West Bank CNN Journalist Incident: पत्रकारों से बदसलूकी के बाद इजराइली सेना ने नेत्जाह यूनिट की पूरी बटालियन सस्पेंड की, जांच तक ऑपरेशन बंद
West Bank CNN Journalist Incident ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया जगत और सुरक्षा संस्थानों के बीच नई बहस छेड़ दी है। वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांव तयासिर में रिपोर्टिंग कर रही CNN टीम के साथ कथित बदसलूकी और हिरासत की घटना के बाद इजराइली सेना ने नेत्जाह यूनिट की पूरी बटालियन को सस्पेंड कर दिया है। सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक इस रिजर्व बटालियन की सभी ऑपरेशनल गतिविधियां रोक दी गई हैं। 🌍
इजराइली सेना के अनुसार संबंधित बटालियन को तुरंत वेस्ट बैंक क्षेत्र से हटाकर ट्रेनिंग मोड में भेज दिया गया है, जहां उसे प्रोफेशनल और एथिकल मानकों से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
तयासिर गांव में रिपोर्टिंग के दौरान हुआ West Bank CNN Journalist Incident
26 मार्च को वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांव तयासिर में CNN की टीम हालिया हिंसा के बाद की स्थिति को कवर करने पहुंची थी। कुछ समय पहले ही वहां इजराइली सेटलर्स द्वारा हमला किए जाने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद हालात का जायजा लेने के लिए CNN संवाददाता Jeremy Diamond अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे।
टीम स्थानीय लोगों से बातचीत कर रही थी और घटनास्थल के दृश्य रिकॉर्ड कर रही थी। इसी दौरान वहां इजराइली सैनिकों की एक टीम पहुंची और पत्रकारों से पूछताछ शुरू कर दी। शुरुआती बातचीत के बाद माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।
पत्रकारों को हिरासत में लेने और कैमरा तोड़ने का आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ ही देर में सैनिकों ने CNN टीम को आगे बढ़ने से रोक दिया और मौके पर ही हिरासत में ले लिया। इसी दौरान एक फोटो जर्नलिस्ट सिरिल थियोफिलॉस के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई।
आरोप है कि एक सैनिक ने उनका गला पकड़ लिया, जिससे वह संतुलन खोकर जमीन पर गिर पड़े। इस दौरान उनका कैमरा भी क्षतिग्रस्त हो गया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
इजराइली सेना का बयान—बटालियन को ट्रेनिंग पर भेजा गया
West Bank CNN Journalist Incident के बाद इजराइली सेना ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि संबंधित बटालियन को तत्काल प्रभाव से वेस्ट बैंक से हटाकर प्रशिक्षण के लिए भेज दिया गया है।
सेना ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक बटालियन किसी भी ऑपरेशनल गतिविधि में शामिल नहीं होगी और जिन सैनिकों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ अलग से कार्रवाई की जाएगी।
फॉरेन प्रेस एसोसिएशन ने घटना को बताया प्रेस की आजादी पर हमला
अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन Foreign Press Association (FPA) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया।
संगठन के अनुसार पत्रकार अपनी पहचान स्पष्ट रूप से बता चुके थे, इसके बावजूद सैनिकों ने उन्हें रोककर शूटिंग बंद करने के लिए मजबूर किया और कैमरा छीनने की धमकी भी दी। संगठन ने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद कुछ सैनिकों ने हथियार तानकर माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।
FPA ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह घटना मीडिया के प्रति बढ़ती असहिष्णुता का चिंताजनक संकेत है।
हरेदी समुदाय के लिए बनाई गई थी नेत्जाह यूनिट
West Bank CNN Journalist Incident के केंद्र में आई नेत्जाह यूनिट इजराइली सेना की कफिर ब्रिगेड का हिस्सा मानी जाती है। यह यूनिट विशेष रूप से हरेदी समुदाय के युवाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।
इजराइल में सैन्य सेवा अनिवार्य है, जहां पुरुषों को लगभग तीन वर्ष और महिलाओं को लगभग दो वर्ष तक सेना में सेवा देनी होती है। हालांकि 1948 में देश की स्थापना के समय हरेदी समुदाय के लगभग 400 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पुरुषों को धार्मिक अध्ययन जारी रखने के लिए सैन्य सेवा से छूट दी गई थी।
समय के साथ इस समुदाय की संख्या बढ़ती गई और सेना में उनकी भागीदारी कम होने को लेकर समाज में असंतोष भी बढ़ने लगा। इसी पृष्ठभूमि में 1999 में नेत्जाह येहूदा यूनिट का गठन किया गया।
धार्मिक पहचान बनाए रखते हुए सेवा करने की सुविधा
नेत्जाह यूनिट की संरचना अन्य सैन्य इकाइयों से कुछ अलग मानी जाती है। इस यूनिट में महिलाओं की भागीदारी नहीं होती और यहां पूरी तरह धार्मिक वातावरण बनाए रखा जाता है।
सैनिकों को कोषेर भोजन उपलब्ध कराया जाता है और धार्मिक नियमों के अनुरूप दिनचर्या बनाई जाती है। इस यूनिट की तैनाती मुख्य रूप से वेस्ट बैंक क्षेत्र में सुरक्षा और गश्त जैसे कार्यों के लिए की जाती रही है।
हालांकि इसमें हरेदी समुदाय के अलावा अन्य समुदायों के सैनिक भी शामिल होते हैं, लेकिन इसकी पहचान मुख्य रूप से अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय से जुड़ी रही है।
पहले भी विवादों में रही है नेत्जाह यूनिट
West Bank CNN Journalist Incident से पहले भी नेत्जाह यूनिट कई बार विवादों में आ चुकी है। मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स में समय-समय पर इस यूनिट की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात विशेष इकाइयों के लिए प्रोफेशनल प्रशिक्षण और मीडिया के साथ संवाद कौशल बेहद जरूरी होता है।
पत्रकार सुरक्षा को लेकर बढ़ी अंतरराष्ट्रीय चिंता
इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने संघर्ष क्षेत्रों में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध और संघर्ष क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों को पहले से ही कई जोखिमों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में सुरक्षा बलों के साथ टकराव की घटनाएं स्थिति को और गंभीर बना देती हैं।
West Bank CNN Journalist Incident ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संघर्ष क्षेत्रों में प्रेस की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू किया जाना चाहिए।
इजराइल-फिलिस्तीन तनाव के बीच मीडिया की भूमिका पर नई बहस
वेस्ट बैंक जैसे संवेदनशील क्षेत्र में मीडिया की मौजूदगी हमेशा महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यही रिपोर्टिंग अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक जमीनी स्थिति पहुंचाती है। ऐसे में पत्रकारों के साथ होने वाली घटनाएं वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रिया पैदा करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रहतीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मानवाधिकार विमर्श को भी प्रभावित करती हैं।

