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“‘मौत या माफ़ी?’ यमन में भारतीय नर्स Nimisha Priya की फांसी पर सस्पेंस गहराया, पीड़ित परिवार ने कहा- ‘बदला लेकर रहेंगे

यमन में एक हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई भारतीय नर्स Nimisha Priya की जिंदगी अब भी एक धागे पर टिकी हुई है। सात वर्षों से यमन की जेल में बंद निमिषा को 16 जुलाई को फांसी की सजा दी जानी थी, लेकिन इस बीच मामला फिर से तूल पकड़ गया है क्योंकि पीड़ित के परिवार ने ब्लड मनी को लेने से सख्त इनकार कर दिया है।

इस मामले ने जहां एक ओर भारत में भारी जनसमर्थन और भावनात्मक अपीलों को जन्म दिया है, वहीं यमन में पीड़ित परिवार ‘बदले’ की मांग पर अड़ा हुआ है।


‘हम माफ़ नहीं करेंगे, बदला लेकर रहेंगे’: महदी परिवार का दो टूक ऐलान

तलाल अब्दो महदी की हत्या के बाद उनके भाई अब्दुल फतह महदी ने साफ कहा है कि वे किसी भी कीमत पर निमिषा को माफ नहीं करेंगे। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, “भले ही दुनिया भर से दबाव आए, लेकिन हम न ब्लड मनी लेंगे, न माफ करेंगे। हमारा मकसद न्याय है, और हम ‘किसास’ की मांग करते हैं – शरीयत के अनुसार हत्या के बदले हत्या।”

उनका यह बयान तब आया जब भारतीय संगठन और धार्मिक समुदाय निमिषा को माफी दिलाने की कोशिशों में लगे हुए थे।


‘न्याय के साथ खिलवाड़’: महदी परिवार का गुस्सा और भारतीय मीडिया पर आरोप

महदी परिवार का आरोप है कि भारतीय मीडिया निमिषा को बेवजह पीड़िता बनाकर पेश कर रहा है। उनका कहना है कि निमिषा का दावा कि महदी ने उसका पासपोर्ट जब्त किया और उसे प्रताड़ित किया, पूरी तरह झूठ है।

महदी ने लिखा, “कोर्ट में कभी ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया गया। भारत के कुछ चैनल जनता को गुमराह कर रहे हैं। यह सिर्फ एक हत्यारिन को निर्दोष साबित करने की कोशिश है।”


निमिषा का पासपोर्ट विवाद: दावा या सच्चाई?

बताया गया कि महदी ने निमिषा के पासपोर्ट को जब्त कर लिया था और उसे जबरन यमन में रोके रखा गया था। लेकिन महदी के अनुसार, यह कहानी गढ़ी गई थी ताकि निमिषा को निर्दोष दिखाया जा सके। अदालत में कभी ऐसा कोई दस्तावेज या साक्ष्य पेश नहीं किया गया था।


सना की जेल से फांसी तक: निमिषा की अब तक की दर्दनाक यात्रा

केरल की रहने वाली निमिषा प्रिया, एक प्रशिक्षित नर्स थीं जो 2015 में यमन की राजधानी सना में काम करने गई थीं। वहां उनकी मुलाकात तलाल महदी से हुई, जिसने उनके मेडिकल क्लिनिक में निवेश किया।

लेकिन यह रिश्ता जल्द ही एक डरावने मोड़ पर आ गया। निमिषा ने आरोप लगाया कि महदी ने उसे प्रताड़ित किया, शारीरिक और मानसिक रूप से शोषण किया।

जब उन्होंने देश छोड़ने की कोशिश की, तब महदी ने उनके पासपोर्ट को जब्त कर लिया और झूठे दस्तावेजों के सहारे पुलिस में पति-पत्नी होने का दावा कर उन्हें हिरासत में डलवा दिया।


जुलाई 2017: ड्रग्स का ओवरडोज और हत्या की कहानी

हताश और निराश निमिषा ने 2017 में महदी को बेहोश करने की कोशिश की। उसने ड्रग्स का ओवरडोज दे दिया जिससे महदी की मौत हो गई। शव को छिपाने के लिए उसने उसे टुकड़ों में काटकर वाटर टैंक में डाल दिया।

