Operation Sindoor: भारत का पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब करने का सशक्त अभियान, टोक्यो से शुरू हुई 25 देशों की यात्रा
भारत ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित कदम उठाते हुए ‘Operation Sindoor’ के तहत एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को टोक्यो भेजा है। यह प्रतिनिधिमंडल अब तक की सबसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर निकला है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान को विश्व के समक्ष बेनकाब करना और पहलगाम आतंकी हमले की गम्भीरता को वैश्विक मंचों पर उजागर करना है।
टोक्यो से शुरू हुआ भारत का सशक्त प्रतिनिधिमंडल अभियान
गुरुवार सुबह टोक्यो पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल में देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के वरिष्ठ नेता शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल का मुख्य फोकस 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए क्रूर आतंकी हमले पर भारत की प्रतिक्रिया को व्यापक रूप से दुनिया के सामने रखना है। इसके साथ ही यह प्रतिनिधिमंडल ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत द्वारा सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कड़े कदमों की जानकारी भी देगा।
यहां पर जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर सहित एशिया के महत्वपूर्ण देशों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों का मकसद न केवल आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता दिखाना है, बल्कि यह भी समझाना है कि किस प्रकार पाकिस्तान अपनी जमीन से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर का महत्व और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना
ऑपरेशन सिंदूर को भारत की विदेश नीति में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक अभियान भी है जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान के आतंकवादी कृत्यों से अवगत कराएगा। प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा 25 देशों तक फैला हुआ है, जिसमें वे प्रत्येक देश के नेताओं, नीति निर्धारकों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ संवाद स्थापित करेंगे।
भारत के कई वरिष्ठ सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे कदम आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत की भूमिका को मजबूत करेंगे। यह यात्रा न केवल आतंकवाद पर जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि भारत के शांतिपूर्ण और संवेदनशील दृष्टिकोण को भी प्रदर्शित करेगी।
तुर्की के ड्रोन पर अमेरिका के पूर्व NSA जॉन बोल्टन का चौंकाने वाला बयान
भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच, पाकिस्तान ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए तुर्की से ड्रोन सप्लाई किए थे। पाकिस्तान ने इन ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय क्षेत्र में कई हमलों के लिए किया। हालांकि, भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन ड्रोन को प्रभावी ढंग से नष्ट कर दिया।
इस पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत को तुर्की के ड्रोन से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये ड्रोन कोई खास तकनीकी श्रेष्ठता वाले नहीं हैं। उनका मानना है कि तुर्की के ड्रोन ‘कबाड़’ की श्रेणी में आते हैं और भारत के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम उन्हें आसानी से नष्ट कर सकता है।
जॉन बोल्टन ने कहा, “तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन की महत्वाकांक्षा विश्व स्तर पर फैली हुई है और उनका पाकिस्तान को समर्थन देना एक लंबी और ध्यान देने वाली रणनीति है।” उन्होंने भारत को सलाह दी कि तुर्की की सैन्य मदद के बावजूद भारत को आत्मविश्वास बनाये रखना चाहिए और अपने सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत करना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की नई सक्रियता
भारत ने इस बार अपने मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े मंच की बजाय छोटे और प्रभावशाली देशों की यात्रा को प्राथमिकता दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद को परिभाषित करना और उसको लेकर सहमति बनाना बेहद जटिल है। एक देश के लिए जो आतंकी है, दूसरे के लिए वही ‘मुक्ति सेनानी’ हो सकता है।
जॉन बोल्टन ने भी इस रणनीति की सराहना की और कहा कि भारत की यह पहल आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि भारत ने वर्षों से आतंकवादी हमलों का सामना किया है और अब समय आ गया है कि दुनिया को इसके पीछे की सच्चाई से परिचित कराया जाए।
पाकिस्तान के आंतरिक संकट और चीन का फायदा
अमेरिकी पूर्व NSA ने पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के अंदर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है, जैसे इमरान खान की जेल में गिरफ्तारी और असीम मुनीर का फील्ड मार्शल पद पर आसीन होना। ये घटनाएं चीन के लिए एक अवसर बन सकती हैं ताकि वह पाकिस्तान में अपनी पकड़ और मजबूत कर सके।
यह राजनीतिक अस्थिरता पाकिस्तान के विकास में बाधा डाल रही है और इस स्थिति का फायदा चीन उठा सकता है, जो कि क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, भारत को न केवल सुरक्षा के क्षेत्र में बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी सतर्क रहना होगा।
आगे का रास्ता और भारत की रणनीति
भारत की यह अंतरराष्ट्रीय यात्रा सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि एक रणनीतिक मिशन है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा किए जा रहे संवाद और कूटनीतिक प्रयासों का मकसद विश्व समुदाय में आतंकवाद की गंभीरता और पाकिस्तान के इस मुद्दे पर असली चेहरा दिखाना है।
भविष्य में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह प्रतिनिधिमंडल वैश्विक स्तर पर भारत के पक्ष को मजबूती देने का काम करेगा। यह कदम भारत के लिए न केवल कूटनीतिक जीत होगी, बल्कि देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी निर्णायक साबित होगा।

