कुबुकी रेगिस्तान से निकली नई ऊर्जा क्रांति: चीन का Kubuqi Solar Power Project बना रेगिस्तान का भविष्य
बीजिंग/ओरदोस, – कभी “मौत का सागर” कहलाने वाला चीन का कुबुकी रेगिस्तान अब ऊर्जा और हरियाली का नया प्रतीक बन रहा है। ओरदोस (आंतरिक मंगोलिया) के इस इलाके में लगे Kubuqi Solar Power Project 1.96 लाख सोलर पैनल न सिर्फ बिजली बना रहे हैं, बल्कि रेगिस्तान को खेती और पर्यटन हब में भी बदल रहे हैं।
कुबुकी रेगिस्तान: मौत के सागर से ऊर्जा केंद्र तक-Kubuqi Solar Power Project
चीन का सातवां सबसे बड़ा रेगिस्तान कुबुकी, कभी बंजर और वीरान था। लेकिन यहां मौजूद प्रचुर धूप और विशाल खाली जमीन ने इसे सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए आदर्श जगह बना दिया।
हवाई नज़र से देखें तो पैनलों की घोड़े के आकार की विशाल आकृति दिखाई देती है, जिसे “जुनमा” यानी “फाइन हॉर्स” नाम दिया गया है।
ग्रेट फोटावोल्टिक वॉल: 400 किमी लंबा ऊर्जा सपना
चीन ने यहां ग्रेट फोटावोल्टिक वॉल बनाने की योजना शुरू की है – यह लगभग 400 किमी लंबी और 5 किमी चौड़ी होगी। पूरा होने पर यह 100 मिलियन किलोवाट (100 गीगावॉट) क्षमता का पावर हब होगा।
अब तक 63,000 एकड़ (4,200 हेक्टेयर) रेगिस्तानी जमीन को सोलर पैनलों की समुद्री लहरों में बदल दिया गया है।
ऊर्जा और पर्यावरण का दोहरा लाभ
इस प्रोजेक्ट से हर साल 40 बिलियन किलोवाट-घंटे बिजली बीजिंग-तियानजिन-हेबेई जैसे औद्योगिक इलाकों को मिलेगी।
यह 6 मिलियन टन कोयले की बचत और 16 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कटौती के बराबर होगा।
पैनलों के नीचे रेत रोकने वाले पौधे लगाए गए हैं, जो हवा की रफ्तार कम करते हैं, पानी की नमी बचाते हैं और रेगिस्तान में हरियाली फैलाते हैं।
कोयला और सोलर का संगम
ओरदोस कोयले के बड़े भंडार के लिए भी जाना जाता है। यहां की खदानों से निकलने वाला पानी अब सोलर पैनलों की सफाई और पौधों की सिंचाई में इस्तेमाल हो रहा है। यानी प्रदूषण फैलाने वाली ऊर्जा से हरित ऊर्जा का तालमेल।
स्थानीय लोग बने लाभार्थी
कभी धूल और आंधी से त्रस्त गांव अब खेती और पर्यटन से कमाई कर रहे हैं।
चैडेंग गांव के किसान हान रोंगकुआन ने बताया कि इस साल गांव ने 10,000 एकड़ जमीन पर खेती की है। जमीन को लीज पर देने से हर किसान को लगभग 900 युआन (करीब ₹10,500) प्रति एकड़ की कमाई होगी।
पर्यटन और नई पहचान
अब लोग इस इलाके में सोलर पार्क देखने, लोकल फार्मस्टे में ठहरने और ओरदोस के व्यंजन चखने आते हैं। जो जगह कभी “मौत का सागर” कहलाती थी, वही आज ग्रीन टूरिज्म डेस्टिनेशन बन रही है।
चीन का ग्रीन मिशन और वैश्विक संदेश
यह प्रोजेक्ट चीन की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसमें Three-North Shelterbelt Forest Program (TSFP) के तहत लाखों हेक्टेयर रेगिस्तान को हरियाली में बदला जा रहा है।
अब तक 48 करोड़ एकड़ जंगल लगाए जा चुके हैं।
1.28 बिलियन एकड़ घासभूमि को पुनर्जीवित किया गया है।
2024 की सेंट्रल इकोनॉमिक वर्क कॉन्फ्रेंस में चीन ने साफ कहा था कि रेगिस्तानी इलाकों में नवीकरणीय ऊर्जा केंद्र बनाए जाएंगे, ताकि 2060 तक कार्बन न्यूट्रलिटी हासिल की जा सके।
वैज्ञानिकों की राय
इनर मंगोलिया एकेडमी ऑफ फॉरेस्ट्री साइंसेज के शोधकर्ता होंग गुआंग्यू के अनुसार –
“सोलर पैनल सिर्फ बिजली नहीं दे रहे, बल्कि रेगिस्तान की धूल को रोककर पौधों को पनपने का मौका भी दे रहे हैं। यही मॉडल दुनिया के दूसरे देशों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
2024 में आयोजित यूएन डेजर्टिफिकेशन कॉन्फ्रेंस (COP16) में ओरदोस ने अपने अनुभव साझा किए थे। आज कुबुकी का मॉडल एशिया, अफ्रीका और मध्य-पूर्व जैसे रेगिस्तानी इलाकों के लिए रोल मॉडल बन चुका है।
कुबुकी रेगिस्तान का यह सोलर प्रोजेक्ट साबित करता है कि सही योजना, आधुनिक तकनीक और हरित सोच के साथ कभी बंजर ज़मीन भी इंसानियत के लिए वरदान बन सकती है। चीन ने रेगिस्तान को ऊर्जा और हरियाली का प्रतीक बना दिया है, अब दुनिया की नज़र इसी मॉडल पर टिकी है।

