भारत और भूटान को जोड़ने वाली रेल परियोजनाओं का अनावरण, सीमा पार कनेक्टिविटी को बढ़ावा- India-Bhutan Railway Connectivity
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को दो महत्वाकांक्षी सीमा पार रेल परियोजनाओं का अनावरण किया, जो पहली बार भूटान को भारत के रेलवे ग्रिड से जोड़ेंगी। भूटान, जो पहले से ही अपनी कोई रेलवे लाइन नहीं रखता था, अब भारत के 70,000 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क (India-Bhutan Railway Connectivity) से जुड़ने के लिए तैयार है। यह एक ऐतिहासिक कदम है, जो न केवल भूटान के लिए नई कनेक्टिविटी का मार्ग खोलेगा, बल्कि हिमालयी क्षेत्र में व्यापार, परिवहन और आर्थिक संबंधों को भी नया आकार देगा।
भूटान के लिए पहली रेल परियोजना:
इन नई परियोजनाओं की योजना 20 साल पहले बनाई गई थी, और अब यह एक वास्तविकता बनने जा रही है। पहले चरण में 69 किलोमीटर लंबी कोकराझार (असम) – गेलेफू (भूटान) लाइन पर 3,456 करोड़ रुपये खर्च होंगे, और 20 किलोमीटर लंबी बानरहाट (पश्चिम बंगाल) – समत्से (भूटान) लिंक पर 577 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह दोनों परियोजनाएं भूटान में पहली बार रेलवे कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।
कोकराझार-गेलेफू लाइन चार सालों में पूरी होगी, जबकि बानरहाट-समत्से लाइन तीन सालों में पूरी होनी है। इन रेल लाइनों के चालू होने से न केवल भूटान और भारत के बीच यात्रा आसान होगी, बल्कि यह कनेक्टिविटी दोनों देशों के व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगी।
भूटान के लिए आर्थिक और व्यापारिक अवसर:
भूटान में रेल कनेक्टिविटी के आने से यहां की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। वर्तमान में, भूटान का अधिकांश माल सड़क मार्गों से भारत भेजा जाता है। नई रेल परियोजना के माध्यम से व्यापार के लिए एक सस्ता और अधिक सुलभ परिवहन मार्ग उपलब्ध होगा, जो माल की आवाजाही को तेज और सस्ता बनाएगा। इससे भूटान के लिए भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने का मौका मिलेगा, जबकि भारत को भी भूटान के प्राकृतिक संसाधनों और अन्य उत्पादों तक आसान पहुंच प्राप्त होगी।
इसके अलावा, ये परियोजनाएं भूटान को एशियाई आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का एक नया रास्ता प्रदान करेंगी, विशेष रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में। भूटान में स्थित जलवायु अनुकूल उत्पादों की आपूर्ति भारत और अन्य देशों में बढ़ सकती है, जिससे भूटान के लिए निर्यात बाजार में वृद्धि हो सकती है।
पूर्वी हिमालय में रणनीतिक कनेक्टिविटी:
इन परियोजनाओं का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये भारत-चीन-भूटान ट्राइजंक्शन के करीब स्थित हैं, जहां 2017 में डोकलाम सीमा पर विवाद हुआ था। जैसे-जैसे इस क्षेत्र में चीन की उपस्थिति बढ़ रही है, यह रेलवे कनेक्टिविटी भारत और भूटान के बीच सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारत की अंतरराष्ट्रीय रेल कनेक्टिविटी:
भारत के लिए, यह परियोजना पूर्वी हिमालय में अपनी कनेक्टिविटी को बढ़ाने और व्यापार को गति देने के लिए एक कदम है। भारत पहले ही बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान के साथ रेलवे कनेक्टिविटी स्थापित कर चुका है, जबकि भूटान और म्यांमार के साथ कनेक्टिविटी की योजनाएं प्रगति पर हैं।
भारत-बांग्लादेश: भारत और बांग्लादेश के बीच तीन नियमित ट्रेनें चलती हैं, जिनमें मैत्री एक्सप्रेस, संध्या/मिताली एक्सप्रेस, और बंधन एक्सप्रेस शामिल हैं।
भारत-नेपाल: जयनगर (बिहार) से कुर्था (नेपाल) तक एक नई ब्रॉडगेज रेलवे लाइन का निर्माण किया गया है, जो अब नियमित रूप से चल रही है।
भारत-पाकिस्तान: दोनों देशों के बीच समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस जैसी ट्रेन सेवाएं चलती थीं, जो अब 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद बंद हो गई हैं।
भारत और म्यांमार के बीच भी एक नई रेललाइन जोड़ने की योजना है, जो मणिपुर के मोरेह से म्यांमार के कलाय तक जाएगी।
चीन और भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी:
हालांकि, भारत और चीन के बीच कोई रेलवे कनेक्टिविटी नहीं है, और यह हिमालय और राजनीतिक कारणों से संभव नहीं लगता है, फिर भी भारत अपने अन्य पड़ोसी देशों से अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
भारत और भूटान के बीच इन नई रेल परियोजनाओं का शुभारंभ न केवल दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा, बल्कि यह पूर्वी हिमालय में रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। यह परियोजना भूटान के विकास में योगदान कर सकती है, साथ ही भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को और सुदृढ़ बना सकती है।

