Amandeep Singh की अदम्य कहानी: 4 साल की उम्र में दोनों पैर खोए, आज 140 किलो वेट उठा रहे—पैरा गेम्स के स्टार का लक्ष्य अब पैरालिंपिक गोल्ड
पंजाब के लुधियाना में वेट उठाते, चेस्ट एक्सरसाइज करते और नए जिम मेंबर्स को तकनीक सिखाते Amandeep Singh को देखकर कोई नहीं कह सकता कि इस युवा खिलाड़ी के दोनों पैर घुटने के नीचे से नहीं हैं। जिम के फर्श पर उनके हाथों की पकड़, स्टैमिना और दमखम किसी भी सामान्य एथलीट से कम नहीं।
amandeep singh para athlete आज पैरा गेम्स की दुनिया में एक उभरते सितारे हैं—और उनका लक्ष्य साफ है: इंडिया के लिए पैरालिंपिक में गोल्ड जीतना।
4 साल की उम्र में सड़क हादसे में दोनों पैर गंवाए—पर जिंदगी ने कभी हरा नहीं पाया
अमनदीप का जन्म 1996 में गुरदासपुर में हुआ।
साल 1999 में सिर्फ 4 साल की उम्र में एक ट्रक ने उन्हें टक्कर मारी और डॉक्टरों को उनके दोनों पैर काटने पड़े।
लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने इस बच्चे की हिम्मत नहीं छीनी—बल्कि भीतर की जिद और मजबूत हुई।
चलना मुश्किल
स्कूल जाना चुनौती
नौकरी मिलना लगभग नामुमकिन
इसके बावजूद अमनदीप ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की और खुद को कभी पीछे नहीं माना।
बिना कोचिंग के पैरा गेम्स में पहुंचे—लक्ष्य बना जीवन का सबसे बड़ा सहारा
अमनदीप बताते हैं कि उन्हें कोई औपचारिक कोच नहीं मिला।
लेकिन खेलों के प्रति जुनून इतना था कि खुद सीखते हुए वह नेशनल लेवल तक पहुंच गए।
2023 पैरा नेशनल गेम्स में टॉप 5 में जगह बनाई।
2024 में खेले इंडिया मूवमेंट में फाइनल तक पहुंचे।
उनका कहना है—
“मैं इंटरनेशनल लेवल पर शॉटपुट में मेडल जीतना चाहता हूं। अब पैरालिंपिक के लिए तैयारी कर रहा हूं।”
140 किलो वेट उठाकर करते हैं एक्सरसाइज—जिम में नए लोगों को देते हैं ट्रेनिंग
दोनों पैर न होने के बावजूद अमनदीप की जिम लिमिट 140 किलो वेटलिफ्टिंग तक पहुंच गई है।
वे शॉटपुट और वेटलिफ्टिंग के लिए रोज घंटों जिम में पसीना बहाते हैं।
बेंच प्रेस पर महारत
हैंड स्ट्रेंथ लाजवाब
एक्सरसाइज में तकनीक 100% सटीक
नए जिम मेंबर्स को पूरी प्रोफेशनल गाइडेंस
जिम के कई लोगों ने बताया कि अमनदीप की एक्सरसाइज रुटीन देखकर सामान्य एथलीट भी प्रेरित हो जाते हैं।
जब पहली बार जिम पहुंचे थे, लोग बोले—“ये क्या करेगा?”… प्लास्टिक की बाल्टी ने दी सहारा
अमनदीप बताते हैं कि जब उन्होंने करीब दो साल पहले जिम ज्वाइन किया था, तब लोगों को आश्चर्य हुआ था कि वह कैसे वर्कआउट करेंगे।
“जिम स्टेशन पर एडजस्ट होना सबसे बड़ी चुनौती थी,” वे बताते हैं।
शुरुआत में उन्होंने प्लास्टिक की बाल्टी में बैठकर एक्सरसाइज की और धीरे-धीरे अपनी तकनीक विकसित कर ली।
अब हालत यह है कि वे जिम में सबसे भारी वेट उठाने वालों में शामिल हैं।
हाल ही में उन्हें इंजरी हुई, लेकिन कुछ आराम के बाद वे फिर तैयारी में जुट गए हैं।
2020 में मां की मौत—डिप्रेशन में गए, लेकिन खेलों ने संभाला
अमनदीप बताते हैं कि उनकी मां कैंसर से जूझ रही थीं और 2020 में उनका निधन हो गया।
मां को खोने के बाद अमनदीप कुछ महीनों तक डिप्रेशन में रहे, लेकिन स्पोर्ट्स ने उन्हें दोबारा जिंदगी की ओर वापस लाया।
टीवी पर पैरालिंपिक देखकर उनके मन में नया सपना जागा—
“जब मैंने टीवी पर पैरा एथलीट्स को मेडल जीतते देखा, तो मैंने तय किया कि मैं भी एक दिन इंडिया को रिप्रेजेंट करूंगा।”
2020 में शूटिंग से शुरुआत, 2022 में शॉटपुट—अब लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय पदक
अमनदीप ने 2020 में शूटिंग शुरू की, लेकिन मूवमेंट की वजह से उन्हें कठिनाइयाँ आईं।
2022 में उन्होंने शॉटपुट पर फोकस किया और यहीं उन्हें अपनी असली दिशा मिली।
आज वे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बना रहे हैं।
बहनों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं
खेल के साथ-साथ अमनदीप परिवार की जिम्मेदारी भी उठा रहे हैं—
दो बहनों की पढ़ाई
उनकी शादी
घर खर्च
लुधियाना में मौसी की मोबाइल शॉप पर काम
वह दिन में दुकान संभालते हैं और उसके बाद प्रैक्टिस व जिम में समय देते हैं।
कहते हैं—
“मेरे पास पैर नहीं हैं, लेकिन जिम्मेदारी से भागना मेरे खून में नहीं है।”
समाज के लिए संदेश—“लोग क्या कहेंगे, यह सोचकर जीवन मत रोकिए”
अमनदीप कहते हैं—
“जब पैर नहीं थे, लोग कहते थे ये क्या करेगा। जब जिम गया, तो लोग कहते थे एक्सरसाइज कैसे करेगा।
लेकिन मैंने हर बार सिर्फ एक चीज सोची—मैं करूंगा और करके दिखाऊंगा।”
उनकी कहानी आज भारत के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

