उत्तर प्रदेश

Varanasi Encounter: कॉलोनाइजर हत्याकांड का एक लाख का इनामी शूटर बनारसी यादव ढेर, 166 दिन बाद STF की बड़ी कार्रवाई

Varanasi encounter  वाराणसी जिले में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम हत्याकांड के मुख्य आरोपी और एक लाख रुपये के इनामी शूटर बनारसी यादव को विशेष कार्य बल यानी स्पेशल टास्क फोर्स ने मुठभेड़ में मार गिराया। 166 दिनों से फरार चल रहे इस आरोपी की तलाश में पुलिस और एसटीएफ की टीमें लगातार दबिश दे रही थीं।


🔴 चौबेपुर रिंग रोड पर रात का एनकाउंटर

यह मुठभेड़ चौबेपुर थाना क्षेत्र के बारियासनपुर रिंग रोड के पास हुई। एसटीएफ की वाराणसी इकाई को गुप्त सूचना मिली थी कि बनारसी यादव गाजीपुर-वाराणसी हाईवे के रास्ते किसी सुरक्षित ठिकाने की ओर भागने की फिराक में है। सूचना मिलते ही संबंधित थाने की फोर्स और एसटीएफ की टीमों ने इलाके की घेराबंदी कर दी।

जैसे ही बनारसी यादव ने खुद को घिरा देखा, उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर गिर पड़ा। गंभीर हालत में उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


🔴 मौके से बरामद हुआ भारी असलहा

एनकाउंटर के बाद पुलिस ने घटनास्थल से दो पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बनारसी यादव पूरी तैयारी के साथ फरार था और किसी भी स्थिति में पुलिस से भिड़ने को तैयार था।

STF के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई कॉलोनाइजर हत्याकांड के मुख्य सूत्रधार तक पहुंचने में एक अहम कड़ी साबित हो सकती है।


🔴 कौन था बनारसी यादव: अपराध की लंबी फेहरिस्त

बनारसी यादव, मूल रूप से गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के गौरहट गांव का निवासी था। उसके खिलाफ वाराणसी, गाजीपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों में 24 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसका पहला मामला वर्ष 2003 में गाजीपुर के खानपुर थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद लगातार लूट, हत्या, रंगदारी और अवैध हथियारों से जुड़े कई मामलों में उसका नाम सामने आता रहा।


🔴 कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या का पूरा घटनाक्रम

21 अगस्त 2025 को वाराणसी के सिंहपुर इलाके में बाइक सवार तीन शूटरों ने कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह वारदात उस समय हुई, जब महेंद्र गौतम अपने नियमित काम से लौट रहे थे।

घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीमों ने मामले की जांच शुरू की और बनारसी यादव को मुख्य शूटर के रूप में चिह्नित किया।


🔴 एक-एक कर गिरते गए आरोपी

इस केस में पहले ही 4 जनवरी को दूसरे शूटर अरविंद यादव उर्फ फौजी को सारनाथ पुलिस और क्राइम ब्रांच ने मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया था। तीसरे शूटर विशाल की तलाश में अभी भी दबिश जारी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क में शामिल सभी लोगों तक पहुंचने के लिए तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय इनपुट का इस्तेमाल किया जा रहा है।


🔴 29 बिस्वा जमीन और 60 करोड़ का विवाद

जांच में सामने आया कि महेंद्र गौतम की हत्या की सुपारी गाजीपुर निवासी जोगेंद्र यादव उर्फ फैटू ने दी थी। यह विवाद 29 बिस्वा जमीन को लेकर था, जिसकी कीमत लगभग 60 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

पुलिस के अनुसार, फैटू ने बनारसी यादव, अरविंद यादव उर्फ फौजी और विशाल को दो-दो लाख रुपये और हथियार मुहैया कराए थे। असलहा की आपूर्ति बिहार के मुंगेर जिले के मोहम्मद मुकीम ने की थी।


🔴 जेल में बंद हैं साजिश के बड़े नाम

इस हत्याकांड में शामिल कई आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं। इनमें जोगेंद्र यादव उर्फ फैटू, सारनाथ निवासी संपूर्णानंद शुक्ला उर्फ चंदन, श्याम राजभर उर्फ रेखा प्रधान और हथियार तस्कर मोहम्मद मुकीम शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि इन सभी से पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।


🔴 पूर्वांचल में कानून-व्यवस्था पर असर

Varanasi encounter Banarasi Yadav की इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन एक बड़ी सफलता मान रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे संगठित अपराधियों के मनोबल पर सीधा असर पड़ेगा और जमीन विवाद से जुड़े अपराधों पर लगाम लगेगी।

स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है। इलाके में लंबे समय से अपराध और रंगदारी की घटनाओं से डर का माहौल बना हुआ था।


🔴 STF और पुलिस का संयुक्त संदेश

एसटीएफ और वाराणसी पुलिस ने साफ किया है कि फरार अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में तीसरे शूटर की गिरफ्तारी और पूरे नेटवर्क को तोड़ना अब प्राथमिकता है।


Varanasi encounter Banarasi Yadav की यह कार्रवाई केवल एक इनामी अपराधी के अंत की खबर नहीं, बल्कि उस पूरे आपराधिक नेटवर्क पर सीधा प्रहार है जो जमीन विवाद और सुपारी किलिंग के जरिए कानून को चुनौती देता रहा है। वाराणसी और आसपास के जिलों में इस घटना के बाद पुलिस की सक्रियता और सख्ती का संदेश साफ तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले दिनों में अपराध नियंत्रण की दिशा तय करेगा।

 

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