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ISRO की 100वीं उड़ान: भारत के नेविगेशन सिस्टम में नया सितारा

ISRO की स्थापना 1969 में हुई थी, और तब से लेकर अब तक संगठन ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। 1975 में भारत का पहला सैटेलाइट आर्यभट्ट लॉन्च किया गया, और 1980 में रोहिणी सैटेलाइट RS-1 को स्वदेशी SLV-3 रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया गया। 2014 में मंगलयान मिशन की सफलता और 2023 में चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग ने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान दिलाया है।

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ISRO का नया अध्याय: PROBA-3 सैटेलाइट लॉन्चिंग में देरी, जानिए सूर्य के रहस्यों की खोज का सफर

ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि PROBA-3 अंतरिक्ष यान में एक तकनीकी गड़बड़ी का पता चलने के कारण प्रक्षेपण को रोका गया। इसरो के वैज्ञानिकों ने इसे एक “सावधानीपूर्वक निर्णय” बताते हुए कहा कि मिशन की सफलता सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।

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ISRO का क्रांतिकारी कदम: इलेक्ट्रिक थ्रस्टर की मदद से अंतरिक्ष में नई ऊँचाइयाँ छूने की तैयारी

ISRO ने पहले भी कई सफलताओं का सामना किया है। मई 2017 में, जीसैट-9 उपग्रह में पहली बार ईपीएस का उपयोग किया गया था। हालांकि, यह प्रणाली पूरी तरह से रूस में तैयार की गई थी। अब, ISRO अपनी खुद की तकनीक के माध्यम से इस प्रणाली का विकास कर रहा है, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

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पीएसएलवी ने शून्य कक्षीय मलबा मिशन पूरा कर लिया- ISRO

ISRO ने इसमें निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है. इसरो हाल के कुछ महीनों में कई नवीनतम प्रयोग किए हैं. हाल ही में इसरो की रियूजेबल लॉन्च व्हीकल तकनीक का सफल परीक्षण किया गया था. इसे रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल पुष्पक नाम दिया गया था.

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सन-अर्थ लैग्रेंज प्वाइंट 1 (एल1) की ओर अपना रास्ता तलाश रहा है Aditya L-1

Aditya L-1 के लगभग 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर लैग्रेंजियन बिंदु ‘एल1’ के आसपास ‘हेलो’ कक्षा में स्थापित होने की उम्मीद है, जिसे सूर्य के सबसे करीब माना जाता है. यह सूर्य के चारों ओर उसी सापेक्ष स्थिति में चक्कर लगाएगा और इसलिए यह लगातार सूर्य को देख सकता है.

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IN-SPACe से अंतरिक्ष में और आत्मनिर्भर बनेगा भारत, आधुनिक भारत की विकास यात्रा में एक शानदार अध्याय जुड़ा- Prime Minister Narendra Modi

उद्घाटन के बाद Prime Minister Narendra Modi ने मुख्यालय का निरीक्षण किया। बता दें कि इस प्रोजेक्ट को जून 2020 में केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिली थी। आज उद्घाटन के बाद जब IN-SPACe को लेकर मीडिया में खूब चर्चा हो रही है। आइए जानते हैं क्या है IN-SPACe और भारत के लिए क्यों ये इतना अहम है।

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Indian scientists develop ‘space bricks’ : Plos One जर्नल’ में इसरो की शोध प्रकाशित: भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाई अंतरिक्ष में मकान के लिए ईंटें

इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस (आइआइएससी), बंगलुरु और इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन (इसरो) ने मिलकर ‘अंतरिक्ष ईंट’ तैयार की है। इस ईंट की मदद से मंगल पर इमारतें बनाई जा सकती हैं।

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मिशन गगनयान: चार यात्रियों का हुआ चुनाव

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के अध्यक्ष के सिवन ने नए साल के मौके पर देशवासियों के सामने बीते

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उपग्रह कार्टोसैट-3 सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित

भारत की आंख कहे जाने वाले कार्टोसैट सीरीज के नवीनतम उपग्रह कार्टोसैट-3 को सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित कर

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