Ayodhya में महंत राजू दास का सियासी तूफान: Swami Prasad Maurya को थप्पड़ मारने वाले युवक का सम्मान, बयानों से बढ़ा बवाल
Ayodhya की हनुमानगढ़ी एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में है। इस बार चर्चा का कारण हैं महंत राजू दास, जिन्होंने रायबरेली में पूर्व मंत्री Swami Prasad Maurya को थप्पड़ मारने वाले युवक रोहित को सम्मानित कर दिया। अंग वस्त्र भेंट कर यह सम्मान समारोह हनुमानगढ़ी मंदिर परिसर में आयोजित हुआ, जिसने पूरे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल में हलचल मचा दी।
घटना जिसने राजनीति में मचा दी खलबली
पूरा मामला रायबरेली का है, जहां एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य को पहले युवक रोहित ने माला पहनाई और फिर अचानक थप्पड़ जड़ दिया। इस अप्रत्याशित घटना के बाद मौर्य समर्थकों ने रोहित की जमकर पिटाई की। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ—जल्द ही यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में गर्मा गया।
महंत राजू दास और स्वामी प्रसाद मौर्य की पुरानी तकरार
इस विवाद के पीछे की पृष्ठभूमि भी खास है। कुछ दिन पहले एक टीवी डिबेट के दौरान महंत राजू दास और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच तीखी बहस हुई थी। महंत ने मौर्य के रामचरित मानस और सनातन धर्म पर दिए बयानों का खुलकर विरोध किया था। इसी बहस के बाद से दोनों के बीच तनाव और खुलकर सामने आ गया।
सम्मान समारोह और महंत के तीखे बयान
हनुमानगढ़ी में रोहित का सम्मान करते हुए महंत राजू दास ने कहा—
“भारत देश में कंकड़ में भी शंकर पाए जाते हैं। इस देश में पेड़-पौधों में भी जीव का वास है। यहां सनातन धर्म का और रामचरित मानस का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धर्म का अपमान करने वालों को अगर थप्पड़ नहीं मारा जाएगा, तो और क्या किया जाएगा?”
महंत ने रोहित को आशीर्वाद देते हुए उसके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की और कहा कि जिन्होंने भी रोहित का समर्थन किया है, वे उनके आशीर्वाद के पात्र हैं।
धर्म और राजनीति का संगम
महंत ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे पूर्वजों ने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में कई मंदिर तोड़कर मस्जिदें बनाई गईं और अब भी धार्मिक प्रतीकों का अपमान जारी है। उनके इस बयान को जहां कई हिंदू संगठनों ने समर्थन दिया, वहीं विपक्षी दलों और सेक्युलर संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है।
राजनीतिक हलकों में उठी लहर
महंत राजू दास के इस कदम को लेकर यूपी की राजनीति में जबरदस्त हलचल है। एक ओर हिंदूवादी संगठनों ने इसे ‘धर्म की रक्षा’ का संदेश बताया, वहीं कई राजनीतिक दल इसे हिंसा का समर्थन मान रहे हैं। सपा और बसपा नेताओं ने इस घटना को कानून व्यवस्था के लिए खतरा बताया है।
सोशल मीडिया पर बहस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर #MahantRajuDas और #SwamiPrasadMaurya हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि महंत ने धर्म और आस्था का सम्मान किया, जबकि विरोधियों का कहना है कि धार्मिक नेताओं को हिंसा का समर्थन नहीं करना चाहिए।
क्या बढ़ेगी धार्मिक-राजनीतिक ध्रुवीकरण की रफ्तार?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला उत्तर प्रदेश में धार्मिक ध्रुवीकरण को और तेज कर सकता है। महंत राजू दास का प्रभाव अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में काफी गहरा है, और इस कदम से वह अपने समर्थकों के बीच और लोकप्रिय हो सकते हैं। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।

