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यज्ञ भारतीय संस्कृति की बहुमूल्य देन, विश्व ब्रह्मांड की नाभि- सुरेन्द्र पाल सिंह आर्य

मुजफ्फरनगर। यज्ञ भारतीय संस्कृति की बहुमूल्य देन हैं। आज अमेरिका जैसे देशों में भी यज्ञ को महत्व दिया जा रहा है। यज्ञ विश्व ब्रह्मांड की नाभि है। यज्ञ समष्टि जगत का पालन करता है।

उक्त विचार भारतीय योग संस्थान के प्रान्तीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेन्द्र पाल सिंह आर्य ने निःशुल्क योग साधना केंद्र ग्रीन लैंड माडर्न जू०हाई स्कूल मुजफ्फर नगर में ’आहुति चिकित्सा’विषय पर व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि यज्ञ से मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य की अभिवृद्धि के साथ शारीरिक रोगों के निवारण में भी असाधारण सफलता मिलती है। स्वास्थ्य संवर्धन की यह उपचार प्रक्रिया इतनी सरल और उपयोगी है कि इसके आधार पर मारक और पोषक दोनों ही तत्वों को शरीर के विभिन्न अंग- अवयवो में आसानी से पहुँचाया जा सकता है।

विभिन्न औषधीय वनस्पतियों,पोषक तत्वों की हवि से हर कोई व्यक्ति बल,पोषण एवं रोग निरोधक शक्ति प्राप्त कर सकता है तथा आगत व अनागत रोगों से बचकर दीर्घायु प्राप्त कर सकता है।इसका प्रमुख कारण यह है कि यज्ञीय ऊर्जा के साथ सूक्ष्मीभूत हुए औषधीय व पोषक तत्व सांस के साथ सीधे रस-रक्त में शीघ्रता से मिल जाते हैं 

जैवकोशिकाओ को प्रभावित कर शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि एवं जीवनी शक्ति का विकास असाधारण रूप से करते है।इसके प्रभाव से मन मस्तिष्क से सम्बधित सिर दर्द, धासीसी,अनिन्द्रा,सनक,पागलपन, उन्माद आदि एवं नासिका ,गला ,फेफड़ों आदि से सम्बधित सर्दी, जुकाम,खांसी,दमा,ब्रौंकाइटिस ,टी०बी० व बुखार आदि रोगों में देखते ही देखते लाभ पहुँचता है।

यज्ञ चिकित्सा पद्धति में भी अन्य चिकित्सा पद्धतियों के समान यह देखा गया है कि शरीर में किन किन तत्वों की कमी है ,क्योंकि रोगों का प्रमुख कारण शरीर में अनावश्यक तत्वों की वृद्धि एवं आवश्यक तत्वों की कमी ही होती हैं। वैज्ञानिकों ने खोज की है कि जिस घर में प्रतिदिन यज्ञ होता है उस घर के ९६त्न रोगाणु समाप्त हो जाते हैं

।यज्ञ चिकित्सा पद्धति पूर्ण रूप से वैज्ञानिक पद्धति है। क्षेत्रीय प्रधान राजसिह पुण्डीर ने कहा कि यज्ञ करने वाले यज्ञ कुण्ड के आसपास ही बैठे।यदि रोगी भी यज्ञ-हवन पर बैठ सकता हो तो उसे पूर्व की ओर मुख करके बैठाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यज्ञ ज्ञान का भंडार हैं और विज्ञान का उदगम है।यह ईश्वर भक्ति का साधन तथा पर्यावरण की शुद्धि का कारक है व रोगाणु नाशक है।

योग शिक्षक यज्ञ दत्त आर्य ने कहा कि हम सब जानते हैं कि दुर्गन्धयुक्त वायु और जल से रोग,रोग से प्राणियों को दुःख और सुगन्धित वायु और जल से आरोग्यता और रोग के नष्ट होने से सुख मिलता है।

इस अवसर पर वीरसिंह,राजपाल, राजीव रघुवंशी,कुलदीप अरोरा,अमित कुमार,सत्यवीर पंवार,राज किशोर,यशपाल,केंद्र प्रमुख रजनी मलिक, मुनेश मान,मंजु,दामिनी,आदि काफी संख्या में साधक एवं साधिकाओं ने भाग लिया।

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