसके बावजूद, भारत सरकार पूर्वोत्तर राज्यों में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बड़े निवेश कर रही है।

मणिपुर में स्थायी शांति और म्यांमार से लगती सीमा पर सुरक्षा की दिशा में उठाए गए सरकार के कदम निस्संदेह एक सकारात्मक पहल हैं। दोनों समुदायों के बीच संवाद, सीमा पर बाड़ लगाना, और आव्रजन नीति में बदलाव से न केवल मणिपुर में शांति बहाल होगी, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

भारत और म्यांमार के बीच बेहतर संबंध और सहयोग से दोनों देशों के बीच आतंकवाद और तस्करी जैसी चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है। मणिपुर की सुरक्षा और विकास के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

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