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कीव मेट्रो कांड: ‘Glory to Russia’ बोलते ही युवती की बेरहमी से पिटाई, भीड़ ने ताली बजाई और कहा – ‘रूस समर्थक है, सबक सिखाना ज़रूरी है’

यूक्रेन की राजधानी कीव की मेट्रो एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह गर्व नहीं, बल्कि हैरानी और आक्रोश है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक युवती को सिर्फ इसलिए बेरहमी से पीटा गया क्योंकि उसने मेट्रो में खड़े होकर ‘ग्लोरी टू रशिया’ (Glory to Russia) का नारा लगाया। उस एक वाक्य ने पूरे डिब्बे को गुस्से से भर दिया और कुछ ही सेकंड में युवती पर थाप्पड़ों, लातों और घूंसे की बारिश होने लगी।

भीड़ की बेरुखी और हिंसा का खुला तमाशा

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सफेद टी-शर्ट में एक युवक युवती को बुरी तरह से पीट रहा है। कभी थप्पड़, तो कभी लातें… यहां तक कि एक घूंसे के बाद युवती का सिर मेट्रो के लोहे के पोल से जा टकराता है। चारों ओर से शोर मचता है लेकिन मदद की कोई पहल नहीं होती। उल्टा, कुछ लोगों ने इसे ‘देशद्रोह का जवाब’ बताते हुए तालियां तक बजाईं और कहा – “रूस की समर्थक है, इसके साथ तो यही होना चाहिए!

वायरल वीडियो ने खोले समाज की असहिष्णुता के दरवाज़े

Kiev Metro Viral Video अब केवल एक वीडियो नहीं रहा, यह यूक्रेनी समाज में बढ़ती असहिष्णुता और राजनीतिक कट्टरता का प्रतीक बन गया है। जहां एक ओर यूक्रेन में रूस के खिलाफ जंग जारी है, वहीं समाज में ‘रूसी समर्थन’ के नाम पर हिंसा और सार्वजनिक हमलों का बढ़ना गंभीर चिंता का विषय है।

वीडियो में जो हुआ वो डरावना था – यूक्रेनी पुलिस

यूक्रेनी पुलिस के मुताबिक, उन्हें इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया से मिली। पुलिस प्रवक्ता ने बताया, “हमने वीडियो को संज्ञान में लेकर जांच शुरू कर दी है। दोषियों की पहचान की जा रही है।” हालांकि अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

क्या सिर्फ एक नारा इतना बड़ा अपराध है?

ग्लोरी टू रशिया’ कहना कोई संगीन अपराध नहीं है, लेकिन युद्धग्रस्त देश में यह नारा कुछ लोगों के लिए जले पर नमक जैसा साबित हो रहा है। जहां यूक्रेन के लाखों लोग रूस से अपने प्रियजनों को खो चुके हैं, वहीं कुछ लोग इस नारे को राष्ट्रविरोधी मानते हैं।

वीडियो में दिखा डर का माहौल

वीडियो का दूसरा पहलू और भी ज्यादा चौंकाने वाला है। जब युवती पिट रही थी, उस समय एक महिला उसे बचाने की कोशिश करती दिखती है, लेकिन तभी दो अन्य युवक आकर फिर से उस पर हमला कर देते हैं। यह नज़ारा दर्शाता है कि भीड़ मानसिकता कैसे एक इंसान को इंसान नहीं, बल्कि दुश्मन समझ बैठती है।

कीव में पहले भी हुई हैं ऐसी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब किसी को रूस समर्थक बताकर निशाना बनाया गया हो। 2023 में कीव के एक कैफे में भी एक युवक को सिर्फ रूसी भाषा में बात करने पर घेरकर पीटा गया था। तब भी पुलिस ने जांच का भरोसा दिया था लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा।

विशेषज्ञों की चेतावनी – “भीड़तंत्र बन रहा है नया कानून”

मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हैं। यदि कोई सार्वजनिक स्थान पर किसी विचार को व्यक्त करे और उसे इसी वजह से पीट दिया जाए, तो यह एक खतरनाक प्रवृत्ति को जन्म देता है। “भीड़तंत्र को अगर समय रहते रोका नहीं गया, तो कल कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।”

क्या मेट्रो प्रशासन भी जिम्मेदार है?

एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि मेट्रो प्रशासन ने कोई तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की? मेट्रो जैसे जगहों पर CCTV, सुरक्षा गार्ड और इमरजेंसी सिस्टम होते हैं। लेकिन न तो गार्ड ने हस्तक्षेप किया, न कोई इमरजेंसी अलार्म बजा। इस लापरवाही के कारण अब प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आने लगी है

यूक्रेन के विपक्षी नेताओं ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि सरकार आम नागरिकों को कट्टरता और हिंसा से नहीं बचा पा रही है। वहीं कुछ राष्ट्रवादी नेताओं ने उल्टा इस हिंसा को सही ठहराया है।

सोशल मीडिया पर भारी बहस

Kiev Metro Viral Video अब ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम हर जगह छाया हुआ है। एक वर्ग जहां इस कृत्य को “राष्ट्रद्रोह के खिलाफ उचित प्रतिक्रिया” मान रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे “भीड़ की हिंसा और लोकतंत्र पर हमला” बता रहा है।

क्या यूक्रेन को अब भी लोकतांत्रिक कहा जा सकता है?

इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या यूक्रेन अब भी विचारों की स्वतंत्रता वाला लोकतांत्रिक देश है? अगर किसी को सिर्फ इसलिए पीट दिया जाए कि उसने एक असहज विचार ज़ाहिर किया, तो इसका मतलब है कि डर का शासन स्थापित हो चुका है।

यूएन और मानवाधिकार संस्थाओं की नजर

इस वीडियो के वायरल होने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी इस मुद्दे पर ध्यान देने लगी हैं। यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स कमिशन ने इसे “फ्री स्पीच पर हमला” करार दिया है और यूक्रेन सरकार से इस पर रिपोर्ट मांगी है।

आखिरी सवाल – क्या यह पीड़िता को न्याय मिलेगा?

पूरे देश में गूंज रहे इस वीडियो के बाद भी अब तक पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। आरोपी युवक खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़िता की पहचान भी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। सवाल यह है कि क्या यह मामला भी सैकड़ों मामलों की तरह फाइलों में गुम हो जाएगा या कुछ बड़ा कदम उठाया जाएगा?


कीव मेट्रो की घटना ने न केवल यूक्रेनी समाज में गहरे घाव को उजागर किया है, बल्कि यह चेतावनी भी दी है कि अगर विचारों की आज़ादी और सार्वजनिक सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसे दृश्य आम होते जाएंगे। ‘ग्लोरी टू रशिया’ कहने पर हिंसा होना एक लोकतंत्र की हार है, और यह संकेत है कि अब कानून की नहीं, भीड़ की चल रही है।

 

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