यह अपराध यमन की जनता और कानून व्यवस्था को झकझोर गया। जल्द ही निमिषा को गिरफ्तार किया गया और कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुना दी।


शरिया का कानून और ‘ब्लड मनी’ का संघर्ष

शरिया कानून के अनुसार, हत्या के मामलों में दोषी को सजा-ए-मौत दी जा सकती है, लेकिन पीड़ित परिवार चाहें तो ‘ब्लड मनी’ लेकर माफ कर सकते हैं। इसी प्रावधान के तहत भारत में ‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ बनाई गई, जिसने ब्लड मनी जुटाने के लिए मुहिम शुरू की।

करीब 8.5 करोड़ रुपए (10 लाख डॉलर) की रकम परिवार को पेश की गई, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि सम्मान और इंसाफ का है।


धर्मगुरुओं की पहल: उम्मीद की एक किरण

इस पेचीदा मामले को सुलझाने के लिए भारत और यमन के प्रमुख धर्मगुरुओं ने मध्यस्थता की कोशिश की। भारत के ग्रैंड मुफ्ती एपी अबूबकर मुसलियार और यमन के शेख हबीब उमर बिन हाफिज के बीच बातचीत हुई जिसमें मृतक के भाई को शामिल किया गया।

हालांकि, बातचीत के बाद भी महदी परिवार ने माफी देने से इनकार कर दिया। यह पहला मौका था जब परिवार का कोई सदस्य बातचीत में शामिल हुआ, जिससे कुछ उम्मीद जगी, लेकिन अंतिम नतीजा नकारात्मक ही रहा।


भारत सरकार की सीमाएं और सुप्रीम कोर्ट की चिंता

भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि वह सीमित रूप से ही हस्तक्षेप कर सकती है, क्योंकि यह एक विदेशी भूमि पर हुआ मामला है और वहां की संप्रभु न्याय व्यवस्था के अधीन आता है।

हालांकि कोर्ट ने चिंता जताई कि मानवीय आधार पर प्रयास जारी रहने चाहिए।


‘ऑपरेशन राहत’ में छूट गई निमिषा

जब 2015 में यमन में गृहयुद्ध छिड़ा, तो भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन राहत’ के जरिए हजारों भारतीयों को वहां से सुरक्षित निकाला। लेकिन उस समय निमिषा कानूनी पचड़े में फंसी थीं और वापस नहीं आ सकीं। यही उनके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी बन गई।


क्राउड फंडिंग और निमिषा की मां की गुहार

निमिषा की मां ने बेटी को बचाने के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दीक्राउड फंडिंग के जरिए पैसे इकट्ठा किए गए। केरल के एक प्रसिद्ध व्यापारी ने 1 करोड़ रुपए की मदद की पेशकश की।

‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ लगातार ब्लड मनी इकट्ठा करने और परिवार को मनाने में जुटी रही।


सजा पर रोक, लेकिन खतरा टला नहीं

फिलहाल, 16 जुलाई को होने वाली फांसी को स्थगित कर दिया गया है, लेकिन यह स्थायी राहत नहीं है। अगर महदी परिवार अपने रुख पर अड़ा रहता है तो यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल द्वारा दी गई मौत की सजा कभी भी लागू की जा सकती है।


क्या निमिषा को मिलेगा दूसरा मौका या होगी न्याय की क्रूर परिणीति?

यह मामला आज सिर्फ एक भारतीय नर्स या एक यमनी नागरिक का नहीं रह गया है। यह दो देशों, दो संस्कृतियों और दो न्याय प्रणालियों के टकराव का प्रतीक बन चुका है।

जहां एक ओर मानवाधिकार संगठनों की दलीलें हैं, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार की दर्दभरी पुकार भी है – “हमें न्याय चाहिए, बदले के रूप में।”


अब सभी की नजरें यमन के राष्ट्रपति और न्यायिक तंत्र पर हैं – क्या वे निमिषा को माफ करेंगे या सजा को अंजाम तक पहुंचाएंगे? आने वाले दिन इस दर्दनाक मामले की अंतिम कहानी लिखेंगे।

 

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